पीएम किसान योजना के लाभ से किसान वंचित

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गैर भाजपा शासित राज्यों के किसानों को नुकसान

 

(विशेष प्रतिनिधि)

भोपाल/नई दिल्ली। लगभग एक माह पूर्व देश में प्रारंभ की गई पी.एम. किसान सम्मान योजना में गैर भाजपा शासित राज्यों के किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है क्योंकि 2000 रुपये की पहली किस्त उनके खाते में नहीं आ पाई है। इसका मुख्य कारण किसानों का नाम पोर्टल पर अपलोड नहीं होना माना जा रहा है। अगर नाम नहीं दिए गए तो गैर भाजपा शासित राज्यों के किसानों को 6000 रुपए सालाना नुकसान उठाना पड़ेगा, जिसकी जिम्मेदार राज्य सरकारें होंगी।

 

पीएम किसान योजना के समन्वयक एवं कृषि मंत्रालय भारत सरकार में संयुक्त सचिव श्री विवेक अग्रवाल ने कृषक जगत को बताया कि अब तक देश में योजना के तहत पात्र किसानों को 5500 करोड़ रुपए की राशि का वितरण किया जा चुका है।

 

 

 

 

 

देश के 2 हेक्टेयर से कम जोत वाले लगभग 12.50 करोड़ लघु एवं सीमांत किसानों को एक स्थायी आय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केन्द्र सरकार ने पीएम किसान योजना प्रारंभ की है जिसके तहत किसानों को तीन किश्तों में सालाना 6000 रुपए खाते में दिए जा रहे हैं। इसके लिए अंतरिम बजट 2018-19 में 20 हजार करोड़ रुपए एवं 2019-20 में 75 हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है।

केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने पीएम किसान सम्मान योजना में 2000 रुपए की पहली किस्त भेजे जाने के लिए म.प्र., पश्चिम बंगाल एवं अन्य गैर भाजपा शासित राज्यों से किसानों के नाम की मंजूरी नहीं मिलने पर खेद जताया। उन्होंने कहा कि क्या इन राज्यों का व्यवहार सार्वजनिक या राष्ट्रीय हित में है।

 

 

 

 

प्रधानमंत्री ने इस योजना का शुभारंभ कर किसानों के खातों में 2000 रु. की पहली किश्त जारी कर दी है परन्तु म.प्र. राजस्थान, पश्चिम बंगाल, दिल्ली एवं उड़ीसा के किसानों को इसका लाभ नहीं मिला है। केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली का कहना है कि इन राज्यों की सरकारें पीएम किसान योजना में सहयोग नहीं कर रही है। इस कारण छोटे एवं लघु सीमांत किसानों को नुकसान हो रहा है।

इधर म.प्र. के कृषि मंत्री श्री सचिन यादव ने पीएम किसान योजना को छलावा बताया है। श्री यादव ने कहा कि भाजपा सरकार ने हाल में 2 हेक्टेयर तक के लघु सीमांत किसानों को 6 हजार रुपये प्रति वर्ष देने की घोषणा की है, जिसका किसी भी राज्य में डेटावेस तैयार नहीं है। बीते 5 सालों में मोदी सरकार ने डीजल, उर्वरक, कीटनाशकों के भाव बढ़ाने से उत्पादन लागत 4 हजार रुपए प्रति एकड़ तक बढ़ गई है। ऐसे में एक साल में 6 हजार रुपए देना ऊंट के मुंह में जीरा के समान है।

 

 

 

 

 

जानकारी के मुताबिक प्रथम किश्त में लाभ पाने वाले किसानों में उ.प्र., महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु के किसान अधिक संख्या में शामिल हंै। चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले 12.50 करोड़ किसानों में से कृषि मंत्रालय के पास 4.75 करोड़ किसानों का व्यौरा ही आया था इसमें से 3.11 करोड़ किसानों को ही पात्र पाया गया है इसमें से 2.75 करोड़ किसानों को पहली किश्त दी जा चुकी है।


 

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