कृषि और बागवानी के लिए बायो कंट्रोल प्रोडक्ट

Share On :

for-agriculture-and-horticulture-bio-control-product

ग्रबक्स :- जमीन में सफेद गिराड़ व अन्य कीड़ों को पूरी तरह प्राकृतिक रूप में नष्ट करने के लिए एक असरदार दानेदार उत्पाद है जो आसानी से जमीन में डाला जा सकता है और लम्बे समय तक काम करता है।

मात्रा:- 10 किलो प्रति एकड़।

लास्ट्रा :- फसलों में रस चूसने वाले कीड़ों जैसे मकड़ी, मिली बग, थ्रिप्स, एफिड, हरा तेला, जैसिड, काला तेला, सफेद मक्खी आदि को असरदार ढंग से नियंत्रित करने के लिए एक ऑर्गेनिक नुस्खा है, यह फसल पर स्प्रे किया जाता है और किसी भी अन्य दवा के साथ मिलाया भी जा सकता है।

मात्रा:- 5 मि.ली. एक लीटर पानी में।

येलो स्टिकी ट्रैप:- यह एक पीले रंग का ट्रैप है जिसके रंग से आकर्षित होकर विभिन्न प्रकार से रस चूसने वाले कीड़े जैसे एफिड़, जैसिड, लीफ माइनर, सफेद मक्खी आदि इसके ऊपर आकर चिपक जाते हैं। जिससे उनको काफी कारगर ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। 

फसल की पैदावार को अत्यधिक क्षति कीड़े-मकोड़े से होती है। इस बात में कोई संदेह नहीं है कि रसायनिक कीटनाशक कीट प्रबन्धन के सफल हथियार हैं, परन्तु इनके अनेकों दुष्परिणाम भी हैं। जीवनाशी के उपयोग से किसानों के मित्र जीव भी नष्ट हो जाते हैं। अधिक जीवनाशी उपयोग करने से जीवनाशी अवशेष फसलों में अधिक दिनों तक बना रहता है जो उपभोक्ता के स्वास्थ्य के लिये हानिकारक होता है। यही कारण है अब वैज्ञानिकों और किसानों का ध्यान समेकित कीट प्रबन्धन की तरफ है जो कि पर्यावरण हितैषी है, इसमें प्रोडक्ट एक महत्वपूर्ण विधि है।

मात्रा:- 20 टै्रप प्रति एकड़।

ब्लू स्टिकी टै्रप:- यह एक नीले रंग का ट्रैप है जिसे थ्रिप्स काला जूं को नियंत्रित करने के लिए खेत में लगाया जाता है।

मात्रा:- 20 टै्रप प्रति एकड़।

नीम बाण:- यह बहुउपयोगी उत्पाद है जिसमें अजाडिरेक्टिन पदार्थ है जो रस चूसने, काटने व चबाने वाले कीटों के नियंत्रण में प्रभावी है यह 300 पीपीएम, 1500 पीपीएम, 10000 पीपीएम व 50000 पीपीएम में उपलब्ध है।

मात्रा:- 0.5 -5 मि.ली. एक लीटर पानी में।

निपरोट:- यह जमीन से होने वाले फफूंद के रोगों को नियंत्रित करने में कारगार है। यह पौधों की जड़ प्रणाली के इर्द गिर्द एक सुरक्षा कवच तैयार करता है और फसलों में होने वाली फ फंूद रोग जैसे झुलसा, जड़ गलन, तना गलन, फुट रॉट, कॉलर रॉट, डम्पिंग ऑफ आदि को नियंत्रित करता है।

मात्रा:- 1-2 किलो प्रति एकड़।

सुमोना:- यह मिट्टी में बीमारी पैदा करने वाले जीवाणु और निमेटोड को नियंत्रित करने के लिए लाभदायक जीवाणु है, यह बैक्टिरियल विल्ट, उकठा को रोकने में कारगर है और यह पौधों को ताकतवर बनाकर उनके विकास में वृद्धि करता है।

मात्रा:- 1-2 किलो प्रति एकड़।

हेली-साइड:- इसमें एनपीवी वायरस है जो विभिन्न फसलों में आने वाली हरी सुंडी को नियंत्रित करता है।

मात्रा:- 1-2 मि.ली. एक लीटर पानी में 100-200 मि.ली. एक एकड़ के लिए।

विभिन्न कीटों के लिए उपलब्ध टै्रप व ल्यूर
क्र. कीट  फसल ल्यूर ट्रैप एक एकड़ में ट्रैप संख्या  ल्यूर की खेत में उम्र ट्रैप का खेत में लगाने का समय
1 हरी सुंडी चना मटर, कपास, अरहर, मिर्च, टमाटर, भिन्डी हैली ल्यूर फेरो-टी 10 60 दिन फसल पर फूल आते समय
2 तम्बाकू सूंडी, पत्ता भेदक इल्ली, चितकबरी सूंडी गोभी, कपास, मूंगफली, चुकंदर स्पोडो ल्यूर 10 60 दिन फसल पर फूल आते समय
3 धान का पीला तना छेदक धान स्किर्पो ल्यूर 10 60 दिन रोपाई के एक सप्ताह के अंदर
4 धब्बेदार सूंडी भिन्डी, कपास इरविट ल्यूर 10 60 दिन फूल आने से एक सप्ताह पहले
5 कांटेदार सूंडी भिन्डी, कपास एैरिन ल्यूर 10 60 दिन फूल आने से एक सप्ताह पहले 
6 फल मक्खी बेल वाली फसलें जैसे लौकी, तोराई, तरबूज, खरबूज करेला आदि बकु ल्यूर फ्लाई-टी 6 60 दिन फूल आने से एक सप्ताह पहले
7 फल मक्खी आम, अमरूद, नीबू आदि बेडोर ल्यूर 6 60 दिन फूल आते समय
8 डीबीएम गोभी का हरा पतंगा गोभी वर्गीय फसलें  डीबीएम ल्यूर वोटा-टी 20 60 दिन रोपाई के एक सप्ताह के अंदर
9 तना छेदक टाप बोरर गन्ना एसटीबी ल्यूर 8 60 दिन बुवाई के दो महीने पर
10 तना छेदक, स्टाक बोरर गन्ना एसएसबी ल्यूर 8 60 दिन बुवाई के दो महीने पर
11 बैंगन का फल व तना छेदक बैंगन ल्यूसिन ल्यूर डेलटा 20 60 दिन रोपाई के एक सप्ताह के अंदर
Share On :

Follow us on

Subscribe Here

For More Articles

Releated Articles