जीरो बजट फॉर्मिंग पर जोर

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कृषि क्षेत्र के लिए 1 लाख 38 हजार करोड़ 

(विशेष प्रतिनिधि)

नई दिल्ली। केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमन ने गत दिनों संसद में केन्द्रीय बजट 2019-20 पेश किया। इसमें उन्होंने कृषि क्षेत्र के लिए 1 लाख 38 हजार 560 रुपये आवंटित किये। मत्स्य, पशुधन एवं डेयरी के लिए 4,147 करोड़ एवं ग्रामीण विकास के लिए 1,17,647 रुपए का बजट आवंटन किया गया। वित्त मंत्री ने बजट में साफ कहा कि अंत्योदय के केन्द्र बिन्दु हमारे लक्ष्य के रूप में गांव, गरीब और किसान हैं। उन्होंने किसानों की आय दोगुनी करने की जगह इस बार जीरो बजट फॉर्मिंग पर जोर दिया। किसानों के लिए 10 हजार नये किसान उत्पादक संगठन बनाये जाएंगे, जिससे किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले बजट में ग्रामीण क्षेत्रों के बुनियादी ढांचा खड़ा करने और आजीविका के मौके पैदा करने पर ध्यान देने की कोशिश की है। सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए अंतरिम बजट में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की घोषणा की थी। इसने इस योजना के लिए अंतरिम बजट के वादे के अनुरूप 75,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। बजट में शून्य बजट प्राकृतिक कृषि तकनीक को बड़ा प्रोत्साहन दिया गया है और इसे देशभर में अपनाए जाने की बात कही गई है। 

संसद में बजट पेश करने जाती हुईं केन्द्रीय वित्तमंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमन।

वित्त मंत्री ने कृषि क्षेत्र के लिए घोषणा की है कि अगले 5 वर्षों में 10,000 किसान-उत्पादक संगठन (एफपीओ) बनाए जाएंगे। इस समय करीब 4,000 एफपीओ मौजूद हैं। इसके अलावा मत्स्य समेत सहायक क्षेत्र के लिए बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए नए मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के तहत नया मत्स्यपालन विकास फंड बनाया जाएगा। इसी उद्योग में खाद्य एवं मुख्य बीमारियों (एफएमडी) को नियंत्रित करने के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। 

सस्ता महंगा
बर्तन, पंखे, ब्रीफकेस, साबुन, शैंपू, हेयर ऑयल, टूथपेस्ट, पंखे, लैंप, यात्री बैग, सेनिटरी वेयर बोतल, कंटेनर, बर्तन, गद्दा, बिस्तर, चश्मों के फ्रेम, बांस का फर्नीचर, पास्ता, धूपबंत्ती, नमकीन, सूखा नारियल, सेनिटरी नैपकिन आदि सस्ते होंगे। पेट्रोल, डीजल, सोना, चांदी, महंगी धातु, काजू, किताबें, ऑटो पार्ट्स , सिंथेटिक रबर, पीवीसी टाइल्स, तंबाकू, ऑप्टिकल फाइबर, स्टेनलेस स्टील प्रोडक्ट, एसी, लाउडस्पीकर, वीडियो रिकॉर्डर, सीसीटीवी कैमरा, गाडिय़ों के हॉर्न आदि अब महंगे हो जाएंगे।

यह बजट 21वीं सदी के नये भारत के निर्माण के लिए है। भारत में कृषि क्षेत्र में परिवर्तन लाने के लिए बजट में रोडमैप मौजूद है। समाज के गरीब किसान, अनुसूचित जाति तथा वंचित वर्गों को सशक्त बनाने के लिए चौतरफा कदम उठाये गये हैं। यह बजट 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के सपने को पुूरा करने में मदद करेगा।

 

 

- नरेन्द्र मोदी
प्रधानमंत्री

श्रीमती सीतारमण ने कहा, हम कृषि बुनियादी ढांचे पर बड़ा निवेेश करेंगे। हम किसानों की उपज के मूल्य संवर्धन में निजी उद्यमिता को बढ़ावा देंगे।  हालांकि बजट घोषणाओं से किसान निराश हैं। उनका कहना है कि बजट कृषि क्षेत्र के लिए उत्साहजनक नहीं है। इसमें कृषि क्षेत्र में घटती आमदनी जैसे मुख्य मुद्दों के समाधान पर बहुत कम ध्यान दिया गया है।  

प्रमुख बिन्दु
  • पेट्रोल, डीजल हुआ महंगा
  • 2022 तक गांव के हर परिवार के पास बिजली और एलपीजी
  • 2024 तक सभी ग्रामीण परिवारों के घर नल कनेक्शन
  • मत्स्य पालन और मछुआरों के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना
  • 10 हजार नए किसान उत्पादक संगठन बनाने का लक्ष्य
  • 100 नये कलस्टर की स्थापना, 50 हजार शिल्पकारों को लाभ
  • जीरो बजट फॉर्मिंग पर जोर
  • उर्वरक सब्सिडी में 10 हजार करोड़ की वृद्धि
  • खाद्यान्नों, दालों, तिलहनों, फलों और सब्जियों में आत्मनिर्भरता
  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए 14 हजार करोड़
  • पात्र किसानों की पेंशन के लिए 900 करोड़
  • 1220 करोड़ राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना के लिए
  • बांध पुर्नस्थापन और सुधार के लिए 89.37 करोड़

 

 जीरो बजट खेती - एक कड़वा  सच

जैविक खेती करने वाले किसानों के लिए ये सबसे बड़ी दुविधा है कि रसायनिक से ज्यादा लागत लगा कर आधा उत्पादन लेकर अब किसान बाजार में अपना उत्पाद लेकर जाता है तो ग्राहक व्यापारी और शासन प्रशासन सभी उसका यह कहकर मजाक उड़ाते हंै कि जब जीरो बजट या कम लागत में फसल पैदा की है, तो भाव तो रासायनिक से भी कम मिलना चाहिए तुम ज्यादा भाव क्यों मांग रहे हो ।

जीरो बजट खेती किसान के लिए और एक गाय से 30 एकड़ की खेती का नारा गौमाता के लिए बहुत ही हानिकारक है और हानि हो रही है जो इस फार्मेट में कर रहे है वो सभी इन तकलीफों को भोग रहे हैं। आज की प्राकृतिक कहे या जैविक कहें या जीरो बजट कहें किसी भी फार्मेट में रसायनिक से डेढ़ गुना ज्यादा लागत पर खेती होती है और उत्पादन कम से कम     30 प्रतिशत कम होता है यह एक कड़वा सच है।

ना जाने क्यों जो किसान कर रहे हैं वो किसान खुलकर सामने आकर नए किसानों को इन सच्चाईयों से अवगत कराते पता नही किस भावुकता और किस अंधभक्ति में लीन होकर खुलकर विरोध नहीं करते। निश्चित पालेकर जी बहुत महान किसान वैज्ञानिक हंै और उन्होंने खेती को बहुत कुछ दिया होगा मगर कुछ बुराइयां भी हैं। जिनको खुलकर सामने लाना पड़ेगा । जिन्होंने खुद नाम जीरो बजट रखा था वो खुद समझ लिए कि गड़बड़ है तो बदलकर सुभाष पालेकर खेती कर दिया और सरकार उस जीरो बजट को किसानों पर थोप रही है जिस पद्धति का अब कोई मां-बाप नहीं बचा।      

  • प्रेम खोरे, मो. : 9584356668

 

बजट खेती के लिए निराशाजनक

बजट पर बयान जारी करते हुए भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष बबलू जाधव ने कहा कि भारत सरकार द्वारा पेश किया गया कृषि बजट किसानों के लिए निराशाजनक व परेशानी भरा हुआ प्रतीत होता है। बजट से किसानों को काफी उम्मीदें थीं, कि निर्मला सीतारमन द्वारा पिछली सरकार में वाणिज्य मंत्री के रूप में व्यापार को आसान बनाने के लिए 7000 कदम उठाए गए थे। कृषि को आसान बनाने के लिए कम से कम 5000 कदम सुझाए जाने की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन यह बजट किसानों की आशाओं के विपरीत है एवं कागजों में आशावादी दिखाई देता है बजट में किसानों के लिए विभिन्न योजनाओं का कोई विशेष जिक्र नहीं किया गया है देश में किसानों को उम्मीद थी कि बजट में किसानों की आत्महत्याओं, फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीद, मंडियों व भण्डारण की क्षमता को बढ़ाना, कृषि ऋण को दीर्घकालिक व ब्याज मुक्त किए जाने के लिए सरकार कदम उठाएगी, सरकार ने बजट में इन मुद्दों को छुआ तक नहीं किसानों को समृद्ध बनाने हेतु सरकार की तरफ से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए हैं। प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजनाओं हेतु बजट शासकीय दस्तावेजों तक तो सही है लेकिन वास्तव में क्या यह बजट देश को गुमराह करने वाला बजट साबित ना हो जाए ऐसे बजट से कृषि और किसान का कल्याण सम्भव नहीं है केवल सराहना और प्रतिबद्धता के आश्वासन पर खेती की चुनौतियों को कम किया जाना सम्भव नहीं है। यह बजट गांव और किसान के हितों के विरूद्ध है बजट से किसानों में हताशा व निराशा का वातावरण वापस बन सकता है। केंद्र ने चालू वित्त वर्ष में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के लिए आवंटन को 78 प्रतिशत बढ़ाकर 1.39 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। इसमें से 75,000 करोड़ रुपये की राशि सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम-किसान योजना के लिए आवंटित की गई है। सरकार ने वित्त वर्ष 2018-19 के संशोधित बजट अनुमान में इसके लिए 77,752 करोड़ रुपये का आवंटन किया था।

  • बबलू जाधव, भा.कि.यू.

भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता धमेंद्र मलिक ने कहा, सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि की घटती हिस्सेदारी पर अंकुश लगाना है। दुर्भाग्य से इसे रोकने के लिए बजट में कुछ नहीं किया गया है। बजट में राजग के ई-नाम, ग्रामीण हाट जैसी योजनाओं के बारे में चर्चा नहीं की गई है। ऐसे में हमारे लिए यह बजट शून्य है। जय किसान आंदोलन के अविक साहा ने कहा कि जब 2019-20 के बजट अनुमान में आवंटन फरवरी में पेश अंतरिम बजट के समान है तो अब एक अन्य दस्तावेज लाने की क्या जरूरत थी। 

 हालांकि बजट घोषणाओं से सभी नाखुश नहीं हैं। नाबार्ड के चेयरमैन हर्ष भानवाला ने कहा कि इस बजट में ग्रामीण बुनियादी ढांचे और मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी  जैसे कृषि सहायक क्षेत्रों में टिकाऊ परिसंपत्तियों के विकास पर जोर को बरकरार रखने की कोशिश की गई है।  ग्रामीण बुनियादी ढांचा बनाने के लिए बजट में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तीसरे चरण की घोषणा की गई है। इसके तहत अगले पांच वर्षों में 1.25 लाख किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण होगा। इसके लिए 80,250 करोड़ रुपये का अनुमानित बजट आवंटन किया गया है। इस ग्रामीण सड़क कार्यक्रम के लिए वित्त वर्ष 2019-20 में 19,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। 

 बजट में ग्रामीण आवास के दूसरे चरण के तहत वर्ष 2019-20 से 2021-22 के बीच 1.95 करोड़ नए घरों का निर्माण किया जाएगा। मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के पहले चरण में 1 करोड़ घरों का निर्माण किया था, जिसके लिए 2016-17 से 2018-19 के बीच 82,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था।  इस बजट में ग्रामीण आवास कार्यक्रम के लिए 19,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो पिछले बजट आवंटनों के लगभग समान हैं।

यह बजट शब्दों का मकडज़ाल है। युवाओं, मध्यम वर्ग और किसानों में निराशा है। महंगाई बढ़ेगी। जो काम मामूली सुधार से हो सकते थे उन्हें बजट में शामिल कर ध्यान भटकाने की कोशिश की गई है।

- कमलनाथ
मुख्यमंत्री, म.प्र.

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- शिवराज चौहान
पूर्व मुख्यमंत्री, म.प्र.

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