नकद लेनदेन पर नियंत्रण से किसानों की बढ़ेगी परेशानी

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इंदौर। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की मंशानुसार देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सरकार अपने पिछले कार्यकाल से प्रयत्नशील है। इस वर्ष 2019 के बजट में केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने इसी संदर्भ में नए प्रावधान का प्रस्ताव रखा, जिसके अनुसार एक वर्ष में बैंक से एक करोड़ रु. से अधिक के नकद आहरण पर 2 प्रतिशत की दर से कटौती (टीडीएस) की जाएगी। आर्थिक दृष्टि से सैद्धांतिक रूप से सुधारों की दिशा में यह एक अच्छा कदम माना जा सकता है, लेकिन किसानों की समस्याओं को देखते हुए व्यवहारिक रूप से इसकी परेशानियों को समझना भी आवश्यक है। इस बारे में मंदसौर के सनदी लेखाकार श्री राजेश मंडवारिया के विचार गौर करने लायक हैं। उनका कहना है कि हमारा देश कृषि प्रधान है। जहां अधिकतम किसान गांवों में रहते हैं। जहां नकद लेनदेन को खत्म कर पूरी तरह डिजिटल भुगतान को लागू करना सम्भव नहीं है। गांव का किसान सुबह जब मंडी में अपनी फसल बेचने जाता है तो वह वापसी में शहर से घर की कई जरुरी चीजों को भी खरीदता है। ऐसे में यदि मंडी व्यापारी उसे चेक या एनईएफटी से भुगतान करेगा तो वह जरुरी चीजों को नहीं खरीद पाएगा। 

इस प्रावधान की दूसरी समस्या  मंडी में उपज की तुलाई और अन्य खर्चों के भुगतान की भी है। प्रावधान के तहत यहां भी नकद भुगतान होने पर 2 प्रतिशत राशि कटौती का प्रयास किया जाएगा। लेकिन मजदूर संगठन अपनी एकता के बल पर अपनी मजदूरी की दरों में उतनी ही वृद्धि कराने में सफल हो जाएंगे। लेकिन  इस बढ़ी हुई मजदूरी का नुकसान भी किसान के हिस्से में से ही कटेगा। इस तरह किसान अपनी उपज मूल्य में से कुल 4 प्रतिशत राशि का  कटोती होगी। ऐसे में वित्त मंत्री को इस नए प्रावधान से किसानों को होने वाली परेशानियों पर भी विचार करना चाहिए।
 

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