शिवांश खाद एक शक्तिशाली उर्वरक

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शिवांश खाद ऐसी खाद है जिसे वो अपने खेतों के लिए कम से कम खर्चे में सिर्फ 18 दिनों में तैयार कर सकते है। इससे कई लाभ हैं जैसे - मृदा उपजाऊ बनती है, उपज में कई प्रतिशत तक की वृद्धि होती है, फसलों में पानी कम लगता है, फसलों में बीमारियों से लडऩे की क्षमता बढ़ती है एवं इसके साथ साथ खेत में यूरिया, डीएपी, एमओपी देने की आवश्यकता नहीं पड़ती है । इस खाद के पहली बार उपयोग करने के बाद से ही मृदा की स्थिति सुधरने लगती है जिससे किसानों की रसायनिक खादों पर निर्भरता कम होती है और पैसों की बचत में वृद्धि होती है।      

शिवांश खाद एक प्रकार की कम्पोस्ट है जो जैविक पदार्थों के अपघटन एवं पुन: चक्रण से बहुत ही कम समय मेंं बनकर तैयार हो जाती है। इसके विघटन में कुछ सप्ताह लगते हैं, और उसके बाद वह ह्यूमस में बदल जाता है। कम्पोस्ट बनाने की विधि कई चरणों में पलटने के बाद पूर्ण होती है।      

ये रसायनिक खाद की तुलना में बराबर या अधिक उत्पादन देती है अर्थात् ये जैविक खाद मृदा की उर्वरता एवं कृषकों की उत्पादकता बढ़ाने में पूर्णत: सहायक है। इसका उपयोग खेती में करने से उत्पादन की लागत कम होती है। जिसके फलस्वरूप सामान्य उत्पादन की अपेक्षा में कृषक भाई अधिक उत्पादन और लाभ प्राप्त कर सकते हैं। शिवांश खाद कचरे को निष्पादित कर अच्छी गुणवत्ता युक्त खाद में बदलने का महत्वपूर्ण तथा लाभदायक साधन है।

आधुनिक समय में पर्यावरण प्रदूषण एवं महंगाई निरंतर बढ़ती जा रही है ऐसे में, भूमि की उर्वराशक्ति का संरक्षण, मानव स्वास्थ्य एवं बचत के लिए जैविक खाद की राह अत्यंत लाभदायक है।  देश में ज्यादातर लोग किसान हैं, कुछ किसान अपने और अपने परिवार के लिए पर्याप्त आमदनी नहीं कमा पाते हैं, इसके बावजूद वो अपने खेती के लिए अच्छा से अच्छा खाद इत्यादि का इंतजाम करते हैं। 

शिवांश खाद बनाने का तरीका

शिवांश खाद बनाने के लिए मुख्यत: 3 तरह की सामग्री का उपयोग किया जाता है सूखी घास, हरी घास, गोबर और अगर उपलब्ध हो सके तो काई। खाद को बनाने का स्थान चयन करते समय ध्यान रखे की जगह खुली एवं छायादार हो और थोड़ी ऊंचाई में हो जिससे ढेर के आस-पास पानी एकत्र न हो सके। इसे पूर्ण रूप से बनने में 18 दिन लगता है। अच्छी खाद बनाने के लिए इसे बार बार पलटना होता है, पहली पलटाई 4 दिन में होती है इसके बाद हर दूसरे दिन में होती है।

शिवांश खाद बनाने के लिए निम्न सामग्री का उपयोग  

सूखी सामग्री : भूसा ,सूखी घास, सूखा खरपतवार, लकड़ी के छोटे टुकड़े, सूखी पत्तियां या पौधों का कोई भी सूखा हिस्सा इस्तेमाल किया जा सकता है ।  

हरी सामग्री : इसमे उपयोग होने वाली हरी सामग्री ताजी होनी चाहिए, इसे खाद बनाने वाले दिन ही एकत्र करें। इसमे हरी पत्तियां, हरे खरपतवार जिसे खेत की सफाई के समय अलग किया जाता है, उपयोग किए जाते है लेकिन ध्यान रहे नीम या यूकेलिप्टिस का उपयोग न करें क्योंकि इससे खाद में रहने वाले सूक्ष्म जीवों को नुकसान हो सकता है। 

अब एकत्रित हरी व सूखी सामग्री को छोटे छोटे टुकड़ों में तोड़ लें (लगभग 2-2 इंच )। 

गोबर : ये नत्रजन का प्रमुख स्रोत है, गोबर जितना ज्यादा ताजा होगा उतना अच्छा होगा इसमे सभी जानवरों का गोबर उपयोग में ले सकते है ,जैसे-गाय, भंैस, बकरी, घोड़ा आदि। 

काई का उपयोग गोबर के साथ मिलाकर करें 

इसके अतिरिक्त इसके लिए गुड़ (पानी मे घोल बना कर छिड़काव के समय उपयोग करने के लिए)  या गन्ने का रस (4-5 गन्ने को छोटे छोटे टुकड़ो में काट कर 20 ली. पानी मे 24 घंटे के लिए रखें व उपयोग करें), जाली (लोहे, बांस, सीसल), प्लास्टिक शीट। 

विधि: इसका ढेर बनाने के लिए सूखी खाद ,हरी खाद व गोबर को 9:6:3 के अनुपात में ही मिला कर ढेर को भरे, इसे बनाते समय ध्यान रखें ढेर ज्यादा छोटा न हो। कम से कम 4 फुट चौड़ाई और इतनी ही ऊंचाई हो। सामग्री के सही अनुपात के लिए 10 लीटर वाला तसला उपयोग किया जा सकता है।

सर्वप्रथम चयनित जगह को साफ कर, जाली को एक गोल ढांचे जैसा खड़ा कर लें। अब 9 तसला सूखी सामग्री माप कर पहली  पर्त लगाए फिर 1.5 तसला पानी का छिड़काव ढेर पर करें, अगली पर्त के लिए 6 तसला हरी सामग्री सूखी सामग्री के ऊपर डालें  और इसके ऊपर 1 तसला पानी का छिड़काव करें, इसके बाद अगली पर्त के लिए 3 तसला गोबर डालें और आधा तसला पानी छिड़कें। 

इसे बिना जाली के भी बना सकते हैं बस ढेर बनाते समय उसे एक फुट चौड़ा रखें एवं सामग्री डालने के तुरंत बाद उसे किनारों में अच्छे से दबाते रहे इससे ढेर स्थिर रहेगा और गिरेगा नहीं ।

इसके बाद इस प्रक्रिया को तब तक दोहराएं जब तक की ढेर 4 फुट तक पूरा भर न जाए। अब ढेर को ढकने के लिए सबसे उपर सूखी घास की एक पर्त लगायें और उसमे ऊपर से पानी छिड़काव करें, यदि ढेर से हल्का पानी निकल रहा है तो ढेर में पानी की मात्रा सही है। इसके बाद ढेर को चारों तरफ से तिरपाल से ढंक दें। 

अब तीन दिन छोड़ चौथे दिन ढेर को पहली बार पलटें इससे ढेर में उपस्थित सूक्ष्म जीवों को हवा और पानी मिलता है जिससे ज्यादा अच्छी खाद बनती है। पलटते समय ध्यान रखे की अंदर की सामग्री बाहर व बाहर की सामग्री अंदर की तरफ आ जाए, अब इस प्रक्रिया को हर 2 दिन में दोहराएं (जैसे पहली पलटाई अगर 4 तारीख को करते हैं तो अगली पलटाई 6 को करेंगे फिर इसी प्रकार 8, 10, 12, 14, 16 तारीख को और 18 तारीख को ये बन कर तैयार हो जाएगा)। इस दौरान ध्यान रखे की ढेर का तापमान 55-65 डिग्री सेल्सियस (ढेर के अंदर हाथ को न रख सकंे)  एवं नमी उचित (एक मु_ी खाद को दबाने पर सिर्फ 10-15 बूंद पानी ही निकले) मात्रा में हो। 

अगर पलटने के तापमान कम है तो ढेर में गोबर की मात्रा कम है इसके लिए 3 तसला गोबर धीरे-धीरे करके ढेर में मिलायें और 2 दिन बाद इसके तापमान को चेक करें। यदि नमी की मात्रा कम है तो पानी तब तक छिड़कंे जब तक नमी परीक्षण में खाद खरा न उतरे और यदि ढेर ज्यादा गीला है तो ढेर को पलटते  समय उसे कुछ समय के लिए धूप में सुखा दें।  

18 दिन होते-होते ढेर का तापमान एवं नमी कम हो जाना चाहिए इससे पता चलता है की खाद बन कर तैयार है अगर ऐसा नहीं होता है तो ढेर को कुछ दिन तक और पलटें। तैयार खाद का तापमान कम और रंग गहरा हो जाता है, खाद में हल्की नमी होती है और उठाने में हल्की होती है।    

उपयोग:

  • खेत में रोपाई के 3 दिन पहले जुताई के समय डाल सकते हैं।
  • फसल के बुबाई के समय इसे डाल सकते हैं। 
  • खड़ी फसल में भी इसका उपयोग किया जा सकता है। 

संग्रहण

इस खाद को 3 महीने के लिए किसी सूखी छायादार जगह पर संग्रहीत करके रखा जा सकता है। यदि खाद एक 1 माह से ज्यादा की हो गई है तो उपयोग में लाने से पहले इसके ऊपर हल्का पानी का छिड़काव करें एवं दो दिन के बाद उपयोग करें। 1 एकड़ के लिए शिवांश खाद के 8 ढेरों की आवश्यकता होती है,यदि मिट्टी की हालत ज्यादा खराब है तो मिट्टी में इसका उपयोग दुगुना कर दें।
 

  • प्रीती मिश्रा 

 जे.एन.के.वी.वी., जबलपुर 
Juhimishra9421@gmail.com

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