छोटी तकनीक से मोटी आय

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कृषि में कम लागत की तकनीकी का प्रचार-प्रसार सदियों से किया जाता रहा है, परंतु उस छोटी -छोटी सस्ती तकनीकी का अंगीकरण आज भी अपेक्षा के आंकड़े से दूर है। कृषि उत्पादन में उपलब्धि का आकलन यदि किया जाये तो गेहूं ही एक ऐसा जिन्स है जिसकी उत्पादकता 20 क्विं. प्रति हेक्टर से बढ़कर आज 24 क्विं. प्रति हे. तक आ गई है। उत्पादकता का यह दौर यदि अन्य फसलों में भी आ जाये तो इसमें कोई शक नहीं कि बढ़ती जनसंख्या के भरण-पोषण की चुनौती का सामना हम सरलता से कर सकेंगे। रबी के स्वागत द्वार पर हम खड़े हैं विभिन्न जिन्सों जैसे मटर, अलसी, तोरिया, सरसों, चना, गेहूं जिनकी बुआई शुरू होना है और जिनका बीज सुरक्षित भंडारगृहों में रखा है की यथासंभव वर्षा के समाप्ति पर ही निकालें बीज की छंटाई/छनाई जो आमतौर पर कृषक महिला की जिम्मेदारी मानी जाती है की जाये, होता यह है कि बंडों में रखे जिन्स को कृषक बीज मानता है जबकि बंडों में रखा जिन्स बीज नहीं केवल अनाज होता है और बुआई के लिये हमें अनाज नहीं बल्कि बीज की आवश्यकता होती है अतएव बंडों में रखे अनाज की छंटाई/छनाई करके कटा-छटा बीज अलग कर दें। कचरे के साथ अनेकों प्रकार की फफूंदी/कीटों के अवशेष सामान्य रूप से होते ही हंै उन्हें हटा दिया जाये, इस छटे सुडोल बीज को सुरक्षा कवच पहनाना अत्यंत आवश्यक है। बीजोपचार की औषधि का उपयोग जब मशीन अथवा स्थानीय ढंग से बीजों पर किया जाता है तो बीजों की परत पर विद्यमान फफूंदी बेअसर हो जाती है इस प्रकार का उपचारित बीज जब भूमि में उराई के दौरान गिरता है तो आसपास की मिट्टी का प्रदूषण भी समाप्त हो जाता है। एक बार यदि बीज के ऊपर की बाधा दूर हो गई तो अंकुरण के रूप में जो हरी -भरी चादर दिखेगी तो बरबस ही मन प्रसन्न हो जायेगा। अनुसंधान के आंकड़ें बताते हैं कि केवल छंटाई/छनाई से 1-2 क्विंटल उत्पादन तथा बीजोपचार करने से 3-4 क्विंटल तक उत्पादन प्रति हेक्टर की दर से बढ़ाया जा सकता है। उपचारित बीज अच्छी पौध संख्या के रूप में खेतों में दिखता है यह बात तो मानी हुई है कि जितनी अच्छी पौध संख्या उतना ही अधिक उत्पादन ने सीधा संबंध होता है इस संतोषजनक पौध संख्या पाने से/बुआई के लिये खेत की तैयारी तथा हर जिन्स के बोने का समय, गहराई पर भी ध्यान देना जरूरी बातें होती हैं। आजकल की महंगाई में यदि लागत कम हो जाये तो खेती लाभकारी बन जाये। महंगे उर्वरकों की स्थापना उसके उपयोग से भी अधिक महत्वपूर्ण होता है आज भी बीज के साथ उर्वरकों को मिलाकर उराई करके संतोष कर लिया जाता है कि बोनी हो गई अब यह बोनी हुई या बेगार स्वयं मंथन की बात है भूलकर भी उर्वरक बीज मिश्रण नहीं किया जाये। महंगे उर्वरकों की कीमत की पाई -पाई उसकी स्थापना बीज के नीचे करके वसूल की जाये। अंधाधुंध बीज मात्रा का उपयोग एक सामान्य बात है कृषक भ्रमवश अधिक बीज का उपयोग अधिक पौध संख्या प्राप्त करने की लालच में करके राष्ट्रीय नुकसान कर बैठता है। निर्धारित बीज दर  के मायने एक इकाई क्षेत्र में निर्धारित पौध संख्या ताकि भूमि से पोषक तत्व पाने के लिये कोमल पौधों को संघर्ष का सामना नहीं करना पड़े। गेहूं में यह बात आम है जिंस पर रोक लगना जरूरी है ताकि उत्पादन का जो गौरव हमें प्राप्त हो चुका है कायम रह सके। दलहनी फसलों में कल्चर का उपयोग तिलहनी फसलों में स्फुर का उपयोग से उत्पादन बढ़ाना सस्ता सरल तरीका है। अलसी, तोरिया, सरसों को उचित गहराई पर बोना माहो के प्रारंभिक आक्रमण से बचाव तथा चने के लिये खेत की तैयारी में गंभीरता आज की आवश्यकता है। कृषि में कम लागत की छोटी -छोटी तकनीकी का अंगीकरण यदि शत-प्रतिशत हो जाये तो लक्षित उत्पादन के लक्ष्य को भेदना कोई बड़ी बात नहीं होगी।

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