अग्रिम भंडारण में कमी से आ सकता है उर्वरक संकट

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(विशेष प्रतिनिधि)

भोपाल। देशव्यापी चुनावी सरगर्मी के बीच मध्य प्रदेश में आगामी खरीफ सीजन के ऊपर उर्वरक संकट का खतरा शनै: शनै: बढ़ता जा रहा है। चुनाव की इस बेला में शासन-प्रशासन ने इस संकट पर समय रहते ध्यान नहीं दिया तो प्रदेश का किसान चुनावी नतीजों का जश्न मनाने के बजाय उर्वरक के लिए लाईन में खड़ा होगा। चुनाव में मिले किसान हितैषी वादों से उल्लासित किसान एक बार फिर अपनी आधारभूत समस्या कृषि आदान की कमी से जूझ रहा होगा।

हालांकि प्रदेश के कृषि मंत्रालय ने परम्परा का निर्वहन करते हुए 31 मई 2019 तक के लिए अग्रिम भण्डारण योजना जारी कर दी है, साथ ही योजना के लिये मार्कफेड से लेकर किसान स्तर तक के लिए लक्ष्यों की खानापूर्ति भी कर दी है। मार्कफेड ने भी अपने अग्रिम भण्डारण के लक्ष्य 9.40 लाख मे. टन के उर्वरक क्रय के आदेश जारी कर दिये हैं। जबकि मार्कफेड के भण्डार गृहों में लगभग 2 लाख 70 हजार मे. टन उर्वरक का स्टॉक पहले से ही है। सहकारी समितियों के गोदामों में भी लगभग डेढ़ लाख टन उर्वरक रखा हुआ है। लेकिन किसान स्तर पर उर्वरक उठाव नगण्य है। ऐसी स्थिति में नये उर्वरक के भण्डारण की व्यवस्था बिगडऩे लगी है।

कृषि विभाग का मैदानी अमला चुनावी व्यस्तता के चलते किसानों को अग्रिम उठाव के लिए प्रेरित नहीं कर पा रहा है। कृषि ऋण में राहत की चुनावी घोषणाओं के कारण सहकारी समितियों और सहकारी बैंकों की ऋण वसूली प्रभावित हो रही है और वे धीरे-धीरे गहरे वित्तीय संकट की गर्त में गिरते जा रहे हैं। जिसका अपरोक्ष असर मार्कफेड जैसी नोडल एजेन्सी पर भी पड़ रहा है। जिसके कारण भी समितियों को उर्वरक की आपूर्ति बाधित हो रही है। उर्वरक उद्योग से जुड़े सूत्र बताते हैं कि चूंकि सीजन में उर्वरक की आवश्यक मात्रा की आपूर्ति संभव नहीं हो पाती है इसलिए शासन द्वारा अग्रिम भण्डारण व उर्वरक उठाव की व्यवस्था की जाती है। इस व्यवस्था में भण्डारण के लिए गोडाउन की व्यवस्था भी एक महत्वपूर्ण बिन्दु है। लेकिन इस व्यवस्था के क्रियान्वयन में शासन- प्रशासन की अन्यत्र व्यवस्तता या उदासीनता के कारण प्रदेश में उर्वरक की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है जिसके कारण किसान एक बार फिर लाईन लग कर प्रशासन के डण्डे खा रहा होगा।

उर्वरक की अग्रिम भण्डारण योजना 31 मई तक

प्रदेश के किसानों को खरीफ 2019 में आसानी से रसायनिक उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शासन द्वारा अग्रिम भण्डारण योजना चलाई जा रही है। यह योजना 31 मई 2019 तक जारी रहेगी।

ज्ञातव्य है कि प्रदेश में अग्रिम भण्डारण की यह योजना वर्ष 2012-13 से चलाई जा रही है तथा यह अगले सीजन में भी जारी रहेगी। योजना के तहत शासन ने खरीफ 2019 के लिए मार्कफेड प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति स्तर पर अग्रिम भण्डारण के लिए तथा किसानों द्वारा समितियों से अग्रिम उठाव के लक्ष्य तय कर दिए गए हैं। इसमें मुख्य रूप से डीएपी काम्पलेक्स, यूरिया एवं पोटाश उर्वरक शामिल हैं। इन उर्वरकों का मार्कफेड 9.40 लाख मी. टन एवं समितियां 7.15 लाख मी. टन भण्डारण कर सकेगी। इसके साथ ही किसान 4.90 लाख मी.टन का अग्रिम उठाव कर सकेंगे। राज्य शासन ने अग्रिम भण्डारण योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कलेक्टरों को नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।

उर्वरकवार अग्रिम भण्डारण एवं उठाव के लक्ष्य
(लाख मी. टन)
उर्वरक मार्कफेड के लिए  समितियों के लिए  किसानों के लिए 
डीएपी 4 3 2
काम्पलेक्स 1 0.85 0.65
यूरिया 4 3 2
पोटाश 0.4 0.3 0.25
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