गाजरघास जागरुकता हेतु लाईव डिजीटल प्रोग्राम

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रिलायंस फाउंडेशन द्वारा

जबलपुर। गाजरघास जागरुकता सप्ताह के अंर्तगत रिलायंस फाउंडेशन और आईसीएआर- खरपतवार अनुसंधान निदेशालय जबलपुर द्वारा संयुक्त रुप से यूट्यूब चैनल पर लाइव प्रोग्राम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से लोगों के प्रश्नों का समाधान किया। खरपतवार अनुसंधान निदेशालय जबलपुर के निदेशक डॉक्टर पी.के. सिंह, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिकों डॉ. आर.पी. दुबे एवं डॉ. सुशील कुमार ने किसानों से यूट्यूब चैनल पर लाइव चर्चा की। उनकी समस्या को सुनकर किसानों को गाजरघास के अलावा फसलों में खरपतवार नियंत्रण किस प्रकार से करें, इसके भी उत्तर भी दिए।

कार्यक्रम का आयोजन वृहद डिजिटल स्तर में  होने से, तेलंगाना, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश के किसान भाइयों ने लाइव प्रोग्राम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। संपूर्ण कार्यक्रम मुख्य रूप से गाजरघास पर आधारित था। यह देश की बहुत बड़ी समस्या है और इसके नियंत्रण उसके समाधान और उससे होने वाले प्रभाव के विषय पर आयोजित किया गया था। डॉ. पी.के. सिंह ने बताया कि किसान भाई गाजरघास उन्मूलन हेतु संयुक्त प्रयास करें और इसके छोटे से पौधे को ही जड़ समूल उखाड़ कर गड्ढे में दफना दें, यदि यह व्रहद मात्रा में खेत के आसपास फैला हुआ है तो एक बड़ा सा गड्ढा करके संपूर्ण पौधों को उखाड़कर मिट्टी के सहारे इसे दबाकर तीन से चार महीने रख दें तो यह एक अच्छी खाद के रूप में तैयार हो जाएगा। गाजरघास को उखाडऩे के पूर्व हाथों में दस्ताने अवश्य पहन लेें क्योंकि अधिक संवेदनशील व्यक्तियों को इसके नकारात्मक प्रभाव भी हो सकते हैं वहीं डॉ. आर. पी. दुबे और डॉ. सुशील कुमार ने मनुष्यों एवं जानवरों पर इस पौधे के नकारात्मक प्रभाव की जानकारी दी।

कार्यक्रम में यूट्यूब चैनल को लाइव रखते हुए नि:शुल्क हेल्पलाइन नंबर के माध्यम से देश के विभिन्न राज्यों से किसानों ने लगभग डेढ़ घंटे तक अपने प्रश्नों का उत्तर प्राप्त किया। इसके अलावा यूट्यूब चैनल के कमेंट बॉक्स में भी लोगों ने अपने प्रश्नों को पूछा। इस प्रोग्राम को लगभग 1447 लोगों ने लाइव देखा एवं 61 प्रश्न- उत्तरों का समाधान हुआ।

रिलायंस फाउंडेशन के क्षेत्रीय प्रबंधक जगदीश प्रजापति ने बताया कि रिलायंस फाउंडेशन का यह  कार्यक्रम पर किसान भाइयों के लिए रिलायंस फाउंडेशन के सूचना सेवा कार्यक्रम के तहत रखा गया था, इस कार्यक्रम को जो किसान भाई लाइव नहीं देख पाए हैं वे यूट्यूब में जाकर के रिलायंस फाउंडेशन के वीडियोज को सर्च करते हुए भविष्य में भी इस प्रोग्राम को देखते हुए अपने प्रश्नों का समाधान कर सकते हैं   

संपूर्ण कार्यक्रम को रिलायंस फाउंडेशन के माध्यम से कृषि विज्ञान केन्द्रों, महिला आजीविका समूहों ने भी देखा एवं अपनी शंकाओं का समाधान किया।
 

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