मध्य प्रदेश भी बासमती उत्पादक राज्यों में होगा शामिल

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(विशेष प्रतिनिधि)

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने केन्द्र के सिर्फ 7 राज्यों में बासमती चावल के उत्पादन के फैसले को रद्द कर दिया है। केन्द्र के निर्णय के अनुसार पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों तथा जम्मू कश्मीर में ही बासमती चावल की खेती की बात कही गई थी। हाईकोर्ट ने केन्द्र के इस निर्णय से संबंधित 29 मई 2008 तथा 7 फरवरी 2014 के दो विभागीय ज्ञापनों को रद्द कर दिया है।

  • भारत से 40 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल का निर्यात।
  • इसमें 25त्न हिस्सेदारी म. प्र. की।
  • यूएस, यूके में म.प्र. के बासमती की भारी मांग।

इन ज्ञापनों को मध्य प्रदेश ने चुनौती देते हुए कहा था कि म.प्र. के 13 जिलों को भी बासमती चावल की खेती वाले भौगोलिक इलाकों में शामिल किया जाये। म.प्र. ने खरीफ 2016 में बासमती चावल के बीज वापिस लेने के केन्द्र के निर्णय को भी गलत ठहराया था। म.प्र. शासन का कहना था कि यह बीज एक्ट के अनुसार लिये गये निर्णय नहीं है। हाई कोर्ट ने बीज एक्ट के अध्ययन के बाद अपने निर्णय में कहा कि बीज एक्ट का इस बात से कोई संबंध नहीं है कि कहां और कैसे बीज का प्रयोग किया जाये। म.प्र. के कृषि विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने प्रदेश के बासमती उत्पादक किसानों के हित में केन्द्र के आदेश को कोर्ट में चुनौती देने का निर्णय लिया था। उनके अथक प्रयासों के बाद अंतत: प्रदेश शासन कोर्ट से किसानों के हित में निर्णय कराने में सफल रहा। हाईकोर्ट के इस फैसले से प्रदेश के बासमती उत्पादक किसान अपनी परंपरागत बासमती चावल की खेती कर सकेंगे और उनके उत्पादित बासमती चावल के उचित दाम भी मिल सकेंगे।

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