भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान क्षेत्रीय केंद्र इंदौर : एक नज़र में 

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कृषक जगत पोर्टल न्यूज 

इंदौर : भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल और भारतीय कृषि अनुसन्धान संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र इंदौर के संयुक्त तत्वावधान में 58 वीं अखिल भारतीय गेहूं और जौ कार्यशाला 24 - 26 अगस्त तक इंदौर में आयोजित की जा रही है जिसका शुभारम्भ 25 अगस्त को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर रवीन्द्र नाट्य गृह में दोपहर 2 बजे करेंगे इस विशेष अवसर पर भारतीय कृषि अनुसन्धान संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र इंदौर के इतिहास और उसकी अब तक की प्रगति पर एक नज़र डालना प्रासंगिक है |

इतिहास : भारतीय कृषि अनुसन्धान संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र इंदौर की स्थापना 1951 में सुनियोजित गेहूं सुधार के लिए हुई थी जिसका उद्देश्य मध्य भारत में अधिक उत्पादन क्षमता वाली गेरुआ रोधी गेहूं की प्रजातियों को विकसित करना था | इस केंद्र के अनुसंधानों के कारण ही 60  के दशक के बाद लोकप्रिय कठिया /ध्मालवी (ड्यूरम) गेहूं लुप्तप्राय होने से बचा और उसे पुनर्जीवन मिला | मालवी गेहूं और गेरुआ रोग अनुसंधान के लिए आज इस केंद्र की पहचान अंतर्राष्ट्रीय स्तर की है |

कार्यक्षेत्र : यह केंद्र गेहूं अनुसंधान के क्षेत्र में करनाल (हरियाणा) स्थित भारतीय गेहूं और जौ अनुसन्धान संस्थान के तहत मध्यभारत जिसमें म.प्र., गुजरात, छतीसगढ़, उ.प्र. का बुंदेलखंड क्षेत्र तथा राजस्थान के कोटा और उदयपुर संभाग के लिए क्षेत्रीय समन्वय इकाई के रूप में कार्य कर रहा है |

उपलब्धियां : यह केंद्र अब तक गेहूं की 31 प्रजातियां विकसित कर चुका है | जिसमें मालवी गेहूं की 14 और रोटी वाले गेहूं की 17 प्रजातियां शामिल हैं| 2001 -02 से अब तक यह केंद्र गेहूं की नई प्रजातियों का 30 हजार क्विंटल से अधिक प्रजनक बीज  का उत्पादन और वितरण कर चुका है, कृषक प्रक्षेत्र पर गेहूं की 20  उन्नत प्रजातियों के एक हजार से अधिक प्रथम पंक्ति के प्रदर्शनों में औसत उत्पादन में 47 प्रतिशत की वृद्धि हुई है | गेहूं वैज्ञानिकों के अनवरत अनुसंधान और प्रसार  के कारण ही इस वर्ष देश में गेहूं का उत्पादन 10  करोड़ टन के पार पहुँच गया है |

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