जल, जंगल, जमीन का संरक्षण आवश्यक

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भोपाल। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री कमलेश्वर पटेल ने कहा है कि बिगड़ते हुए प्राकृतिक संतुलन को संवारने के लिये जल, जंगल, जमीन का संरक्षण आवश्यक है। यह सामुदायिक भागीदारी से संभव है। उन्होंने यह बात म.प्र. जल एवं भूमि प्रबंधन संस्थान, क्लब ऑफ रोम इंटरनेशनल संस्था तथा राजीव गांधी फांउडेशन के संयुक्त तत्वावधान में री-जनरेटिंग नेचुरल कैपिटल लैण्ड, वाटर एण्ड फॉरेस्ट पर आयोजित कार्यशाला में कही।

जनसम्पर्क मंत्री श्री पी.सी. शर्मा ने कहा है कि जल, जंगल, जमीन तीनों एक-दूसरे के पर्याय हैं। पर्यावरण संतुलन के लिये तीनों में सांमजस्य जरूरी है। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री जयवर्द्धन सिंह ने कहा कि गत वर्षों में भू-जल के बिना सोचे-समझे दोहन ने गंभीर स्थिति निर्मित कर दी है। संचालक वाल्मी श्रीमती उर्मिला शुक्ला ने बताया कि कार्यशाला में प्रकृति की अमूल्य धरोहर को सहेजने संवारने के संबंध में विषय विशेषज्ञों द्वारा दिये गये, सुझावों पर एक रिसर्च पेपर मुख्यमंत्री को प्रस्तुत किया जाएगा। कार्यशाला में क्लब ऑफ रोम के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल श्री अरूण कुमार साहनी, प्लांनिग कमीशन ऑफ इंडिया एवं इकोनॉमिक एडवाइजरी काउंसिल के पूर्व सदस्य डॉ. किरीट पारिख, लेफ्टिनेंट जनरल श्री बलवीर सिंह सन्धू, डॉ. अशोक खोसला, राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ कंटेमपरेरी स्टडीज के निदेशक श्री विजय महाजन, वरिष्ठ पत्रकार श्री अभिलाष खांडेकर एवं श्री संदीप खानविलकर सहित अन्य विषय-विशेषज्ञों ने भी अपने विचार रखे। 

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