पोर्टेबल नाडेप इकाई

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कृषि विज्ञान केन्द्र, बैतूल के द्वारा किसान भाईयों से नाडेप कम्पोस्ट के बारे में जानकारी ली गई। चर्चा के दौरान यह पता चला कि किसान भाई हर साल कम्पोस्ट खाद खरीद कर अपने खेतों में उपयोग करते थे एवं फसल अवशेषों को जला कर नष्ट करते थे। जिसके कारण मिट्टी की भौतिक संरचना को नुकसान पहुँचता था। फसल अवशेषों को नष्ट करके खाद बनाने के बारे में कृषि विज्ञान केन्द्र के द्वारा किसानों को पोर्टेबल नाडेप के बारे में जानकारी दी गई। किसान भाईयों का कहना था कि नाडेप को बनाने के लिए उनको पक्के टांकों का निर्माण करना पड़ता है, जो कि बहुत महंगा एवं कठिन होता है। इस काम को करने के लिए अधिक मजदूर लगते हैं। इन परेशानियों को ध्यान में रखते हुए पोर्टेबल नाडेप की संरचना की और इसकी डिजाइन बनाई। यह पोर्टेबल नाडेप को किसानों के लिये सस्ता एवं कम लागत का बनाया गया। 

पोर्टेबल नाडेप कम्पोस्ट बनाने की इस विधि में सीमेन्ट की पतली फ्रेम का उपयोग किया जाता है।  एक फ्रेम की लम्बाई 75.5 से.मी., चौड़ाई 100 से.मी. है एवं 12 छेद होते हैं, एक छेद की लम्बाई 16 से.मी. और चौड़ाई 7.8 से.मी. है। पोर्टेबल नाडेप की कुल लम्बाई 377.5 से.मी. है तथा चौड़ाई 151 से.मी. और ऊँचाई 100 से.मी. है। पोर्टेबल नाडेप को सीमेन्ट की 14 फ्रेम को एक साथ लोहे की खिल्लियों के द्वारा जोड़कर तैयार किया जाता है। इसमें नीचे सीमेन्ट की पतली बिना छेद वाली फ्रेम लगाई जाती है। 

पोर्टेबल नाडेप के लाभ:

  • पोर्टेबल नाडेप को खेत में तैयार किया जा सकता है, तथा कम्पोस्ट तैयार हो जाने के बाद इसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर भी आसानी से ले जाया जा सकता है। 
  • इस पोर्टेबल नाडेप की कीमत 8200 रू. प्रति यूनिट है, जबकि नाडेप को पुरानी विधि से तैयार करने में 12000-15000 रू. प्रति यूनिट लागत आती है। 
  • इस तकनीक में 2.5 से 3.5 महीने के अंदर कम्पोस्ट खाद तैयार हो जाती है। इस तकनीक के द्वारा जो खाद प्राप्त होती है उसमें प्रमुख रूप से 1.5 प्रतिशत नाइट्रोजन, 1 प्रतिशत स्फुर, 1.2 -1.4 प्रतिशत पोटाश एवं अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे - जिंक, कैल्शियम, सल्फर, आयरन आदि भी पाये जाते हैं। 

नाडेप भरने के लिये आवश्यक सामग्री : 

फसल अवशेष    1400 से 1500 किग्रा
गोबर    90 से 100 किग्रा
सूखी छनी मिट्टी     1400 से 1600 किग्रा
पानी        1500 से 2000 लीटर 

पोर्टेबल नाडेप भरने की विधि :

नाडेप भरने के लिये उपरोक्त सामग्री एकत्रित कर रखे एवं नाडेप को एक ही दिन में भरें। नाडेप टांका भरने के पूर्व टांके को फ्रेम जोड़कर एकत्रित करें फिर उसमें मिट्टी और गोबर का घोल बनाकर डालें, जिससे पानी का रिसाव जमीन के अंदर न हो। 

पोर्टेबल नाडेप टांका को भरने के लिये प्रथम परत में सर्वप्रथम वानस्पतिक कचरे की 5 इंच की परत बनाये। उसके ऊपर 50 से 100 लीटर पानी में 4-5 किलोग्राम गोबर घोलकर कचरे की परत को नम करें। तत्पश्चात् छनी हुई मिट्टी की परत बिछायें। इस तरह नाडेप टांके की प्रथम परत तैयार हो जाती है। नाडेप टांके को पूर्ण भरने के लिये लगभग 10 से 12 परतों की आवश्यकता होती है। जब टांका दीवार तक भर जाये, उसके पश्चात् झोपड़ीनुमा आकार दें। इसके पश्चात् मिट्टी से छपाई करने के बाद गोबर से लिपाई करें। नाडेप टांके में नमी बनाये रखें। नाडेप टांका भराई के 10 से 15 दिन पश्चात् टांके की सामग्री सिकुड़कर टांके के अन्दर धंस जावेगी। जिसे पुन: उपरोक्तानुसार भरकर तैयार कर लें। नाडेप की उपरी परत पर दरार पडऩे पर पानी से सिंचाई करते रहें ताकि नमी एवं तापमान बना रहे। नाडेप टांके में छिद्रों से पानी देकर नमी को बनाये रखें। जब टांका भरे हुये 40 से 45 दिन हो जाये उसमें राइजोबियम, पी.एस.बी. एवं एजेक्टोवेक्टर की 1-1 किलोग्राम मात्रा पानी में घोलकर छिद्रों में डालें जिससे कि नाडेप कम्पोस्ट खाद की गुणवत्ता में वृद्धि होगी। इस तरह 2.5-3 माह में खाद पककर तैयार हो जावेगी। एक पोर्टेबल नाडेप टांके से लगभग 25-30 क्विंटल खाद तैयार होगी जो कि एक एकड़ खेत के लिये पर्याप्त है। 

 

  • डॉ. व्ही.के. वर्मा
  • डॉ. मेघा दुबे 
  • डॉ. संजीव वर्मा

कृषि विज्ञान केन्द्र, बैतूल  
kvkbetul@rediffmail.com

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