बीज में बिचौलियों का खेल होगा खत्म

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जन प्रतिनिधियों के सामने होगा बीज वितरण

भोपाल। किसानों तक उचित गुणवत्ता का बीज पहुंचाने के लिए सरकार ने बीज वितरण में बिचौलियों की भूमिका समाप्त करने का निर्णय लिया है। अर्थात् म.प्र. कृषि विभाग एवं सरकार ने मान लिया है कि पूर्व में वितरित किए जा रहे बीज वितरण में बिचौलियों की भूमिका सक्रिय थी।

जानकारी के मुताबिक गत दिनों कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में विभागीय योजनाओं के तहत कृषकों को अनुदान पर बीज प्रदाय प्रक्रिया में बीज की गुणवत्ता एवं मात्रा पर विशेष ध्यान देने का निर्णय लिया गया। 
प्रदेश में नकली एवं अमानक बीजों के वितरण की शिकायतों के बाद सरकार एवं विभाग सक्रिय हुआ है। अब राष्ट्रीय बीज निगम एवं अन्य सरकारी संस्थाओं द्वारा स्वयं उत्पादित बीज ही क्रय किया जाएगा जिनमें बिचौलियों की भूमिका खत्म होंगी। यदि सरकारी संस्थाएं बीज की आपूर्ति नहीं कर पाएंगी तो अन्य प्रदायकों  से बीज क्रय किया जाएगा। कृषि विभाग ऐसी कंपनियों से बीज नहीं खरीदेगा जिनके खिलाफ खराब गुणवत्ता की शिकायत, ब्लैक लिस्टेड या एफआईआर की      गई हो। 
शासन स्तर पर निर्णय लिया गया है कि यदि कोई सरकारी संस्था गुणवत्ता से समझौता कर बीज क्रय करती है तो संस्था के अधिकारी उत्तरदायी होंगे। इसके साथ ही जनप्रतिनिधियों के सामने बीज वितरण करने का निर्णय लिया गया है ताकि गुणवत्ता को पुख्ता किया जा सके। 

3000 बोरी नकली खाद पकड़ाई 

इंदौर। गत दिनों प्रशासन और कृषि विभाग की टीम द्वारा की गई संयुक्त कार्रवाई में सांवेर क्षेत्र के ग्राम लसूडिय़ा परमार के एक गोदाम से 3000 बोरी नकली खाद का जखीरा पकडऩे का मामला सामने आया है। यहां इफको एनपीके और डीएपी के नाम से नकली खाद पैक की जा रही थी। खरीफ सीजन में इन्हें वितरकों के जरिए किसानों तक पहुंचाने की तैयारी थी, लेकिन उसके पहले ही छापा पडऩे से किसानों की फसल बर्बाद होने से बच गई। आरोपी के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है।
ग्राम लसूडिय़ा परमार में रिलायंस पेट्रोल पंप के पीछे सुल्लाखेड़ी के पूर्व सरपंच श्री आनंदीलाल परमार के गोदाम को आरोपी उमेश पिता सुभाष शिवपुरे निवासी देवास ने किराए पर लिया था, जहां नकली खाद बनाए जाने की सूचना मिलने पर प्रशासन और कृषि विभाग की टीम में शामिल एसडीएम राकेश शर्मा और उप संचालक कृषि इंदौर श्री विजय चौरसिया ने कार्रवाई करते हुए आरोपी की गैर मौजूदगी में पंचनामा बनाकर ताला तोड़कर गोदाम में प्रवेश किया। प्रथम दृष्टया पाया गया कि वहां अमानक खाद पैक की जाती थी। इफको के एनपीके 12:32:16 और डीएपी 18:40:0 खाद के नाम से  इफको के बेग में ग्रीन वरदान (भूमि सुधारक) और एग्रोफास (इंडिया) लि. के रत्ना ब्रांड भूमि सुधारक 20:10:10 जिसमें कैल्शियम 20 प्रतिशत, मेग्नेशियम 10  प्रतिशत और सल्फर 10 प्रतिशत था, का इस्तेमाल कर इन्हे इफको एनपीके और डीएपी के बेग में भर कर रखा गया। इन बेगों से एकत्रित किए गए नमूनों के पैकेटों को विश्लेषण के लिए भेजा गया है। वहीं इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक श्री सुनील सक्सेना ने मौके का मुआयना करने के बाद कहा कि यह नकली खाद ही है, जो इफको के नाम से तैयार किया जा रहा था। इस मामले में उन्होंने प्रशासन से आरोपी के खिलाफ कठोर कार्रवाई किए जाने की मांग की है। आपको बता दें कि 200-250 रु. में मिलने वाले जिप्सम के 50 किलो के बेग में काला रंग मिलाकर नकली डीएपी  तैयार करने वाले ऐसे कुटिल व्यापारी इसे डीएपी की मूल कीमत 1450 रु. पर बेचकर एक बोरी पर 1200 रुपए से अधिक  का मुनाफा कमाते हैं।
उप संचालक कृषि इंदौर श्री विजय चौरसिया ने बताया कि 3000 बोरी नकली खाद के साथ  खाली बोरियां भी मिली हैं। छापेमारी में पंजीयन और लायसेंस भी नहीं मिला है। मामले की जांच की जा रही है।  श्री पीके यादव वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी और उर्वरक निरीक्षक विकासखंड सांवेर की शिकायत पर आरोपी उमेश पिता सुभाष शिवपुरे निवासी देवास के खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985  की धारा 7 व 19 सी (द्बद्ब) और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955  की धारा 3 व 7 के तहत थाना क्षिप्रा में मामला दर्ज किया गया है। 

मालवा में जारी है सिलसिला

उल्लेखनीय है कि लम्बे अर्से से मालवा क्षेत्र में नकली खाद बनाने की घटनाएं सामने आ रही हैं। गत वर्ष अक्टूबर में उज्जैन जिले में नकली खाद का मामला सामने आया था। इसके बाद अब इंदौर जिले में पकड़ाए इस नकली खाद के मामले ने क्षेत्र के किसानों को चिंता में डाल दिया है, जो कर्ज लेकर कड़ी मेहनत करके फसल उत्पादन में दिन रात लगे रहते हैं। ऐसे लालची लोगों की धोखाधड़ी के कारण ही किसानों की आर्थिक हालत नहीं सुधर पा रही है। इससे उत्पादन भी प्रभावित होता है। ऐसी घटनाओं से सरकार की पैदावार बढ़ाने वाली किसान हितैषी योजनाओं को भी पलीता लग जाता है।

राजनीतिक  संरक्षण

ऐसे मामलों में किसानों द्वारा प्राय: ऐसे लोगों को विभागीय और राजनीतिक संरक्षण मिलने के आरोप लगाए जाते हैं, अन्यथा क्या कारण है कि ऐसे मामलों के कर्ताधर्ताओं के हौंसले इतने कैसे बुलंद हो जाते हैं, कि वे थोड़े दिन बाद मामले को रफा-दफा करने की बात करने लगते हैं। कोर्ट-कचहरी के मामलों में देरी होने से भी ऐसे लोगों को प्रश्रय मिलता है। 

किसान संगठनों का आक्रोश

इस विषय को लेकर कृषक जगत ने किसानों के हितों से जुड़े संगठनों के लोगों से चर्चा की तो उनका आक्रोश सामने आया। राज्य स्तरीय आत्मा समिति के पूर्व सदस्य अजड़ावदा (बडऩगर) जिला उज्जैन निवासी  श्री योगेंद्र कौशिक ने कहा कि किसानों के साथ धोखाधड़ी करने वाले ऐसे लोगों के खिलाफ हत्या की धारा 302 के समकक्ष या फांसी देने का प्रावधान किया जाना चाहिए। इनके ऐसे कृत्यों से पहले किसान, फिर परिवार और अंत में देश में मरता है। जबकि भारतीय किसान यूनियन इंदौर के जिलाध्यक्ष श्री बबलू जाधव ने मिलीभगत का आरोप लगाते हुए आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई कर इस मामले की जांच सीबीआई या अन्य उच्च स्तरीय एजेंसी से कराने की मांग की है।

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