कैसे करें कीट व रोगनाशियों का सुरक्षित प्रयोग

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घरों के लिए नाशीजीव वे हैं, जो कई रोगों को फैलाने में मदद करते हैं, जैसे मक्खी, मच्छर और तिलचट्टा। सजावटी पौधों, गृह वाटिका फसलों और भण्डारित अनाज को नुकसान पहुंचाने वाले जीव भी नाशीजीव कहलाते हैं। कीटनाशी जैविक रूप से सक्रिय रसायन हैं, जो अपने विषाक्त या हानिकारक प्रभाव के कारण हानिकारक जीवों को खत्म करते हैं, इसलिए वे मानव, पशुओं तथा परागकर्ताओं पर भी गम्भीर और दीर्घकालिक महंगे भी हैं इसलिए कुछ बातों का ध्यान रखने के साथ-साथ इनके प्रयोग के समय क्या-क्या सावधानियां रखनी चाहिए इनकी जानकारी किसानों को होना आवश्यक है।

इसलिए कीटनाशियों को बहुत सावधानी से उपयोग करना चाहिए, ताकि इनसे अधिकतम लाभ व न्यूनतम नुकसान हो।

कीट व रोगनाशी खरीदते समय सावधानियां

  • कीटनाशक/जैव कीटनाशक केवल वैध लाइसेंस वाले पंजीकृत कीटनाशक डीलरों से ही खरीदें।
  • एक निश्चित क्षेत्र में एकल ऑपरेशन के लिए केवल आवश्यक मात्रा में ही कीटनाशकों को खरीदें।
  • कीटनाशकों के डिब्बों/पैकेटों अनुमोदित लेबल देखकर खरीदें।
  • लेबल पर बैच नंबर, पंजीकरण संख्या, निर्माण की तारीख/समाप्ति देखें।
  • पैकेट/डिब्बों में अच्छी तरह से पैक कीटनाशक खरीदें।
  •  कीटनाशक खरीदते समय हमेशा डीलर से बिल/बीजक प्राप्त करें। 

भण्डारण करते समय सावधानियां

  • कीट व रोगनाशी रसायनों को जहां तक हो आवश्यकतानुसार ही खरीदें। कभी भी आवश्यकता से अधिक रसायन नहंीं रखें।
  • रसायनों को इनके ही डिब्बों में रखें। कभी भी टॉनिक आदि की शीशीयों में नहीं रखें, क्योंकि भूल से कोई उसे टॉनिक समझकर पी सकता है। 
  • इन्हें बच्चों की पहुंच से दूर ताले में बंद करके उंचे स्थान पर रखें।
  • मकान में विशेषकर जिस कमरे में कोई सोता हो तो रसायनों को कभी भी नहीं रखें, क्योंकि विषैली गंध स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

प्रयोग से पहले की सावधानियां

  • कीटों की अच्छी तरह पहचान कर लें, यदि पहचान संभव न हो तो स्थानीय स्तर पर उपस्थित कीट वैज्ञानिक से कीट की पहचान करवाकर ही कीटनाशक खरीदें।
  • कीटनाशक का प्रयोग तभी करें जब कीट की आर्थिक क्षति स्तर सीमा अधिक बढ़ गई हो।
  • कीटनाशकों के घातक प्रभावों से बचने के लिए आवश्यक होता है कि उन पर लिखे निर्देशों का पालन ठीक ढंग से किया जाए, जिसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।
  • कीटनाशकों की विषाक्ता प्रदर्शित करने के लिए कीटनाशकों के डिब्बों पर तिकोने आकार का हरा या नीला व पीला अथवा लाल रंग का निशान बना होता है। लाल निशान वाले कीटनाशी स्तनधारियों पर सबसे अधिक नुकसान करते हंै लाल निशान वाले कीटनाशी की अपेक्षा पीले रंग के निशान वाले कम और पीले रंग की अपेक्षा नीले रंग के निशान वाले कीटनाशी कम नुकसान पहुंचाते हैं, तथा सबसे कम नुकसान हरे रंग के निशान वाले कीटनाशी से होता है। 
  • कीटनाशी खरीदते समय हमेशा उसके बनने की तिथि, उपयोग करने की अंतिम तिथि देखना व बिल लेना न भूलें।
  • कीटनाशकों पर लगे लेबल तथा उसके साथ मिलने वाली विवरणिका में दिये गये निर्देशों को अवश्य पढ़ें तथा उसमें दी गई चेतावनी का पालन करें।
कीटनाशी ऐसे रसायन हैं, जो हानिकारक जीवों को मारने या नियंत्रित करने के लिए उपयोग में लाये जाते हैं। कोई भी ऐसा जीव, जो हमें हानि पहुंचाये हानिकारक जीव कहलाता है। किसानों को नुकसान पहुंचाने वाले मुख्य जीव हैं-फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीेड़े-मकोड़े, पौधों के रोगों को जन्म देने वाले कवक, जीवाणु, कृमि और वायरस, पोषक तत्वों और नमी के लिए फसलों से प्रतियोगिता करने वाले खरपतवार जो सिंचाई की नहरों में जल प्रवाह को रोकते हंै, अनाज आदि के दानों, नवजात पौधों और फलों को खा जाने वाले चूहे और चिडिय़ां आदि। आज की इस आधुनिक खेती में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए अंधाधुंध रसायनों का प्रयोग किया जा रहा है। फसलों के कम पैदावार के कई कारणों में से, कीट, बीमारियां एवं खरपतवार प्रमुख हैं, अधिक उत्पादन लेने हेतु बुवाई से पहले बीजोपचार तथा बुवाई के बाद कीट नियंत्रण एवं समय-समय पर बीमारियों से बचाव हेतु विभिन्न रसायनिक दवाओं का प्रयोग किया जाता है।

घोल बनाते समय सावधानियां

  • घोल हमेशा खुली हवा में बनायें और यदि हवा चल रही हो तो हवा के विपरीत मुंह करके नहीं खड़ा हों।
  • घोल बनाने के लिए हमेशा साफ एवं स्वच्छ पानी ही प्रयोग में लें।
  • घोल बनाने में जो बर्तन प्रयोग किये जाएं वे इस प्रकार के हों जो घर में प्रयोग न आते हों।
  • रसायनों की उचित मात्रा ही निश्चित पानी में मिलायें तथा घोल हमेशा जरूरत के अनुसार ही बनायें।
  • घोल बनाते समय शीशीयों या डिब्बों को बहुत सावधानी से खोलें। 
  • घोल को मिलाने के लिए कभी भी हाथ का प्रयोग ना करें, हमेशा लकड़ी के डंडे या लोहे की छड़ आदि से मिलायें।
  • एक से अधिक कीटनाशकों को मिलाकर घोल नहीं बनायें। 
  • घोल बनाते समय या छिड़काव के समय अगर रसायन शरीर पर पड़ जाये तो तुरंत साबुन से साफ कर दें।
  • रयायनों की शीशीयां या डिब्बा खाली हो गया हो तो तोड़कर जमीन में गाड़ दें, उनको अन्य उपयोग में नहीं लायें।

प्रयोग के दौरान सावधानियां

  • शरीर को बचाने वाले कपड़े ठीक ढंग से पहन लें। हाथों पर दस्ताने, चेहरे पर नकाब, आंखों पर चश्मा व सिर पर टोपी पहन लें। 
  • कीटनाशक का छिड़काव करते समय यह देख लें कि उपकरण में किसी प्रकार का रिसाव तो नहीं हो रहा है। 
  • स्प्रेयर के नोजल अथवा उपकरण में मुंह लगाकर घोल खींचने का प्रयास नहीं करेंं।
  • तरल कीटनाशकों को सावधानीपूर्वक उपकरण में डालें और यह ध्यान रखें यह किसी प्रकार मुंह, कान, आंख, नाक आदि में न जाने पाये, यदि ऐसा होता है तो तुरन्त साफ पानी से धो लें।
  • कीटनाशी दवाओं का उपयोग करते समय कभी भी अकेले काम नहीं करें।
  • जहां पर कीटनाशी दवा का उपयोग हो रहा हों, वहां पर बच्चों और फालतू मनुष्यों को नहीं आने दें व उन्हें दवाओं को कभी नहीं छूने दें।
  • उपयोग के लिए बताई गई हिदायतों को फिर से पढ़ें।
  • कीटनाशी दवाओं को खेत में कभी भी खुला नहीं छोड़ें, इससे बच्चों या जानवरों को हानि हो सकती है। 
  • कीटनाशी के प्रयोग के समय कोई खान पान या धूम्रपान नहीं करें।
  • हवा के विपरीत दिशा में खड़े होकर छिड़काव या भुरकाव नहीं करें।
  • कीटनाशक छिड़कने वाले यंत्र की जांच कर लें। यदि खराब है तो पहले उसकी मरम्मत कर लें।
  • एक बार में जितने घोल की आवश्यकता हो उतना ही तैयार करें। 
  • पुष्पावस्था पर फसलों पर छिड़काव नहीं करें, यदि आवश्यक हो तो हमेशा सायंकाल में ही करें।
  • छिड़काव के लिए उपयुक्त समय सुबह या सांयकाल होता है यह ध्यान रखें कि हवा तेज गति से न बह रही हो।

प्रयोग के बाद की सावधानियां

  • बचे हुए कीटनाशक को सुरक्षित भंडारित कर दें, रसायनों को बच्चों, बूढ़ों व पशुओं की पहुंच से दूर रखें।
  • कभी भी शेष कीटनाशी को स्प्रेयर या उपकरण में नहीं छोड़ें। 
  • उपकरण को ठीक से साफ करके ही भंडार गृह में रखें।
  • खाली डिब्बों को किसी अन्य काम में नहीं लें, उन्हे तोड़कर मिट्टी में दबा देें।
  • छिड़काव के समय प्रयोग किये गये कपड़े, बर्तन आदि को ठीक से धोकर रखें।
  • छिड़काव के बाद ठीक से स्नान करें व हाथों को कई बार साबुन से धो लें।
  • छिड़के गये कीटनाशी का ब्योरा लिखकर रख लें।
  • कीटनाशक छिड़कने के बाद छिड़के गये खेत में किसी मनुष्य या जानवरों को नहीं जाने दें।
  • उपचारित खेतों से कुछ दिनों तक चारा, सब्जी एवं भोजन का प्रयोग नहीं करें।

विष का उपचार

सभी सावधानियाँ रखने के बावजूद भी यदि कोई व्यक्ति इन कीटनाशकों का शिकार हो जाये तो निम्नलिखित उपचार करें-

  • रोगी के शरीर से विष को शीघ्रातिशीघ्र निकालने का प्रयास करें। 
  • विषमारक दवा का प्रयोग करें।
  • रोगी को तुरंत किसी अस्तपाल या डॉक्टर के पास ले जायें। 
  • यदि किसी ने जहर खा लिया है तो एक गिलास गुनगुने पानी में दो चम्मच नमक मिलाकर पिलायें तथा उल्टी करायें अथवा गुनगुने पानी में साबुन घोलकर देें अथवा एक गिलास गुनगने पानी में 1 ग्राम जिंक सल्फेट मिलाकर दें।
  • यदि व्यक्ति ने विष सूंघ लिया है तो शीघ्र ही खुले स्थान पर ले जायें। शरीर के कपड़े ढ़ीले कर दें। यदि दौरे पड़ रहे हैं, तो अंधेरे वाले स्थान पर ले जायें। यदि संास लेने में समस्या हो रही हो तो पेट के सहारे लिटाकर उसकी बांहों को सामने की ओर फैला दें एवं रोगी की पीठ को हल्के-हल्के सहलाते हुए दबाएं तथा कृत्रिम श्वसन का भी प्रबंध करें।
  • इस प्रकार उपरोक्त सावधानियों को ध्यान में रखते हुए यदि कीटनाशकों एवं रोगनाशकों का प्रयोग किया जाये तो इनसे होने वाले किसी भी प्रकार के नुकसान/ दुष्परिणाम से बचा जा सकता है। 

 

  • डॉ. राम गोपाल सामोता

तकनीकी अधिकारी (कीट विज्ञान)
केन्द्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केन्द्र, करणी मार्ग, श्रीगंगानगर (राज.) 
ramgopal.765@gmail.com

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