धारा मोड़कर  खत्म किया जल संकट

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नर्मदा का पानी बना संजीवनी

 (शैलेष ठाकुर)  

देपालपुर  जोश और जूनून के साथ कोई कार्य किया जाए तो उसके नतीजे हमेशा अच्छे ही निकलते हैं। इस बात की पुष्टि एक बार फिर तब हो गई जब देपालपुर तहसील के ग्राम चित्तोड़ा और पलसोड़ा के किसानों और ग्रामीणों ने नर्मदा के बह रहे  व्यर्थ पानी को तीन दिन लगातार मेहनत कर तीन किलोमीटर दूर से अपने गांवों के बीच स्थित तालाब तक पहुंचाकर  जल संकट दूर कर लिया। तालाब भरने से गांव के कई नलकूप भी रिचार्ज हो गए हैं नर्मदा का यह पानी जायद की फसलों के लिए संजीवनी बन गया है।

वर्ष 2015 में तत्कालीन  प्रदेश सरकार द्वारा इजराइली तकनीक पर आधारित बहुउद्देश्यीय नर्मदा गम्भीर मालवा लिंक परियोजना का कार्य इन दिनों अपने अंतिम चरण में चल रहा है। करीब 150 किलोमीटर लंबी और 2187 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना को इंदौर -उज्जैन जिले कि छः तहसीलों के 158 गांवों में पचास हजार हेक्टेयर जमीन की सिचाई व पेयजल  के लिये उपयोग में लाया जायेगा,ओंकारेश्वर  से उबड़ खाबड़ पहाड़ी रास्तों से होते हुए  500 फ़ीट  ऊंची चढ़ाई के बाद चार पम्पिंग स्टेशनों के जरिये तीन मीटर भूमिगत लोहे की पाइप लाइन का इन दिनों देपालपुर व सांवेर क्षेत्र के अनेक गांवों में परीक्षण चल रहा है। जिसमें  वॉल्वो की टेस्टिंग व लाइन के लीकेज चेक किये जाने के दौरान नर्मदा का पानी क्षेत्र के सूखे खेतों व नालों में व्यर्थ बह रहा था। जिसका किसानों और ग्रामीणों ने जुगत भिड़ाकर सदुपयोग कर  नई  मिसाल कायम की है।

 

दरअसल हुआ यूँ कि ग्रामीणों ने नर्मदा लिंक परियोजना के इस कार्य में गत कई दिनों से वाल्वों में से बह रहे व्यर्थ पानी का सदुपयोग करने की ग्राम चित्तोड़ा और पलसोड़ा के किसानों ने ठानी और गेती- फावड़ों की मदद से तीन किलोमीटर दूर से खेतों के अंतिम  छोर से एक मेड़ बनाकर पहले उसे गांव से गुजरने वाले बरसाती नाले में लाया गया और फिर जेसीबी की मदद से ज़मीन खोदकर इस पानी का रुख तालाब की ओर मोड़ दिया। नतीजा यह निकला  कि बारिश में भी नहीं भरने वाला यह तालाब तीन दिन  में नर्मदा के पानी से भर गया है। इससे न केवल जल संकट से मुक्ति मिली है,बल्कि अंतिम सांसे गिन रहे गांव के कई नल कूप भी रिचार्ज हो गए हैं।  साथ ही अनेक किसानों के खेतों में मुरझा रही प्याज,धनिया,मक्का की फसलों व सब्जियों के लिये नर्मदा का पानी संजीवनी बन गया है। सिचाई के बाद फसलें अब पुनः लहलहाने लगी है। इससे लाभान्वित हुए गांवों में ख़ुशी की लहर दौड़ गई है।

 

इस बारे में क्षेत्र के उन्नत कृषक श्री भारत पटेल चित्तोड़ा ने कहा कि  हमारा मालवा क्षेत्र  धीरे धीरे रेगिस्तान बनता जा रहा था हमारे लिये तो जैसे माँ नर्मदा वरदान बन कर आई है और सरकार द्वारा हम किसानों को यह अब तक कि सबसे बड़ी सौगात दी गई है। वहीं किसान संघ के श्री हंसराज  नागर छड़ोदा का कहना है कि अब हमारे क्षेत्र में मां नर्मदा के जरिये खुशहाली की शुरुआत हो रही है गांव में नर्मदा जल के  तालाब में आने के बाद हमारे नलकूप भी रिचार्ज हो रहे है ओर वाटर हार्वेस्टिंग की वजह से हमारे बोरवेलों का जलस्तर भी काफ़ी बढ़ गया है।

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