राष्ट्रीय किसान महासंघ का बायकॉट पेप्सिको अभियान शुरू

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गुजरात के आलू किसानों पर मुकदमे के खिलाफ

भोपाल/ अहमदाबाद। गुजरात के आलू किसानों पर पेप्सिको कंपनी द्वारा दायर किए गए मुकदमे के खिलाफ राष्ट्रीय किसान महासंघ ने 'बायकॉट पेप्सिको अभियानÓ शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ एवं हाई पावर कमेटी तथा राष्ट्रीय किसान महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री शिव कुमार शर्मा (कक्काजी) ने कहा कि गुजरात के आलू किसानों पर केस करने वाली पेप्सिको कंपनी के सामान को सड़कों पर गिराकर राष्ट्रीय किसान महासंघ ने पेप्सिको कंपनी को चेतावनी दी है कि आंदोलन की शुरुआत हो चुकी है। जल्द ही कंपनी के खिलाफ बड़ा विरोधी प्रोग्राम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि कंपनी ने केस वापस नहीं लिए तो पेप्सिको का एक भी सामान देश में बिकने नहीं दिया जाएगा।

  • मुकदमे बिना शर्त वापिस लें।
  • पेप्सिको मुआवजा दे।
  • भारतीय किसानों तक नहीं पहुंची बीजों की आजादी।
  • बीज अधिकार मंच का गठन होगा।

ज्ञातव्य है कि गत दिनों पेप्सिको इंडिया ने बौद्घिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए साबरकांठा जिले के किसानों पर मुकदमा दायर किया था। कंपनी ने इन किसानों पर आलू की एफएल 2027 किस्म, जिसे एफसी-5 के नाम से भी जाना जाता है, के बीजों की खरीद करने और उस किस्म के आलू की बिक्री करने का आरोप लगाया है। आलू की इस किस्म को कंपनी ने पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2001 के तहत पंजीकृत कराया है। पेप्सिको आलू की इस किस्म का उपयोग लेज चिप्स बनाने में करती है।

हालांकि गतदिनों अहमदाबाद में वाणिज्यिक न्यायालय में सुनवाई के दौरान पेप्सिको की ओर से  वकील ने अदालत के बाहर सुलह करने का सुझाव दिया था। वकील ने न्यायमूर्ति श्री एम.सी. त्यागी को बताया कि पेप्सिको यह मामला वापस ले सकती है यदि किसान इस समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार हो जाए कि वे केवल कंपनी के लिए ही आलू की पंजीकृत एफसी-5 किस्म के बीजों की खरीदारी करेंगे और उत्पाद को केवल इसी कंपनी को बेचेंगे।  यह सुझाव दिया गया है कि किसान लिखित में यह वचन दे सकते हैं कि वे भविष्य में कभी भी आलू की इस पंजीकृत किस्म की न तो खरीदी करेंगे और न ही बुआई करेंगे। 

इस बीच किसानों की पैरवी कर रहे वकील ने पेप्सिको के आरोपों पर लिखित सफाई दायर करने के लिए 12 जून तक का समय मांगा है। पेप्सिको के वकील ने भी किसानों के निवेदन का प्रत्युत्तर दायर करने के लिए 12 जून तक का समय मांगा है। इस बीच किसानों पर इस किस्म के आलू उगाने और बेचने पर रोक का अदालत का फैसला 12 जून को होने वाली अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगा।    

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