कृषि व किसान की प्रगति धरातलीय समर्पण से सम्भव है

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कृषि व किसान की प्रगति धरातलीय समर्पणयुग-युग से हम रहे उपासक गैंती और कुदाली के।
हल की नोक लिए लिखते हम गीत यहां खुशहाली के।।

कार्य करने का जुनून व अभिरूचि जब किसी व्यक्ति की विशेषता बन जाती है तो फिर हौंसले खुद-ब-खुद गगनचुम्बी इरादों को सफल करने में लग जाते हैं। आज हम आपको एक ऐसे कृषि स्नातक, कृषि एवं पर्यावरण लेखक और अपने क्षेत्र में कृषि सलाहकार के रूप में पहचाने जाने वाले व्यक्ति से रूबरू करवा रहे हंै जिन्होंने अपने दम पर किसानों को प्रेरित करने का बीड़ा उठाया है। निरंतर प्रयासों से सकारात्मक परिणाम सामने आते देखकर वहां के कृषि विभाग व कृषि विज्ञान केन्द्र सहित कृषि के कई संस्थानों में कार्यरत विशेषज्ञों ने इनकी कार्यप्रणाली, किसान हितैषी गुणों व परोपकारी भावना की सराहना की है। आपको मिला रहे हैं राजस्थान के जालौर जिले की सांचौर तहसील के छोटे से गांव पमाना के रहने वाले अरविन्द सुथार से। जो अपनी कहानी खुद बता रहे हैं-

मेरे उद्देश्य : मैंने मेरे गांव के आसपास के किसानों को कृषि तकनीकी से जोडऩे, सरकारी योजनाओं से लाभान्वित करने, राज्य कृषि विभाग में निचले स्तर तक कर्मचारियों की कमी होने के कारण, विभागीय कार्यों में सहयोग करने तथा सांचौर का क्षेत्र जालोर कृषि विज्ञान केन्द्र से 150 किलोमीटर की दूरी पर होने के कारण किसानों व केवीके की आपसी पहुंच को सुलभ करने और खासकर किसानों की आय को बढ़ाने के लिए पिछले वर्षों से प्रयासरत हूं। इसमें मुझे जो मेहनत और व्यय होता रहता है वह एक निजी शिक्षण संस्थान में कार्य करके में उसे बखूबी पूर्ण करके व तकनीकी हस्तानान्तरण में सहयोग करने का स्वच्छ बीड़ा उठाकर मेहनत कर रहा हूं। इसके लिए मुझे केवीके, कृषि विभाग के सभी कर्मचारी व अधिकारी सहर्ष तकनीकी जानकारी के लिए सहयोग देकर नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। चाहता हूं कि इसके लिए और भी सराहनीय कार्य करके इस क्षेत्र के किसानों व यहां की कृषि को नये आयाम दिलाने में सफल हो पाऊं। इसके लिए मेरे क्षेत्र के लगभग 1000 से अधिक किसानों के खेत तक पहुंचकर प्रतिदिन सतत प्रयास करता रहता हूं। 

कार्य व दिनचर्या : प्रतिदिन विद्यालय जाने के बाद जब लौटता हूं तो मुझे कम से कम 5 किसानों के खेत पर विजिट करना ही होता है, यह मेरा प्रतिदिन का उद्देश्य रहता है। घर परिवार व शिक्षा के साथ-साथ मैं मेरा यह कठिन कार्य भी सफलता के साथ पूरा कर रहा हूं। 
क्षेत्र के किसानों में जो मैंने परिवर्तन देखा है यह मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान साबित हुआ है। मेरे कृषि व किसान सेवा से सम्बंधित कुछ लेख भी प्रकाशित हो चुके हैं। इसके लिए मैं कृषि के सभी सहयोगी पत्रकार व मीडिया कर्मियों को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने हमारे किसानों को प्रकाश में लाकर उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से नई ऊर्जा दी है। इस कार्य को मैंने सरलता प्रदान करने हेतु डिजिटल खेती पमाना (कृषि व बागवानी), डिजिटल मधुरस जालौर (मधुमक्खी पालन) डिजिटल बकरीपालन पमाना (बकरीपालन) नाम से कई किसान समूह बना रखे हैं, इस प्रकार के ग्रुप्स में अलग अलग श्रेणी के 1000 से अधिक किसानों सहित आसपास के कृषि विज्ञान केन्द्रों के कृषि वैज्ञानिक, जिला कृषि उपनिदेशक, सहायक कृषि निदेशक सहित काफी विभागीय कृषि अधिकारी व कर्मचारी, कृषि विश्वविद्यालय के कार्मिक व काजरी संस्थान से कुछ विशेषज्ञ, व्यवसायी, नर्सरी ऑनर्स सहित कृषि से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष जुड़ाव रखने वाले लोग जुड़े हुए हैं। और खुशी की बात यह है कि जुड़े हुए सभी किसान इस वॉट्सअप मीडिया सेवा का उपयोग करके सीधे लाभान्वित हो रहे हैं। इस दौरान मैंने महिलाओं में पोषण सम्बंधित समस्याओं के लिए यहां पर कृषि विभाग के सहयोग से किचन गार्डनिंग का ट्रेन्ड चला रखा है, प्रत्येक कृषक महिला अपने घर पर अपने परिवार के लिए सब्जियां उगाकर परिवार को सम्बल प्रदान कर रही है । इस हेतु मुझे हाल ही में गुजरात के राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत के हाथों कृषि सेवा पुरस्कार-2019 प्राप्त हुआ है। 

- अरविन्द सुथार,
(डिजिटल खेती पमाना किसान समूह)
मो.: 8769941299

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