तिलहनी फसलों का उत्पादन भरपूर

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प्राच्य भारतीय ऋतु विज्ञान के आधार पर भावी वर्षा का अनुमान
वि.सं. 2076 का स्वामी शनि होने से

 

(श्रीकांत काबरा, मो. : 9406523699)

भारतीय मौसम विभाग और स्काईमेट ने इस वर्ष भारत में सामान्य से कम वर्षा की भविष्यवाणी की है। महंगे और जटिल उपकरणों की सहायता से दीर्घकालीन गणना के आधार पर वर्षा संबंधी पूर्वानुमान की तुलना में प्रकृति में हो रहे बदलाव के आधार पर किसान भाई भी मानसून सीजन में होने वाली वर्षा का पूर्वानुमान अपने सुदीर्घ अनुभव और पारंपरिक ज्ञान के आधार पर करते हैं।

टिटहरी खेतों में पाये जाने वाला एक पक्षी है जो वर्षाकाल के पूर्व अंडे देता है। ऐसा कहा जाता है कि टिटहरी यदि ऊंचाई पर अंडे दे तो अधिक वर्षा, समतल खेत में अंडे दे तो सामान्य वर्षा और गड्ढे में अंडे दे तो सामान्य से कम वर्षा होती है। टिटहरी एक बार में सामान्यत: तीन-चार अंडे देती है। इसके आधार पर वर्षा का पूर्वानुमान किया जाता है, जितने अंडों की नोक आपस में मिली हो उतने मास ही सुवृष्टि होती है। भोपाल संभाग में इस बार टिटहरी ने चार अंडे दिये हैं जिनमें से दो की नोक आपस में मिल रही है। इससे दो माह सामान्य वर्षा होने का अनुमान है और शेष दो माह वर्षा की कमी रहेगी।

टिटहरी के अंडे

इस वर्ष आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष में पंचमी रविवार की है जो उस समय अन्यल्प वर्षा का द्योतक है। इसके साथ ही चैत्र मास में भारत के बड़े भू-भाग में गरज-चमक के साथ वर्षा हुई है जो कि श्राावण मास में वर्षा की कमी दर्शाती है। यथा- एक बूंद चैत में पड़े सहस बूंद सावन में हरे। चैत में यदि एक बूंद पानी बरसता है तो श्रावण में हजार बूंद की कमी होगी।

वस्तुत: भारतीय ऋतु विज्ञान में वर्षा का बादलों में गर्भाधान का समय 195 दिनों का माना जाता है, मार्गशीर्ष (अगहन) से लेकर ज्येष्ठ मास तक के समय में होने वाले बादल, उनका रंग, होने वाली वर्षा के आकलन के आधार पर वर्षा के गर्भ की पुष्टि या हानि का आकलन किया जाता है और ग्रह-नक्षत्रों की युति, चाल आदि के संयुक्त समन्वय से भावी वर्षा का आकलन किया जाता है। यह एक पारंपरिक विज्ञान है जिनका विवरण संस्कृत गं्रथों के साथ ही स्थानीय भाषा में प्रचलित लोकोक्तियों में भी मिलता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा भारतीय सनातन कृषि के संदर्भ में प्रकाशित पुस्तकों में इनका छुटपुट उल्लेख मिलता है लेकिन विदेशी पद्धति से पढ़े अंग्रेजीदां वैज्ञानिक इस पारंपरिक ज्ञान से अनभिज्ञ हैं और इसके गहन अध्ययन अनुसंधान की ओर आज भी उदासीन है। हमारे पूर्वजों को इस धरोहर का संकलन और अध्ययन कर मौसम विभाग द्वारा संकलित आंकड़ों की सहायता से इनका विश्लेषण कर ऐसे गणितीय प्रादर्श सफलतापूर्वक तैयार किये जा सकते हैं जिनके आधार पर मौसम का सटीक पूर्वानुमान लगाना संभव है।

संक्षेप में इस बार आषाढ़ श्रावण माह में सामान्य वर्षा की कमी रहेगी। धनु राशि पर शनि के रहने से अन्न महंगा, वर्षा में कमी लेकिन तेज वर्षा के दौर संभावित हैं। वर्षाधिपति शनि होने से तेल वाली फसलों की उपज अच्छी होगी।

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