11 उद्यानिकी योजनाओं को चलाएगा एम.पी. एग्रो

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(विशेष प्रतिनिधि)

भोपाल। उद्यानिकी योजनाओं में हो रहे नित नवीन घपलों को देखते हुए कमलनाथ सरकार ने उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की 11 योजनाओं का क्रियान्वयन एम.पी. एग्रो के माध्यम से कराने का निर्णय लिया है। पूर्व में इन योजनाओं का क्रियान्वयन विभाग द्वारा ही कराया जा रहा था। ज्ञातव्य है कि विगत दो-तीन वर्षों से किसानों को आदान सामग्री अपनी पसंद की पंजीकृत दुकान से लेने की स्वतंत्रता दी गई है केवल अनुदान के लिए पक्का बिल संबंधित विभाग को दिया जाता है जिसका भौतिक सत्यापन के बाद भुगतान किसान के बैंक खाते में आ जाता है। परन्तु अब उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की योजनाओं  का क्रियान्वयन करेगा एम.पी. एग्रो।

जल्दबाजी का फैसला

ऐसा प्रतीत होता है कि शासन द्वारा बदलाव का यह निर्णय जल्दबाजी और दबाव में लिया गया है। चर्चा तो यह भी है कि यह बदलाव पीएमओ के हस्तक्षेप एवं दबाव में लिया गया है। इन योजनाओं में गड़बड़ी की शिकायतें पीएमओ तक पहुंचने के बाद इस संबंध में राज्य शासन से कड़ा जवाब तलब किया गया था। इन वित्तीय वर्ष वाली योजनाओं की मध्य अवधि में क्रियान्वयन एजेंसी के बदलाव से लक्ष्यपूर्ति प्रभावित होगी। 

इन योजनाओं में से सूक्ष्म सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण योजना 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' को ही देखें तो अभी तक इस योजना के लक्ष्य का ही निर्धारण नहीं हो पाया है। उद्योग से जुड़े सूत्र बताते हैं कि केन्द्र सरकार ने लगभग 172 करोड़ रूपए का आवंटन इस योजना के लिए प्रदेश शासन को कर दिया है। राज्य सरकार के 40 प्रतिशत हिस्से (लगभग 68 करोड़ रूपए) को जोड़कर इस योजना में ही 250 करोड़ रूपए के लगभग अनुदान का वितरण प्रदेश के किसानों को होना है। वित्तीय वर्ष के 6 माह बीत चुके हैं। क्रियान्वयन एजेंसी के बदलाव से प्रक्रिया में और अधिक विलम्ब होगा और योजनाओं की लक्ष्यपूर्ति के लिए शेष बचा समय अपर्याप्त होगा। बेहतर होगा कि शासन अभी सिर्फ बदलाव की तैयारी करे और इसे लागू अगले वित्तीय वर्ष 2020-21 से करे। अन्यथा इस बदलाव की कीमत प्रदेश के किसानों को चुकानी पड़ेगी।

जानकारी के मुताबिक शासन ने निर्णय लिया है कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' में पंजीकृत कंपनियों से निविदाएं ली जाएंगी। एग्रो ही प्रतिस्पर्धी दरों का निर्धारण करेगा तथा ऑनलाईन पोर्टल पर पंजीकृत किसानों को सामग्री प्रदाय करेगा।

शासन ने निर्णय लिया है कि भौतिक सत्यापन के लिए भी जिला स्तर पर गठित समिति में एम.पी. एग्रो को जिला प्रबंधक को सदस्य के रूप में नामित किया जाएगा साथ ही यही नामित सदस्य अर्थात् एग्रो के जिला प्रबंधक दी गई या स्वीकृत सामग्री के बिल जिला उद्यानिकी कार्यालय में देंगे और भुगतान एम.पी. एग्रो को किया जाएगा। भुगतान मिलने के पश्चात एग्रो के जिला प्रबंधक प्रदायक को भुगतान करेंगे।

इन योजनाओं का क्रियान्वयन करेगा एम.पी. एग्रो

1.     फल पौध रोपण हेतु अनुदान
2.     औषधि एवं सुगंध फसल कार्यक्रम
3.     साग-भाजी क्षेत्र विस्तार योजना
4.     मसाला क्षेत्र विस्तार योजना
5.     घरेलू बागवानी की आदर्श योजना
6.     प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप'
7.     व्यवसायिक उद्यानिकी फसलों की संरक्षित खेती की प्रोत्साहन योजना
8.     राष्ट्रीय उद्यानिकी मिशन/एकीकृत बागवानी विकास मिशन
9.     राष्ट्रीय कृषि विकास योजना
10.     राष्ट्रीय औषधीय पौधा मिशन
11.     उद्यानिकी के विकास हेतु यंत्रीकरण को बढ़ावा देने की योजना


 

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