सतत खेती में एग्रो केमिकल्स की भूमिका

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फिक्की, क्रॉपलाइफ इंडिया और एसीएफआई की संयुक्त कांफ्रेंस

नई दिल्ली। कृषि रसायन उपसमिति, फिक्की ने गत सप्ताह सतत खेती में कृषि रसायन की भूमिका पर एक सम्मेलन का आयोजन किया। श्री राघवेंद्र राव सेक्रेटरी (केमिकल एंड पेट्रोकेमिकल), भारत सरकार ने कार्यक्रम का उद्धाटन किया। नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद ने भी सम्मेलन में भाग लिया। इसमें एग्रोकेमिकल कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं प्रमुखों, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, तकनीकी विशेषज्ञों, कॉर्पोरेट्स, नीति निर्माताओं और किसानों ने भाग लिया। एग्रोकेमिकल इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों ने भारत में खेती के तरीकों को अधिक जलवायु प्रतिरोधी एवं किसानों के लिये लाभदायक बनाने पर अपने विचार व्यक्त किये। सम्मेलन में जिन विषयों पर चर्चा की गई, उनमें शामिल थे। नये मॉलीक्यूल्स  के लिये पंजीकरण की समयावधि में कमी, रेगुलेटरी डेटा की सुरक्षा (पीआरडी) और अंतरराष्ट्रीय स्तर के सर्वश्रेष्ठ तरीकों को लागू करना। उन्होंने भारतीय किसानों की मदद के लिये नई तकनीकें लाने के तरीकों, फसलों की सुरक्षा करने वाले केमिकल्स पर जीएसटी को कम करने और नकली एग्रोकेमिकल्स के प्रसार को रोकने पर भी चर्चा की।

श्री आर.जी. अग्रवाल, चेयरमैन, धानुका एग्रीटेक ने कहा कि बेहतर उपज के लिये फसलों की सुरक्षा करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे किसानों को बढिय़ा रिटन्र्स मिलेंगे। हालांकि, किसानों की आमदनी को दोगुना करने की सरकारी समिति के अनुसार में कृषि की समूची प्रक्रिया एग्रोकेमिकल्स की लागत के रूप में योगदान सिर्फ 0.4' है, फिर भी ऐसे में अगर घटिया या मिलावटी कीटनाशकों का प्रयोग होता है, तो कृषि में बाकी 99.6' का निवेश व्यर्थ हो जाएगा। इसलिए किसानों को उत्तम कीटनाशकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर फोकस होना चाहिए। 

ट्विटर लोकसभा टीवी केन्द्रीय कृषि मंत्री @nstomar म.प्र. किसानों की निम्न मांगे है। 

- कृषि और किसान क्षेत्र की समस्या एक दिन में नहीं बनी, न एक दिन में खत्म हो सकती है। 

 - नरेन्द्र सिंह तोमर, केन्द्रीय कृषि मंत्री 

  • गेहूं उपार्जन के 1500 करोड़ और भावांतर भुगतान योजना के 1000 करोड़ केन्द्राश रािश तुरंत म.प्र. को अदा करें।
  • मूंग, उड़द, खरीदी की अनुमति दें ताकि तुरंत खरीदी प्रारंभ हो।

- फीरोज सिद्दीकी,@incmp

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