केले की फसल पर कुदरत का कहर

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 अति वर्षा और वायरस से केले की फसल प्रभावित 

(मोहन जोशी 'पीयूष')

इंदौर। बच्चों से लेकर बूढ़ों तक पसंद किया जाने वाला प्रोटीन और विटामिन से भरपूर पौष्टिक फल केले की फसल पर कुदरत का कहर जारी है। बड़वानी जिले में अति वर्षा और डूब क्षेत्र में जल का स्तर बढ़ जाने से नुकसानी और केले के प्रमुख उत्पादक जिले बुरहानपुर के कुछ हिस्सों में केले की फसल पर वायरस लगने से उखाडऩे की खबर है। प्रस्तुत है केले की फसल पर केंद्रित कृषक जगत की विशेष रिपोर्ट।

किसानों के अनुसार बड़वानी जिले और इससे सटे धार जिले के नर्मदा पट्टी के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर केले की खेती होती है। दस माह में तैयार होने वाली केले की फसल की उचित  देखरेख की जाए तो 4 -5 माह तक उत्पादन लिया जा सकता है। लेकिन किसानों की मानें तो इस वर्ष 50 प्रतिशत से अधिक केले की फसल अतिवर्षा और डूब क्षेत्र में जल का स्तर बढ़ जाने से प्रभावित हुई है। हर साल करोड़ों का केला विदेश निर्यात करने वाले इस क्षेत्र में  इस बार केले की एक भी खेप विदेश नहीं भेजी जा सकी है, क्योंकि केला छोटा और दागदार होने से निर्यात होने वाले मापदंडों पर खरा नहीं उतरा है। बता दें कि किसानों को देश के विभिन्न हिस्सों में केला भेजे जाने पर 1300 रु. क्विंटल और विदेश निर्यात होने वाले केले का दाम 1600  रु. क्विंटल तक मिल जाता है। लेकिन इस बार केला निर्यात के हालात नहीं होने से किसानों को करीब 300 रु. क्विंटल का नुकसान हुआ है।
इस बारे में पिपलूद के किसान श्री रमेश ओंकार यादव ने बताया कि उनकी 60 प्रतिशत केले की फसल खराब हुई है। डूब क्षेत्र में जल का स्तर बढ़ जाने से अन्य फसलों पर भी असर पड़ा है, वहीं बगूद के श्री बलराम कुमावत ने बताया इस वर्ष गर्मी में आए आंधी तूफान से उनकी 4 एकड़ में लगाई केले की फसल आड़ी पड़ गई थी। क्षतिग्रस्त फसल को निकालना पड़ा जिससे बहुत नुकसान हुआ। इस साल सरदार सरोवर बांध के कारण डूब क्षेत्र का जल स्तर बढऩे से 5 एकड़ में लगाई मक्का की फसल पूरी डूब गई। 

वहीं बुरहानपुर जिले के चाकबारा के श्री संजय महाजन ने बताया कि अभी तो केले की फसल अच्छी है, लेकिन कुछ गांवों दापोरा, चापोरा, नाचनखेड़ा आदि  में केले की फसल पर वायरस आने से किसानों ने केले की फसल उखाड़ दी है। जबकि विजय केला ग्रुप खकनार के श्री संजय चौधरी ने कहा कि इस साल अधिक ठंड के बाद गर्मी के दिनों में पानी की कमी होने से केले की फसल पर असर पड़ा था। अभी बारिश से जिन खेतों में ज्यादा जल जमाव हुआ है और टिश्यू कल्चर के प्लाट लगाए हैं, वहां वायरस आने की खबर है। इससे प्रभावित किसानों को नुकसान हुआ है। यहां यह उल्लेख प्रासंगिक है कि अभी जुलाई में भी बुरहानपुर जिले में आंधी तूफान से एक दर्जन गांवों के किसानों के केले के पेड़ धराशायी हो गए थे। स्मरण रहे कि बुरहानपुर जिले में गत तीन वर्षों से कुदरत का कहर कभी हवा, आंधी, तूफ़ान तो कभी भीषण ठंड और बारिश के रूप में जारी रहने से केला फसल का नुकसान हो रहा है। गत वर्ष भी इस जिले के 28 गाँवों की ढाई हजार से अधिक केला उत्पादकों की दो हजार से अधिक हेक्टर क्षेत्र की केला फसल बर्बाद हो गई थी, जिसमें 150 -200  करोड़ की फसल का नुकसान हुआ था। 

अभी हाल ही में शाहपुर क्षेत्र में खामनी, भावसा, बम्भाड़ा आदि आधा दर्जन गांव में आंधी-बारिश ने फिर तबाही पहुंचाई, जिससे केले की फसल खेतों में आड़ी पड़ गई। इसके अलावा अन्य फसलों को भी भारी नुकसान हुआ। 

इस वर्ष ज्यादा जल जमाव होने से केला फसल में सीएमवी वायरस का प्रकोप देखे जाने पर केला अनुसंधान केंद्र, जलगांव के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एन. बी.शेख ने बुरहानपुर के उप संचालक उद्यानिकी श्री आर. एन.एस. तोमर के साथ  प्रभावित ग्रामीण क्षेत्र की केला फसल का निरीक्षण किया था। इस बारे में श्री आर.एन.एस. तोमर ने कृषक जगत को बताया कि सीएमवी वायरस के कारण केले के पत्ते जकड़ जाते हैं। समय पर धूप नहीं मिलने से पत्ते सड़ जाते हैं। क्षेत्र के 5-10 प्रतिशत हिस्से में ही सीएमवी वायरस का असर है। किसानों को जल निकासी के साथ उचित मार्गदर्शन दिया गया है। क्षेत्र के किसानों को जागरूक करने के लिए गांवों में प्रचार सामग्री का वितरण भी किया गया है।
 

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