ऋण माफी - सिर्फ वोट बैंक की राजनीति

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ड्यू डेट बढ़ाना एक नया पैंतरा

(विशेष प्रतिनिधि)

भोपाल। देश एवं प्रदेश में चुनावी सरगर्मी के बीच जय किसान फसल ऋण माफी सिर्फ वोट बैंक की राजनीति है। इससे किसानों का भला नहीं हुआ है, सभी आचार संहिता के फेर में फंस गए हैं। मोबाईल संदेश से किसानों की दुखती रग पर नमक छिड़का गया है, अब ऋण की ड्यू डेट बढ़ाने का नया पैंतरा किसानों को भरमाने के लिए है, जिससे सोसायटी या बैंक चुनाव के मौके पर नोटिस देकर या ऋण मांग कर वोट बैंक न बिगाड़ दें। यह कहना है प्रदेश के उन किसानों का जिनका अब तक कोई कर्ज माफ नहीं हुआ है तथा ऋण माफी की लिस्ट में भी उनका नाम नहीं है। ऐसे में सहकारी समितियों का ऋण चुकाए बगैर खाद लेने में परेशानी होगी। ऋण चुकाने की ड्यू डेट बढ़ाने का लाभ नहीं मिल पाएगा क्योंकि खाद लेने वाले किसानों को ऋण तो चुकाना ही पड़ेगा।

आचार संहिता ऋण माफी में बाधक

 

इधर सरकार का कहना है कि ऋण माफी योजना में आने वाले किसानों को राहत दी गई है। फसल ऋण का पैसा किसान अब 15 जून तक चुका सकते हैं। पहले उन्हें यह ऋण राशि 28 मार्च तक देनी पड़ती थी। साथ ही सरकार ने कहा है कि किसानों को इसका सीधा लाभ यह होगा कि वे पिछले वर्ष लिए गए खाद का पैसा चुकाकर नया कर्ज ले सकेंगे। ऋण माफी योजना में आने वाले किसानों को फायदा होगा इसमें वो किसान भी शामिल हैं जो 31 मार्च 2018 तक कर्ज चुका दिए हैं तथा जिनके आवेदन प्रक्रिया में हैं। सरकार का कहना है कि ऋण चुकाने की ड्यू डेट का फायदा उन किसानों को नहीं मिलेगा जो योजना के तहत अपात्र हंै। सरकार का कहना है कि अब तक 25 लाख किसानों का कर्ज माफ किया गया है इसमें लगभग 9 लाख डिफाल्टर किसान भी शामिल हैं जो अब नया कर्ज ले सकते हैं। एक ओर सरकार नए फरमान निकाल कर अपनी पीठ थपथपा रही है तो दूसरी तरफ किसान अपने को ठगा सा महसूस कर रहा है। 

खण्डवा जिले के जामनी गुर्जर गांव के किसान श्री राजकुमार पटेल का कहना है कि सरकार केवल वोट की राजनीति कर रही है। हमारे गांव में एक भी किसान का कर्ज माफ नहीं हुआ है, बैंक वसूली का तगादा न करे और इसका फायदा चुनाव में मिले यह सोचकर सरकार ने ऋण चुकाने की अवधि बढ़ाई है इससे कोई लाभ नहीं है। कर्ज पर ब्याज तो लग ही रहा है। जून तक किसान फिर कर्ज में डूब जाएगा तो ऋण कैसे चुकाएगा। श्री पटेल का कहना है कि वर्तमान में नई बात सामने आ रही है आचार संहिता लगी होने के बावजूद सहकारी बैंक खाते में पैसा आने का मोबाईल पर मैसेज आता है फिर कुछ देर बाद गायब हो जाता है खाते में भी कुछ नहीं रहता। उन्होंने बताया कि ऐसा लगता है मैसेज भेजकर याद दिला रही है सरकार कि पैसा आएगा वोट हमें ही देना।

 इधर कुआं, उधर खाई 

किसान बने डिफाल्टरसहकारी संस्थाएं अर्थ संकट से परेशान 

इंदौर। इधर मप्र  में ऋण माफी के मुद्दे ने न केवल किसानों को, बल्कि ऋण प्रदाता सहकारी संस्थाओं को भी परेशानी में डाल दिया है। कर्जमाफी की प्रतीक्षा में कई नियमित किसानों द्वारा भी अपना बकाया ऋण जमा नहीं किए जाने से वे चूककर्ता बन गए हैं, वहीं दूसरी तरफ सहकारी संस्थाएं भी ऋण जमा नहीं होने से आर्थिक संकट में आ गई है। कहा जा सकता है कि ऋण माफी के मुद्दे पर इधर कुआं, उधर खाई वाली स्थिति निर्मित हो गई है।

बता दें कि प्रदेश सरकार द्वारा राज्य के किसानों के दो लाख तक के ऋण माफ किए जाने की घोषणा के बाद जो नियमित किसान हैं, उन्होंने भी अपना कर्ज ऋण माफी होने की आस में नहीं चुकाया है। इस कारण सहकारी संस्थाओं की भी वसूली नहीं हो पाने से उनके सामने भी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। इसका प्रभाव बैंकों के वित्त कोष पर भी पड़ेगा। एक ओर चूककर्ता किसानों को अगले सीजन के लिए ऋण मिलना मुश्किल है। सहकारी संस्थाओं को नकद भुगतान और खाद वितरित करने में परेशानी आ सकती है।

उल्लेखनीय है कि सरकार द्वारा आचार संहिता के बाद कई अपात्र किसान भी सरकार से ऋण माफ किए जाने की आस कर रहे हैं और उन्होंने अपना बकाया ऋण जमा नहीं किया है। इसलिए सरकारी अभिलेखों में वे चूककर्ता बन गए हैं और नियमानुसार अब 1 अप्रैल से उन्हें 11 प्रतिशत ब्याज देना होगा। हालांकि जिन किसानों ने ऋण माफी के लिए आवेदन दिए हैं उनसे वसूली नहीं की जाएगी, लेकिन जय किसान ऋण माफी योजना में शामिल नहीं होने वाले शेष किसानों को अपनी बकाया राशि जमा करनी ही होगी।

 

बालागांव हरदा के कृषक श्री नन्हेलाल भाटी का कहना है कि कर्ज माफी अब तक नहीं हुई है यह वोट बैंक हासिल करने का शगूफा है। फसल ऋण चुकाने की तिथि जून तक बढ़ाने में सरकार का फायदा है। किसान तो अभी गेहूं, चना बेचकर शादी-ब्याह में रकम खर्च कर देगा, पहले का कर्ज नहीं उतरेगा नया कर्ज चढ़ जाएगा, फिर डिफाल्टर घोषित हो जाएंगे।

सागर जिले के ग्राम हीरापुर सुरखी के कृषक श्री राजेन्द्र सिंह लोधी कहते हैं कि 3 लाख रुपए से अधिक का कर्ज सहकारी एवं राष्ट्रीयकृत बैंकों का है। 2 लाख रुपए तक की ऋण माफी की घोषणा के बावजूद सूची में नाम नहीं है। कर्ज पर कर्ज चढ़ता जा रहा है, चुकाने की स्थिति में नहीं है फिर तिथि आगे बढ़े या पीछे इससे क्या फर्क पड़ता है।

शाजापुर जिले की कालापीपल तहसील के ग्राम खरदोन कला के कृषक श्री जयनारायण पाटीदार ने फसल ऋण जमा करने की अवधि 15 जून तक बढ़ाने को सराहनीय कदम बताते हुए कहा कि हमारे गांव में 50 हजार तक के लगभग 150 किसानों का कर्ज माफ हुआ है। ड्यू डेट बढऩे से किसान को समय मिलेगा तथा वह खरीफ की तैयारी आसानी से कर सकेगा। उन्होंने बताया कि एक से दो लाख रुपए तक ऋण लेने वाले कृषकों का अभी कर्ज माफ नहीं हुआ है। इनकी कर्ज माफी चुनाव के बाद होगी। बहरहाल फसल ऋण माफी योजना में अपात्र पाए गए किसानों को तो अपना बकाया ऋण जमा करना ही है बस मोहलत के दिन बढ़ाए गए हैं। पात्र किसानों को भी आचार संहिता खत्म होने का इंतजार करना होगा। प्रदेश के अधिकांश किसान ऋण माफी के इंतजार में हैं।

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