किसानों को खैरात नहीं हक का पैसा तो दो

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बीज उत्पादक किसान परेशान

 

(अतुल सक्सेना)

भोपाल। फसल ऋण माफी योजना का कुछ पैसा बांटकर मुख्यमंत्री प्रदेश में नई कृषि क्रांति लाना चाहते हैं परन्तु दूसरी तरफ अन्य कृषक हित की योजनाएं बजट के अभाव में ठप्प पड़ी हैं। उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। किसान खैरात नहीं अपने हक का पैसा लेने के लिए दर-दर भटक रहे हैं परन्तु लचर क्रियान्वयन व्यवस्था के कारण स्थिति जस की तस बनी हुई है। सरकार अपने दो महीने के कार्यकाल का गुणगान कर रही है और प्रशासन का पूरा अमला केवल जय किसान ऋण माफी में लगा है। ऐसा लगता है कि केवल ऋण माफी करने से ही सरकार पांच साल चल जाएगी और शेष कुछ करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।

 

  • केवल छिंदवाड़ा में बंटा बोनस, शेष प्रदेश को इंतजार
  • कृषक समृद्धि योजना में बजट का अभाव, करोड़ों बकाया
  • सरकार जुटी है कर्ज माफी में

फसल का सबसे महत्वपूर्ण घटक बीज होता है इसके बिना खेती की परिकल्पना भी नहीं की जा सकती परन्तु पिछले वर्ष के बीज उत्पादक किसानों को अब तक गेहूं बीज का 265 रु. प्रति क्विंटल अतिरिक्त बोनस नहीं मिला है जो प्रदेश में चलाई जा रही कृषि समृद्धि योजना के तहत दिया जाता है। 

किसानों को गेहूं बीज के बोनस का इंतजार

गत वर्ष बीज क्रय करने वाले कृषकों को बीज अनुदान तो दिया गया परन्तु बीज उत्पादक कृषकों को अब तक बोनस का भुगतान नहीं किया गया है। सूत्रों के मुताबिक कृषक समृद्धि योजना सहित अन्य कृषक योजनाओं का क्रियान्वयन राज्य में मंद गति से चल रहा है जिसके कारण आगे की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

वर्तमान रबी सीजन में जो गेहूं खेतों में लहलहा रहा है वह उसी बीज के कारण है जिसका भुगतान अब तक बीज उत्पादक किसानों को नहीं हुआ है। कृषि विभाग का वही पुराना राग, करते हैं, हो जाएगा जैसे जुमले सुनकर बीज उत्पादक किसान परेशान हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक प्रदेश में लगभग 2000 बीज उत्पादक समितियां कार्य कर रही हैं जो कुल बीज आवंटन का लगभग 65 फीसदी बीज बनाती है। बाकी बीज निजी संस्थाएं एवं बीज निगम उपलब्ध कराता है। यदि बीज समितियां काम नहीं करती तो बीज की आपूर्ति करना विभाग को मुश्किल हो जाता है। ऐसे किसानों को लगभग 12 करोड़ रुपए का वितरण कृषि समृद्धि योजना के तहत किया जाना है परन्तु साल भर बीतने के बावजूद बोनस का वितरण नहीं किया गया है। 

बजट नहीं, का रोना रोया जा रहा है जबकि आश्चर्यजनक रूप से छिंदवाड़ा जिले के किसानों को इस योजना के तहत पूरा बोनस वितरण किए जाने की खबर है। अब प्रश्न यह उठता है कि मुख्यमंत्री का गृह जिला होने के कारण इसे प्राथमिकता दी गई है या फिर केवल छिंदवाड़ा जिले के अलावा शेष 50 जिलों के कृषकों ने बीज उत्पादन कार्यक्रम लिया ही नहीं ?

बहरहाल सूत्रों का कहना है कि लगभग 3 करोड़ का बजट कृषि समृद्धि योजना में शेष है जबकि 20 करोड़ की मांग की गई है। सुस्त पड़ी बीज प्रमाणीकरण संस्था भी बजट के अभाव में निष्क्रिय है। किसानों को सिर्फ कोरा आश्वासन ही मिल रहा है। इधर जायद का सीजन शुरू हो रहा है, फिर खरीफ प्रारंभ हो जाएगा। प्रमाणित बीज आपूर्ति की व्यवस्था का क्या होगा ?

केवल फसल ऋण माफी योजना ही नहीं अन्य कृषक हितैषी योजनाओं पर भी सरकार को ध्यान देना होगा। अन्यथा किसानों की मुश्किलें बढऩे के साथ-साथ सरकार की भी परेशानी बढ़ जाएगी और खेती पर भी असर पड़ेगा।   

        

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