इस जायद में धान न लगायें किसान

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इस जायद में धान न लगायें किसान

कम पानी वाली फसलें बोयें

(निमिष गंगराड़े)

नई दिल्ली। देश में लगभग 14 करोड़ हेक्टेयर में से लगभग 6.5 करोड़ हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा उपलब्ध है अर्थात् 45 फीसदी क्षेत्र में ही सिंचाई हो पाती है शेष 55 फीसदी भूमि वर्षा आधारित खेती पर निर्भर है। इसे देखते हुए केन्द्र सरकार ने पानी की बचत के मद्देनजर इस वर्ष जायद में होने वाली धान का लक्ष्य निर्धारित नहीं किया है। जबकि गत वर्ष 20.61 लाख हेक्टेयर में धान फसल ली गई थी। इस चालू वर्ष में 49 लाख हेक्टेयर में कुल जायद फसलें लेने का लक्ष्य रखा गया है जबकि इसमें धान शामिल नहीं है। गत वर्ष 2017-18 में धान सहित कुल जायद फसलें लगभग 45 लाख हेक्टेयर में ली गई थीं।

गत दिनों केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री पुरषोत्तम रूपाला ने जायद सम्मेलन में कहा कि देश में बुवाई किए जाने वाले शुद्ध क्षेत्र, लगभग 14 करोड़ हेक्टेयर में से लगभग 6.5 करोड़ हेक्टेयर 45 प्रतिशत वर्तमान समय में सिंचाई के अंतर्गत आता है। असिंचित क्षेत्रों में वर्षा पर अत्यधिक निर्भरता, खेती को एक उच्च जोखिम वाला और कम उत्पादक वाला पेशा बनाती है। भारत सरकार, जल संरक्षण और इसके प्रबंधन को उच्च प्राथमिकता देने के लिए प्रतिबद्ध है। इस प्रभाव के लिए, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) को प्रतिपादित किया गया है जिसका उद्देश्य सिंचाई की पहुंच को बढ़ाने के लिए हर खेत को पानी और पानी के उपयोग की दक्षता में सुधार लाने के लिए 'मोर क्रॉप, मोर ड्रॉप को एन्ड टू एन्ड समाधानों के साथ एक केंद्रित तरीके से स्रोत निर्माण, वितरण, प्रबंधन, क्षेत्र अनुप्रयोग और विस्तार गतिविधियाँ के लिए किया गया है।

श्री रूपाला ने कहा कि 2017-18 की प्रमुख फसलों के उत्पादन के चौथे अग्रिम अनुमान के अनुसार, देश में खाद्यान्न का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। सरकार द्वारा अपनायी गई विभिन्न नीतिगत पहलों के परिणामस्वरूप, देश में 2017-18 में खाद्यान्न का कुल उत्पादन 284.83 मिलियन टन का अनुमानित उत्पादन हुआ है, जो कि 2016-17 के दौरान 275.11 मिलियन टन खाद्यान्न के पिछले रिकॉर्ड उत्पादन की तुलना में 9.72 मिलियन टन अधिक है। 

सम्मेलन में केन्द्रीय कृषि सचिव, श्री संजय अग्रवाल ने राज्यों से जायद/ग्रीष्म ऋतु एरिया कवरेज के लिए कार्य योजना प्रस्तुत करने का आग्रह किया और कहा कि ग्रीष्मकाल में चावल उत्पादन को हतोत्साहित किया जाना चाहिए और कम पानी की मांग वाले फसलों जैसे दालों, तिलहन और बाजरा को जायद/ ग्रीष्म ऋतु के दौरान बढ़ावा देना चाहिए। क्योंकि गर्मी के मौसम में पानी की कमी होती है। उन्होंने उनसे आग्रह किया कि वे मौजूदा योजनाओं, जैसे टारगेटिंग राइस फैलो एरिया (टीआरएफए), एनएफएसएम के तहत अतिरिक्त क्षेत्र कवरेज कार्यक्रम, एनएफएसएम के तहत गन्ना और पाम ऑयल में अंतर-वर्ती फसल के उत्पादन और फसल विविधीकरण कार्यक्रम के माध्यम से लाभ उठाएं।

इसके पूर्व सम्मेलन में कृषि आयुक्त भारत सरकार डॉ. एस.के. मलहोत्रा ने जायद फसलों के सम्बन्ध में प्रस्तुतिकरण किया। प्रस्तुतिकरण में उन्होंने पानी की उचित उपयोगिता के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने जल प्रबंधन, पशुओं के लिए नीति, जैविक खेती एवं फसलों के समर्थन मूल्य पर नीति बनाने पर प्रस्तुति दी।

सम्मेलन में राज्यों के कृषि अधिकारी, आईसीएआर के अधिकारी एवं वैज्ञानिक उपस्थित थे।

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