औपचारिकता बनकर रह गया कृषि विज्ञान मेला

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इंदौर। गत दिनों इंदौर में जल संरक्षण और संवर्धन को लेकर आयोजित कृषि विज्ञान मेला महज औपचारिकता बनकर रह गया, क्योंकि इस मेले का व्यापक प्रचार नहीं किए जाने से जहां कई अन्य लोग मेले में अपना स्टॉल नहीं लगा सके, वहीं कई किसान इसमें शामिल नहीं हो सके। इस कारण यह मेला महज औपचारिकता बनकर रह गया।

उल्लेखनीय है कि गत शनिवार को इंदौर की लक्ष्मी बाई कृषि उपज मंडी परिसर में केंद्र सरकार के जल शक्ति अभियान के तहत जल संरक्षण और जल संवर्धन के लिए केवीके कस्तूरबाग्राम,कृषि विभाग और आत्मा परियोजना के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय कृषि विज्ञान मेला (खरीफ) लगाया गया था। इसका शुभारम्भ  प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री श्री जीतू पटवारी और इंदौर के सांसद श्री शंकर लालवानी ने किया। इस मौके पर इंदौर के विधायक श्री संजय शुक्ला भी उपस्थित थे। अतिथियों ने जल संरक्षण और जल संवर्धन के साथ वर्षा जल को रोकने की जरूरत पर जोर दिया, ताकि भावी पीढ़ी को सुरक्षित भविष्य दे सकें।

इस बारे में आत्मा परियोजना की संचालक श्रीमती शर्ली थॉमस ने कृषक जगत को बताया कि यह कृषि विज्ञान मेला मूलत: जल संरक्षण पर आधारित था जिसमें करीब एक हजार किसान शामिल हुए थे। मेले में किसानों के लिए जल संरक्षण के तहत विभागीय स्टॉल भी लगाए गए। बता दें कि जिला प्रशासन द्वारा इस मेले का व्यापक प्रचार नहीं किए जाने से स्टॉलों की संख्या कम रही। यदि समय रहते इसकी सूचना जारी की जाती तो बड़ी संख्या में न केवल स्टॉल लगते, बल्कि और किसान भी मौजूद रहते, जो जल के सदुपयोग और संरक्षण के प्रति जागरूक बनते। इस दृष्टि से यह मेला अपने उद्देश्यों में पूरा करने में सफल नहीं हुआ। कृषि उप संचालक श्री विजय चौरसिया ने कृषक जगत को बताया कि इस एक दिवसीय कृषि विज्ञान मेले में 15 सरकारी और 5 निजी स्टॉल लगाए गए थे। किसानों के लिए लक्की ड्रा का भी आयोजन किया गया था। उच्च शिक्षा मंत्री ने 5 किसानों को प्रतीकात्मक मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए। ऐसे ही एक दिवसीय मेले संभवत: 11 और 14 सितंबर को सांवेर और देपालपुर में आयोजित किए जाएंगे।

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