निरंकुश प्रशासन

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मोटर वाहन संशोधन अधिनियम 2019

पिछले दिनों केन्द्र सरकार ने मोटर यान अधिनियम में बदलाव करते हुए कठोर प्रावधान निर्मित किये है। बिना सीट बेल्ट बांधे या बिना हेलमेट पहने अथवा बिना वाहन की फिटनेस, बिना लायसेंस और नाबालिग द्वारा वाहन चलाने पर, वाहन चलाते समय मोबाइल से बात करने पर तथा निर्माता द्वारा प्रदाय की गई गाड़ी के रूप रंग में परिवर्तन करने पर आर्थिक दण्ड की राशि में कई गुना बढ़ोत्री की है। 

क्या इन बदलाव और जुर्माने की राशि बढ़ाने से आपेक्षित सुधार, वाहन चालकों के व्यवहार और आदतों में बदलाव हो जाएगा ? क्या सभी लोग कड़े दंडात्मक आर्थिक प्रावधानों के चलते सुधर जायेंगे? इस प्रकार की आशा रखना जब तक व्यर्थ है जब तक प्रशासनिक और मैदानी व्यवस्था कर्तव्य परायण और ईमानदार नहीं हो जाती। जुर्माने की राशी बढ़ाने से केवल भ्रष्टाचार बढ़ेगा, बड़ी राशी की जुर्माने की रसीदें कटने की बजाए बिना रसीद काटे औने-पौने रूपए देकर चालक अपनी खैर मानायेंगे और पुलिस वाले अपनी जेबें गरम कर अपना और अपने अधिकारियों का भला करेंगे।

यातायात विभाग और संबंधित अधिकारियों की कार्यशैली का राजधानी भोपाल में ही क्या हाल है वह किसी से छुपा नहीं है। राजधानी की सड़कों पर सात हजार से अधिक ऑपे, मेजिक गाडिय़ां बिना लायसेंस-परमिट के सड़कों पर दौड़ रही हैं। तीस साल से भी अधिक पुरानी मिनी बसों के बेहाल होने पर भी उनके फिटनेस परमिट आसानी से जारी किये जा रहे हैं। भवन निर्माण के लिये ईंट ढोने वाले अधिकांश वाहन बिना परमिट, बिना फिटनेस के दौड़ रहे हैं और उनके पास खनिज विभाग का कोई भी प्रमाण पत्र नही होता।

लोहे का सरिया, मलमा ढोने वाले ट्रेक्टर और ट्राली बरसों पुराने हैं न ही इनके पास फिटनेस हैं, न ही वैध रजिस्ट्रेशन है और न ही ये परिवहन विभाग को व्यावसायिक टैक्स देते हैं। यात्री बसों में बहरे कर देने वाले कानफोड़ू हॉर्न लगे हैं, क्षमता से अधिक ठसाठस यात्री भरे रहते हैं। मजाल है कि कोई पुलिस वाला इनके खिलाफ कार्रवाई करे। प्रशासनिक अव्यवस्था का आलम यहां तक है कि यदि खनिज विभाग अवैध रूप से खनिज परिवहन करने वाले वाहनों को पकड़ कर स्थानीय थाने के सुपुर्द करें तो थानेदार उसे तरह-तरह के बहाने बना कर भगा देते हैं। पिछले दिनों ग्रीष्मकाल के समय पूरे शहर की प्यास बुझाने के लिए लगभग चार हजार से अधिक टै्रक्टर-टेंकर लगभग पानी ढो रहे थे लेकिन इनमें से नब्बे प्रतिशत से अधिक पानी के टेंकर परिवहन विभाग में पंजीकृत ही नहीं थे और बिना रजिस्ट्रेशन नंबर के बिना टेक्स चुकाये दौड़ रहे थे।

केन्द्र सरकार द्वारा मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम 2019 के मुख्य प्रावधान 1 सितंबर 2019 से प्रभावशील-

1 अ - सड़क दुर्घटना में पीडि़त व्यक्ति को मुआवजा -
मृत्यु की स्थिति मे पच्चीस हजार से बढ़ाकर दो लाख रूपए

1 ब- गंभीर चोट की स्थिति में पच्चीस हजार से बढ़ाकर दो लाख रूपए

2- वह नेक व्यक्ति जो पीडि़त को दुर्घटना के समय आपातकालीन मेडिकल या नॉन मेडीकल मदद देता है और सहायता के समय पीडि़त व्यक्ति की मौत हो जाती है तो वह नेक व्यक्ति किसी दीवानी या आपराधिक कार्रवाई के लिए उत्तरदायी नहीं होगा। 

शासन ने कृषि कार्य के लिए टे्रक्टर ट्राली पर वार्षिक रूप से लगने वाला परिवहन कर की छूट दी है परंतु इनका परिवहन विभाग में पंजीयन अनिवार्य है। इन ट्रेक्टर ट्रालियों पर (केवल कृषि कार्य) के लिए लिखा जाना आवश्यक है परंतु पूरी राजधानी में ऐसा एक भी ट्राली पर लिखा नहीं मिलेगा और कृषि कार्य के लिए पंजीयन टै्रक्टर ट्रालियां धड़ल्ले से बिना टेक्स चुकाए व्यवसायिक कार्यों में संलग्र हैं।
राजधानी के साथ ही यदि पूरे प्रदेश की बात की जाए तो खनिज, रेत आदि के अवैध परिवहन मेें जुटे अधिकांश टै्रक्टर ट्राली व्यावसायिक रूप से पंजीयत नहीं हैं, इससे शासन को भारी आर्थिक हानि उठानी पड़ रही है। फिर भी प्रशासनिक अमला उदासीन है। 

परिवहन  विभाग में टै्रक्टर ट्राली और वाटर टेंकर निर्माण के लिए कृषि यंत्र उद्यमियों को आवश्यक अनुमति/लायसेंस लेना अनिवार्य है। इन उद्यमियों को अपने द्वारा प्रस्तुत ड्राइंग डिजाइन के अनुरूप ही इनका निर्माण करना होता है तभी इनका पंजीयन और सड़क पर चलने की अनुमति संभव है लेकिन मध्यप्रदेश में परिवहन विभाग से बिना लायसेंस लिये ढेरों निर्माणकर्ता टै्रक्टर ट्राली/वाटर टेंकर बना रहे हैं जो बिना पंजीयन के बिना निर्धारित एवं मान्य स्वरूप के सड़कों पर अबाधति से दौड़ते हुए दुर्घटनाओं को निमंत्रण दे रहे हैं। निर्धारित मानकों के विपरीत मनमाने तरीके से निर्मित हो रही इन ट्रालियों में न तो हैंड ब्रेक लगे हैं, न ही रिफ्लेक्टर और न ही टेल लाइट, और न ही पंजीयन का क्रमांक ही है। टै्रक्टर ट्राली का मनमाना आकार है कोई 85 क्यूबिक फुट की है तो कोई 240 क्यूबिक फुट की है। केवल 3 से 4 टन वजन ढोने के लिए स्वीकृत ट्रालियों में 7-8 टन वजन ढोने की क्षमता निर्मित की जा रही है। परिवहन विभाग में एक सामान्य आकार की टै्रक्टर ट्राली के पंजीयन के लिए जीएसटी, पंजीयन शुल्क और पंजीयन के लिए दलाली चुकाने में औसतन 25000 रू. का खर्च होता है जो बिना पंजीयन और बिना जीएसटी चुकाये निर्माणकर्ता सीधे-सीधे इसकी अनदेखी कर शासन को चूना लगा रहा है।

वर्तमान में मध्यप्रदेश शासन के मंत्री ही जब कानून व्यवस्था लागू करने में अपनी असफलता सार्वजनिक रूप से स्वीकारते हुए पूरी बेशर्मी से पद पर चिपके हुए हों तो फिर कौन से कहें- किससे उम्मीद करें !

मध्यप्रदेश में सांसद, विधायक निधी से खरीदे गये वाटर टेंकर हों अथवा कृषि अभियांत्रिकी विभाग द्वारा विगत वर्ष में खरीद की गई टै्रक्टर ट्रॉलियां, इनमें से अधिकांश परिवहन विभाग द्वारा स्वीकृत मानदंडों पर खरी उतरती और कोई इन विसंगतियों पर आपत्ति करते हुए संबंधित विभाग में शिकायत दर्ज करायें तो उसकी भी सुनवाई नहीं होती फिर ऐसे कानून बनाने और आर्थिक दंड की राशि बढ़ाने की भी क्या प्रासंगिकता है? अंधेर नगरी में सब चल ही रहा है और जब लोकतंत्र में निर्वाचित जन प्रतिनिधि भी नियमन नियंत्रण में अपने हाथ खड़े कर लाचारी जता दें तो बेबस जनता अपनी विवशता पर आंसू बहाने के अलावा और क्या कर सकती है ?

सीधी और सरल तथा युक्ति संगत बात यही है कि कानून बनाने और उसके प्रावधानों के उल्लंघन पर भारी भरकम धनराशि दंड स्वरूप ठोंकने से व्यवस्था सुधरने वाली नहीं है। व्यवस्था तब ही सुधरेगी जब इसका नियमन-नियंत्रण करने वाली प्रशासनिक व्यवस्था चुस्त-दुरूस्त और ईमानदार हो तथा इसकी अनदेखी करने वाले कर्मचारियों द्वारा चूक किये जाने पर उन पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। और इसके साथ ही कठोर आर्थिक दंडात्मक प्रावधान की बजाए गांधी गिरी के उपाय आजमायें जाएं जैसे हेलमेट न पहने पाए जाने पर हेलमेट का मूल्य लेकर हेलमेट दिए जावें आखिर कोई व्यक्ति कितने हेलमेट बतौर दंड अपने घर में एकत्रित करेगा। यातायात नियमों के पालन की समझाईश देने के लिए चूककर्ता को ट्रेफिक सिपाहियों के साथ सड़कों पर निश्चित समयावधि के लिए समयदान के लिए बाध्य किया जाए अथवा उसे सार्वजनिक सामुदायिक कार्यों में जुटाया जाए। आखिरकार दंडात्मक प्रावधानों का उद्देश्य सरकारी खजाना भरना न होकर कानून के अनुपालन के लिए मानसिक रूप से प्रतिबद्ध करना ही है, और ऐसे उपायों से ही बदलाव संभव है। फिलहाल मध्यप्रदेश शासन बदलाव के प्रावधानों से असहमत है व प्रदेश शासन द्वारा सोच विचार कर ही भविष्य में इन प्रावधानों को संशोधित रूप में प्रदेश में कार्यान्वित किया जायेगा।

 

अपराध जुर्माना पूर्व  में (रू. में) नया जुर्माना (रू. में)
सीट बेल्ट नहीं पहने पर 300/- 1000/-
दो पहिया पर दो अधिक सवारी  100/- 10000/-
हेलमेट नहीं पहनने पर 200/- 1000/- व तीन माह के लिए लायसेंस निलंबन
इमरजेंसी वाहन/एंबुलेंस को रास्ता नहीं देने पर 00/- 10000/-
बिना लायसेंस के गाड़ी चलाने पर  500/- 5000/-
लायसेंस रद्द होने के बावजूीद गाड़ी चलाने पर  500/- 10000/-
निर्धारित गति से तेज गाड़ी चलाने पर  400/- 2000/-
खतरनाक ड्राइविंग करने पर 1000/- 5000/-
शराब पीकर वाहन चलाने पर 2000/- 10000/-
वाहन चलाते समय मोबाइल से बात करने पर 1000/- 5000/-
बिना परमिट के पाये जाने पर 5000/- 10000/-
गाडिय़ों की ओवरलोडिंग पर 2000/- अगले प्रति टन 1000/- 2000/-अगले प्रति टन 2000/-
बिना इंश्योरेंस के गाड़ी चलाने पर  1000/- 2000/-
नाबालिग द्वारा वाहन चलाने पर 00/- 25000/- और तीन की सजा वाहन का रजिस्ट्रेशन रद्द, और गाड़ी के मालिक, नाबालिग के अभिभावक दोनो दोषी माने जाएंगे, नाबालिग को 25 साल की उम्र तक लायसेंस नहीं मिलेगा। 
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