अब रंगीन कपास से बनेगा रंगीन कपड़ा

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निटरा के वैज्ञानिकों ने उगाई हरे और भूरे रंग की कपास

गाजियाबाद। कपास से बने धागे को रंगकर कपड़ा बनाना अब बीते जमाने की तकनीक होने जा रही है। कमला नेहरू नगर स्थित नॉदर्न इंडिया टेक्सटाइल रिसर्च एसोसिएशन (निटरा) के वैज्ञानिकों ने रंगीन कपास के बीज से खेती कर उससे कपड़ा बनाने में सफलता पाई है। यह बीज दिल्ली के पूसा इंस्टीट्यूट में तैयार हुआ। इसके अगले चरण निटरा में पूरे हुए। पहले हरे और भूरे रंग की कपास की खेती की गई। स्वस्थ फसल लहलहाने तक कामयाबी के बाद कपास से धागा बनाकर कपड़ा तैयार किया गया। उसी कपड़े से पायजामा और बैग बनाए गए हैं। यूरोपीय  देश केमिकल रंगों से रंगे गये कपास नहीं लेते, क्योंकि रसायनिक रंग कैंसर कारक होते हैं।

200 से अधिक रिसर्च

निटरा ने 15 पेटेंट प्राप्त करने के साथ ही 200 से अधिक रिसर्च परियोजनाएं पूरी की हैं। निटरा को इंडोनेशिया, थाईलैंड, कीनिया, इथियोपिया, फिलीपींस, सूडान, बांग्लादेश और नेपाल में कई अंतराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त है। यहां की फिजीकल, केमिकल पैरामीटर, टेक्निकल टेक्सटाइल, एन्वायर्नमेंट लैब नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड ऑफ लैबोरेट्रीज (एनएबीएल) से प्रमाणित है।

निटरा के वैज्ञानिकों ने मानव शरीर के अनुकूल रंगीन कपास को लेकर शोध किया। वैज्ञानिकों के मुताबिक, एजो कलर्स व रसायनिक रंगों से रंगी रुई, धागा व कपड़े से स्किन कैंसर समेत कई गंभीर त्वचा रोगों की पुष्टि हो चुकी है। यही नहीं एक किलो कपड़े को रंगने के लिए एक हजार लीटर पानी बर्बाद होता है। मगर अब धागे को रंगों से रंगने की जरूरत नहीं पड़ेगी। रंगीन कपास से निर्मित कपड़े पूरी तरह मानव शरीर व पर्यावरण के अनुकूल होंगे।

 

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जर्मनी ने लगाया था खतरनाक रसायनिक रंग पर प्रतिबंध

जर्मनी ने 1993 में रंगीन कपड़े में प्रयुक्त एजो डाइज (खतरनाक रसायनिक रंग) को प्रतिबंधित किया था। यही से रंगीन कपास उगाने की प्रेरणा मिली। पूसा इंस्टीट्यूट और निटरा के बीच सहमति बनी। सरकारी मशीनरी की मंजूरी में थोड़ा वक्त लगा। उसके बाद रंगीन कपास का बीज तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हुई। साधारण बीज के जीन में रंग भरने पर शोध किया गया। पूसा इंस्टीट्यूट को एक दशक में बीज तैयार करने में सफलता मिली। यह बीज निटरा को दिया गया। उन्होंने अपने संस्थान में इस बीज से कपास की खेती की। तीन चरणों में खेती के बाद उत्तम फसल मिली। उस कपास से धागा बनाकर देखा गया। कुछ दिक्कतों के बाद निटरा न कपड़ा बनाने में सफलता हासिल की।

निटरा के महानिदेशक डॉ. अरिदम बसु के मुताबिक, निटरा व पूसा के वैज्ञानिक अगले चरण के शोध में लगे हैं। अंतिम रूप से सफलता मिलने पर रंगीन कपास का पेटेंट कराकर किसानों को इसकी सौगात दी जाएगी।

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