अपनी बात

भीषण ठंड से पान की खेती तबाह

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(चितरंजन चौरसिया) महाराजपुर। उत्तर भारत में हो रही लगातार बर्फबारी के कारण पड़ रही भ..

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सूरजमुखी

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भूमि : इसकी खेती हल्की से भारी भूमि में आसानी से की जा सकती है परंतु मध्यम भूमि सर्वोत्तम होती है अच्छे जल निकास वाली भूमि होना चाहिए। खेत की तैयारी : रबी की फसल काटने के बाद एक मिट्टी पलटने वाले..

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अधिक लाभ के लिए भिण्डी लगायें

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भिण्डी उगाकर पाएं अधिक लाभ : भिण्डी सब्जी फसल 75 से 80 दिन में तैयार होकर की पैदावार दे देती है। भिण्डी की सब्जी पौष्टिक, लौह तत्व से परिपूर्ण, कब्ज विनाशक एवं विटामिन युक्त होती है। घरेलू खपत के अलावा कुल सब्जियों के..

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मेहंदी की खेती

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उत्पादक क्षेत्र - मेहंदी पूरे भारत वर्ष में पायी जाती है। राजस्थान में पाली जिले का सोजत व मारवाड़ जंक्शन क्षेत्र वर्षो से मेहंदी के व्यवसायिक उत्पादन का मुख्य केन्द्र है। यहां करीब 40 हजार हेक्टर भूमि पर मेहंदी ..

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सौंफ के रोग एवं रोकथाम

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छाछिया (पाउडरी मिल्ड्यू): यह रोग 'इरीसाईफी पोलीगोनी' नामक कवक से होता है। इस रोग में पत्तियों, टहनियों पर सफेद चूर्ण दिखाई देता है जो बाद में पूर्ण पौधे पर फैल जाता है। अधिक प्रकोप से उत्पादन एवं गुणवता कमजोर ह..

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जायद में लगाएं मूंगफली

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भूमि का चयन एवं तैयारी  मूंगफली की खेती के लिये दोमट, बलुआर दोमट या हल्की दोमट मिट्टी उपयुक्त रहती है। गर्मियों में मूंगफली, आलू, मटर, सब्जी मटर तथा राई की कटाई के बाद खाली खेतों में सफलतापूर्वक की ..

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कीट-रोग से करें सरसों की सुरक्षा

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कीट नियंत्रण इस समय सरसों में चित्रित कीट व माहू कीट का प्रकोप होने का डर ज्यादा रहता है। इस में शुरू में फसलों के छोटे पौधों पर आरामक्खी की गिडारें (काली गिडार व बालदार गिडार) नुकसान पंहुचाती हैं। ..

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फलदार पौध से दोगुनी होगी कृषकों की आमदनी

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रायसेन। नीति आयोग भारत सरकार द्वारा चयनित आकंाक्षी जिला विदिशा में सहायक संचालक उद्यानिकी व कृषि विज्ञान केंद्र, रायसेन द्वारा विकासखण्ड- विदिशा, ग्यारसपुर, गंज बासौदा, कुरवाई, नटेरन, लटेरी के 25 ग्रामों में फलद..

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पाले से फसलों को बचाने की नई तकनीक

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इंदौर। गत दिनों  प्रदेश के कई जिलों में अत्यधिक ठंड पडऩे के कारण पाला पड़ गया था जिससे चना, मटर और आलू की फसल को बहुत नुकसान हुआ। इस बीच छतरपुर जिले में पाले से उच्च किस्म की महंगी फसलों को बचाने की एक नई तकनीक ने ध..

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घृतकुमारी बढ़ाए आर्थिक लाभ

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मृदा एवं जलवायु: प्राकृतिक रूप से इसके पौधे को अनउपजाऊ भूमि में उगते देखा गया है। इसे किसी भी भूमि में उगाया जा सकता है। परन्तु बलुई दोमट मिट्टी में इसका अधिक उत्पादन होता है।  उन्नतशील प्रजाति..

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