बैतूल में काजू की खेती की केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने की प्रशंसा

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इंदौर। उद्यानिकी विभाग बैतूल द्वारा नवाचार के तहत जिले में पहली बार की काजू की खेती की प्रशंसा गत दिनों उद्यानिकी विभाग द्वारा भोपाल में पर ड्रॉप,मोर क्रॉप पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में केंद्रीय कृषि मंत्रालय के सहायक आयुक्त श्री विजय पवार ने की।

डॉ. आशा उपवंशी ने कृषक जगत को बताया कि गत वर्ष नवाचार के तहत जिले में 400 एकड़ में काजू के पौधों का रोपण करवाया गया था, जिसके सफल रहने पर उद्यानिकी संचालनालय  ने इस वर्ष ढाई हजार एकड़ क्षेत्र में पौधों के रोपण का लक्ष्य रखा गया है। यही नहीं इस नवाचार की सफलता के बाद उद्यान विभाग ने सिवनी, छिंदवाड़ा और बालाघाट जिलों को काजू की खेती के लिए चिन्हित किया है। जहाँ इसी वर्ष काजू की व्यावसायिक खेती आरम्भ की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि किसानों को सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के प्रति जागरूक करने के लिए भोपाल के गुलाब उद्यान में गत दिनों एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई जिसमें विशेष रूप से कृषि मंत्रालय,भारत सरकार के सहायक आयुक्त श्री विजय पवार ने बैतूल जिले से म.प्र. में काजू के क्षेत्र विस्तार के लिए किए जा रहे प्रयासों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। इस कार्यशाला में उद्यानिकी आयुक्त श्री एम. कालीदुरई, उद्यानिकी उप संचालक बैतूल डॉ. आशा उपवंशी सहित प्रदेश के 30 जिलों के उद्यानिकी जिलाधिकारी और तकनीकी सहायक उपस्थित थे। बैतूल जिले में काजू की खेती को लेकर कृषक जगत ने वहां के किसानों से चर्चा की। ब्लॉक शाहपुर के ग्राम भोरा में काजू की खेती कर रहे श्री अनुराग अजय और ब्लॉक बैतूल के ग्राम झगडिय़ा की किसान भूते बाई के पति श्री धनराज काकोडिय़ा ने कृषक जगत को बताया कि उन्हें आधा हेक्टर में उद्यानिकी विभाग से काजू के 200 पौधे नि:शुल्क मिले थे जिन्हे गत वर्ष लगाया था। इनमे से गर्मी की वजह से 50 पौधे सूख गए। शेष पौधे 2 फीट से अधिक बड़े हो गए हैं। काजू का उत्पादन 3-4 साल में होता है। 

ड्रिप इरिगेशन के लिए 16  हजार की अनुदान राशि मिली थी। भूते बाई ने तोतापरी आम के 200 पौधे भी लगाए हैं। वहीं ग्राम अंधेरवावड़ी के किसान श्री रामेश्वर जियालाल ने बताया कि 4 हेक्टर में काजू के 1600 पौधे उद्यानिकी विभाग के सहयोग से गत वर्ष अक्टूबर में लगाए थे, जिनमे से 400 पौधे जीवित नहीं रहे। शेष ठीक हैं। फिलहाल दो फीट ऊंचाई हो गई है। ड्रिप इरिगेशन के लिए 60 हजार का अनुदान भी मिला। केरला से आए कृषि वैज्ञानिकों ने बताया था कि शुरुआत में एक पेड़ से 3 किलो काजू उत्पादित होते हैं। समय के साथ यह 25 किलो प्रति पेड़ तक भी पहुँच सकता है। फिलहाल तो इनकी परवरिश कर 3-4  साल तक फल आने की प्रतीक्षा ही करना है। इधर जलवायु अच्छी होने से घोड़ाडोंगरी और चिचौली ब्लॉक में भी 25-30 किसान काजू की खेती कर रहे हैं।
 

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