किसानों की आय बढ़ाने में दलहनी फसलों की महत्वपूर्ण भूमिका

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झांसी। देश में वर्ष 2017-18 में रिकार्ड दलहन उत्पादन हुआ। विदेशी मुद्रा की बचत हुई है चालू वर्ष में जलाशयों में जल स्तर अच्छी स्थिति में होने से रबी में अच्छे उत्पादन की आशा है। धान पड़त क्षेत्र और धान मेंड़ पर अरहर की बुवाई से दलहन का रकबा बढ़ाया जा सकता है। दलहनी फसलों के विपुल उत्पादन से किसानों की आय में वृद्धि होगी। इन्ही साकारत्मक बिंदुओं पर केंद्रित रही दलहन विकास निदेशालय द्वारा झांसी में 25 अक्टूबर को आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला। इसकी विशेष रिपोर्ट डॉ. ए.के. तिवारी निदेशक, दलहन विकास निदेशालय ने  कृषक जगत के पाठकों के लिए प्रस्तुत की है।

कार्यशाला का शुभारंभ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा किया गया। कृषि मंत्री द्वारा राजभाषा में दलहन विकास निदेशालय, द्वारा संकलित पुस्तक ''भारत में दलहन : पुनरावलोकन एवं संभावनाएं का विमोचन किया गया। कार्यशाला में देश के प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों यथा उ.प्र., म.प्र., राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्रप्रदेश, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, तमिलनाडु, बिहार, छत्तीसगढ़, कर्नाटका, झारखंड, उड़ीसा ने भागीदारी की। कार्यशाला में कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग, फसल अनुभाग के फसल विकास निदेशालयों इक्रीसेट, इकार्डा भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान के निदेशक, भा.कृ.अनु.प., अटारी सीड एजेंसियों आदि के प्रतिनिधियों, म.प्र. एवं उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड संभाग के सभी 14 जिलों के कृषि विभाग के प्रतिनिधियों एवं कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिक उपस्थित रहें। साथ ही निजी क्षेत्र की कृषि कंपनियों के प्रतिनिधियों समेत 300 प्रतिभागियों ने भाग लिया। 
केंद्रीय कृषि मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने उद्घाटन समारोह मेें कहा कि अब किसानों की आय को दोगुना करने हेतु विभिन्न कदम उठाये जा रहे है। इसके लिये कम समय तैयार होने वाली फसल, कम बजट/जीरो बजट खेती अपनाने की आवश्यकता है। बुंदेलखंड के सभी 14 जिलें म.प्र. और उ.प्र. के दलहन क्षेत्र के लिए अनुकूल है तथा इनका देश/प्रदेश में दलहन उत्पादन में प्रमुख योगदान है। जबकि यह वर्षा आधारित क्षेत्र है। आम किसानों की पंहुच कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों, राज्य जिला कृषि विभागों तक आवश्यक है ताकि दलहन, तिलहन उन्नत उत्पादन तकनीक का उपयोग कर किसान निहित क्षमता का उपयोग करते हुए दलहन/तिलहन उत्पादन बढ़ा सकें एवं बुंदेलखंड देश एवं विश्व में अपनी पहचान बना सके।

डॉ. महापात्रा
भा. कृ. अनु. परिषद के महा निदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्रा ने बताया कि फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए अच्छे बीजों की सुगम उपलब्धता हेतु देश में दलहन के 150 सीड हब स्थापित किए गए हैं।
कार्यशाला में डॉ. पंजाब सिंह, पूर्व कुलपति, रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी डॉ. एस.के. राव, कुलपति, राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर, डॉ. वी.एस. तोमर, पूर्व कुलपति जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर एवं राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर, प्रो.जे.वी. वैशम्पायन, कुलपति, बुंदेलखण्ड विश्वविद्यालय, डॉ. (श्रीमती) ओम गुप्ता, निदेशक, कृषि विस्तार सेवायें, जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर आदि ने दलहन उत्पादन एवं उत्पादकता द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने हेतु विचार रखें।
प्रथम सत्र में डॉ. ए. के. तिवारी, निदेशक, दलहन विकास निदेशालय, भारत सरकार, भोपाल द्वारा राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय दलहन परिदृष्य, वर्तमान दलहन विकास कार्यक्रमों का क्रियान्वयन एवं भविष्य की रूपरेखा पर चर्चा की गयी। डॉ. तिवारी ने बताया कि वर्ष 2017-18 में देश में रिकार्ड दलहन उत्पादन 25.42 मिलियन टन रहा जिससे देश में 03 मिलियन टन दलहन आयात कम हुआ तथा विदेशी मुद्रा रू.9774.61 करोड़ की बचत की जा सकी। वर्तमान वर्ष में रबी मौसम में अच्छे उत्पादन की संभावना व्यक्त की है क्योंकि प्रमुख जलाशयों में जल स्तर अच्छी स्थिति में है।

डॉ. एन. पी. सिंह
डॉ. एन. पी. सिंह, निदेशक, भा.द.अनु.सं., कानपुर द्वारा दलहन की उच्च उत्पादन वाली किस्मों और सीड हब व अतिरिक्त प्रजनक बीज उत्पादन कार्यक्रम की प्रगति पर चर्चा की। उन्होनें उत्तर भारत के राज्यों में गेहूूँ की जगह मटर/चना को बढ़ावा देने की बात कही क्योंकि इन क्षेत्रों में गेहूँ की उपज कम है। डॉ. ए. आर. शर्मा, निदेशक अनुसंधान सेवायें, रानी लक्ष्मीबाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी द्वारा आभार व्यक्त किया गया।

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