मिर्च ने बनाया मिलेनियर किसान

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इंदौर। पिछले खरीफ सीजन में पूरे निमाड़ क्षेत्र में जब मिर्च फसल वाइरस से प्रकोपित थी। अंचल के मिर्च उत्पादक किसान परेशान थे, ऐसे में कसरावद तहसील के मिलेनियर प्रगतिशील किसान श्री शंकरलाल पाटीदार ने अपने अनुभव के निचोड़ से न केवल भरपूर उत्पादन लिया, वरन् अच्छे दामों पर उसका विक्रय भी किया। पिछले सीजन में उन्होंने मिर्च से लगभग 1.20 करोड़ रुपए की आय प्राप्त की है। वाणिज्य संकाय में स्नातकोत्तर श्री शंकरलाल पाटीदार ने अध्यापन को छोड़ कृषि को व्यवसाय के रूप में अपनाया है। कृषक जगत से रूबरू वे कहते हैं- कृषि को अपनाकर मैंने जो पाया, शायद सरकारी नौकरी में नहीं मिलता। श्री पाटीदार ने पिछले सीजन में 35 एकड़ में मिर्च फसल लगाई थी। वे बताते हैं, जहां अंचल में कई किसानों की फसल पर वाइरस का प्रकोप हुआ, वहीं मेरे खेतों में इसका न्यूनतम असर रहा। मैंने राशि कम्पनी की जलवा मिर्च लगाई थी। इसमें लगभग 7 हजार क्विंटल उत्पादन मिला है।
बेड से हो शुरुआत
श्री पाटीदार कहते हैं, अच्छे उत्पादन के लिए फसल पोषण पर विशेष ध्यान दें। बेड बनाते समय अग्रिम बेसल डोज दें। मृदा में डीएपी, पोटाश, सल्फर, जिंक आदि तत्वों की उपलब्धता से रोपाई के बाद पौधे शीघ्रता से वृद्धि करते हैं, मजबूत और स्वस्थ रहते हैं।
रोपणी और बिजाई
श्री पाटीदार नेट का टेंट तैयार कर रोपणी बनाते हैं। कोकोपिट और मिट्टी दोनों तरह की बुआई कर रोपे तैयार करते हैं। वे बताते हैं, इस बार लगभग 1500 पैकेट बीज कोकोपिट में डाला है। 1.50 लाख पौधे तैयार करने जा रहा हूं। रोपणी में पर्याप्त नमी का ध्यान रखा जाता है। बुवाई पश्चात इन पर गीले टाट के बोरे डालते हैं। इनसे नमी और पर्याप्त आद्र्रता के साथ तापमान नियंत्रित रहता है। 20 से 22 दिन में ये रोपे तैयार हो जाते हैं। साधारणत: इन्हें 30-35 दिन की अवस्था में खेत में रोपा जाता है।
मल्चिंग से मिला
लाभ
श्री पाटीदार बताते हैं, पिछले सीजन में लगभग 3 एकड़ रकबे में मल्चिंग विधि के साथ मिर्च लगाई थी। इससे काफी लाभ मिला। जैसे-जैसे मौसम में ठंडक घुली, आद्र्रता बढ़ी, उत्पादन में बढ़ोतरी होने लगी। सामान्य की तुलना में अधिक उत्पादन मिला। मल्चिंग से उत्पादित फलों का आकार तुलनात्मक रूप से बड़, रंग चमकीला हरा था। इससे लगभग 2 रु. प्रति किलो की दर से अधिक कीमत मिली। मैंने लगभग 1.20 करोड़ रुपए की मिर्च का विक्रय किया है।
मिलती है सब्सिडी
श्री पाटीदार बताते हैं, उद्यानिकी विभाग की ओर से मिर्च पर 10 हजार रु. प्रति हेक्टेयर के मान से सब्सिडी प्रदान की जाती है। हालांकि, विभाग के पास लक्ष्य अत्यंत सीमित होता है। अधिकांश किसान योजना से वंचित रह जाते हैं। विभाग की ओर से बीज-दवाएं प्रदान की जाती हैं, जो विभाग द्वारा अनुशंसित कम्पनियों से खरीदना होता है।
जल संरक्षण पर ध्यान
श्री पाटीदार पानी के उपयोग और संरक्षण का पूरा ध्यान रखते हैं। नर्मदा से लगभग 6 हजार फीट पाइप लाइन डालकर सिंचाई व्यवस्था की है। वर्ष 2007 से ही पूरे खेत में ड्रिप सिंचाई की व्यवस्था है।
वे जल संवर्धन के क्षेत्र में सक्रिय हैं, राजीव गांधी मिशन में सचिव पद पर कार्य कर किसानों को जागरूक किया है।

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