गुलाब की बडिंग

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  • सर्वप्रथम मूलवृंत तैयार करते हैं। जंगली गुलाब की कटिंग करके उसे उगाया जाता है। इस तैयार पौधे को मूलवृंत कहते हैं, क्योंकि इसी पर बड लगाई जाती हैं।
  • बडिंग के लिए हम अपने पसंद के गुलाब में से बड निकालते हैं, बड ऐसी शाखा में से निकाली जाती है जिसमें फूल खिल चुका हो तथा फूल के नीचे वाली पत्तियों के साथ बड स्वस्थ हो और उभरने के लिए तैयार हो।
  • इस बड को तेज धार वाले चाकू से काष्ठ सहित छाल जिसमें पत्ता भी शामिल है। इसे शील्ड के आकार में काट लेते हैं। यह सामान्यत: आधा इंच से तीन चौथाई इंच लंबा होता है।
  • अब चाकू से काटी शील्ड के आकार बड से उसकी छाल को काष्ठ से धीरे-धीरे हटाकर अलग कर देते हैं यह बड लगाने के लिए तैयार है।
  • अब तैयार मूलवृंत में टी के आकार का या शील्ड के आकार का चीरा लगाते हैं। इस छाल को अलग कर देते हैं। 
  • अब बड को टी के आकार या शील्ड के आकार के मूलवृंत बड पर लगाते हैं ताकि वे उसमें अच्छी तरह बैठ जाए। (चित्र-5)
  • अब जहां बड जोड़ी ह ै(बैठाई है) उस पर ऊपर नीचे प्लास्टिक इस प्रकार लपेटें कि बड का भाग दिखें और कटा भाग अच्छी तरह बंध जाए और ढक जाए।
  • 6 से 8 सप्ताह बाद या 21 दिन बाद बड लगती है और उसमें पत्तियां निकलने लगती हैं।

इस प्रकार विभिन्न अंगों और वर्ग के फूल प्राप्त कर सकते हैं।
 

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