मक्का पर हानिकारक कीट फॉल आर्मी वर्म का सागर जिले में प्रकोप

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सागर। कृषि विज्ञान केन्द्र, सागर के डॉ. के. एस. यादव वरिष्ठ वैज्ञानिक के मार्गदर्शन में वैज्ञानिक दल द्वारा सतत् कृषकों के खेतों में भ्रमण कर मक्का की फसल का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान  ग्राम सेमरागोपालन एवं खजुरिया में डॉ. ममता सिंह एवं श्री नीलकमल पन्द्रे द्वारा फॉल आर्मी वर्म के प्रकोप को देखा गया। यह मक्का का अत्यंत ही हानिकारक  कीट जिसकी इल्ली मक्का में भारी नुकसान पहुंचाती है। यह मुख्यत: अमेरिका मूल का कीट है जो एक ही रात में 100-200 कि.मी. तक उड़कर जा सकता है तथा व्यस्क मादा अपने जीवन काल में 1500-2000 तक अण्डे दे सकती है । एक फसल सीजन में इस कीट का 10-12 जीवन चक्र हो सकता है। इसके पूर्व के वर्षो में भारत के दक्षिणी राज्यों में इस कीट द्वारा मक्का में काफी हानि पहुंचाया गया है तथा म.प्र. की कुछ जिलों में इसे देखा गया है। इस कीट का इल्ली मक्का के अलावा घास कुल के अन्य अनाज वाली फसलों तथा सब्जियों में भारी हानि करने में सक्षम होता है। ये इल्ली पत्तियों के हरे भाग को खुरच कर खाती है फलस्वरूप पत्तियों में हरे रंग के धब्बे बनते है। इल्लियां पौधों के नये पत्ती के पोंगलियों के अंदर छिपी रहती है तथा पत्तियों को खाकर उसमें छोटे- बड़े गोल छेद कर नुकसान पहुँचाती है।  इस कीट के नियंत्रण हेतु लक्षण दिखते ही इमामेक्टिन बेन्जोएट 5 एस.जी. 0.4 ग्राम/ली. पानी या थायोमैथेक्जॉम 12.6 प्रतिशत लैम्डासायहेलोथ्रिन 9.5 प्रतिशत जेड.सी. का 0.5 मि.ली./ली. पानी या क्लोरेन्टनीलीप्रोल 18.15 प्रतिशत एस.जी. का 0.4 मि.ली./ली. पानी की दर से 200 ली. घोल/ एकड़ की दर से कीटनाशक दवा का प्रयोग करें। 

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