चार नये उत्पादों को जीआई टैग मिला

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नई दिल्ली। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग ने हाल ही में 4 नये भौगोलिक संकेतकों (जीआई) को पंजीकृत किया है। तमिलनाडु राज्य के डिंडीगुल जिले के पलानी शहर के पलानी पंचामिर्थम, मिजोरम राज्य के तल्लोहपुआन एवं मिजोपुआनचेई और केरल के तिरुर के पान के पत्ते को पंजीकृत जीआई की सूची में शामिल किया गया है।

तमिलनाडु के डिंडीगुल जिले के पलानी शहर की पलानी पहाडिय़ों में अवस्थित अरुल्मिगु धान्दयुथापनी स्वामी मंदिर के पीठासीन देवता भगवान धान्दयुथापनी स्वामी के अभिषेक से जुड़े प्रसाद को पलानी पंचामिर्थम कहते हैं। इस अत्यंत पावन प्रसाद को एक निश्चित अनुपात में पांच प्राकृतिक पदार्थों यथाकेले, गुड़-चीनी, गाय के घी, शहद और इलायची को मिलाकर बनाया जाता है। पहली बार तमिलनाडु के किसी मंदिर के प्रसादम को जीआई टैग दिया गया है।

तवलोहपुआन मिजोरम का एक भारी, अत्यंत मजबूत एवं उत्कृष्ट वस्त्र है जो तने हुए धागे, बुनाई और जटिल डिजाइन के लिए जाना जाता है। इसे हाथ से बुना जाता है। आइजोल और थेनजोल शहर इसके उत्पादन के मुख्य केंद्र हैं। मिजोपुआनचेई मिजोरम का एक रंगीन मिजो शॉल/ वस्त्र है जिसे मिजो वस्त्रों में सबसे रंगीन वस्त्र माना जाता है। 

केरल के तिरुर के पान के पत्ते की खेती मुख्यत: तिरुर, तनूर, तिरुरांगडी, कुट्टिपुरम, मलप्पुरम और मलप्पुरम जिले के वेंगारा प्रखंड की पंचायतों में की जाती है। इसके सेवन से अच्छे स्वाद का अहसास होता है और इसके साथ ही इसमें औषधीय गुण भी हैं। 

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