सोयाबीन में अफलन से अन्नदाता चिंतित

Share On :

flowering-delayed-in-soybean-production-may-hit

इंदौर :  अतिवर्षा से प्रदेश के कई जिलों में सोयाबीन की फसल में अफलन की स्थिति बनते देख किसान चिंतित हैं.राजगढ़ ब्यावरा,गुना , शाजापुर जिले के साथ ही उज्जैन जिले के कई गांवों में 60 दिन बाद भी सोयाबीन की फसल में फलियां नहीं बनने से किसान मायूस हो गए हैं, जबकि करीब 85 दिन में यह फसल पक कर तैयार हो जाती है.इस बीच भारतीय सोयाबीन अनुसंधान केंद्र, इंदौर से उज्जैन गए एक दल ने निरीक्षण पश्चात अपनी रिपोर्ट पेश की है उसके अनुसार प्रारंभिक अवस्था में पानी की कमी , फिर लगातार बारिश से किसान कीटनाशक का प्रयोग नहीं कर पाए इसलिए ऐसे हालात बने.

उल्लेखनीय है कि उज्जैन जिले की खाचरौद तहसील के कई गांवों में सोयाबीन  की फसल में अफलन की स्थिति देखी जा रही है. मौके पर पहुंचे कृषक जगत के क्षेत्रीय प्रतिनिधि से खाचरौद क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी श्री एम.एल.शर्मा ने बताया कि अतिवर्षा से सोयाबीन की फसल में आर्द्रता के बावजूद तापमान बढ़ने के बाद पौधों की वृद्धि रुकने और फिर लगातार बारिश होने से फूल गिरने से अफलन की स्थिति बनी है.यदि कृषक फसल में हार्मोन्स का उपयोग करे तो फिर से फलियां बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी.5  दिन पहले जहाँ ऐसी स्थिति थी वहां फिर से फूल आने लगे हैं.श्री शर्मा ने कहा कि तारोद के किसान श्री बहादुर सिंह आंजना ,श्री शिवलाल आंजना,श्री राधेश्याम वर्मा,आकिया जागीर के सरपंच श्री पन्नालाल,श्री श्यामसुन्दर शर्मा ,बरखेड़ा जावरा के श्री रामसिंह गुर्जर, झिरमिरा के श्री शम्भुलाल व्यास,श्री रूपसिंह गुर्जर,घिनोदा के श्री बसंतीलाल चौहान ,बेड़ावनिया के श्री लखन राठौर और बरामदखेड़ा के श्री अर्जुन सिंह राजपूत की सोयाबीन फसल में अफलन देखा गया है.

दूसरी ओर,संयुक्त कृषि निदेशक उज्जैन के अनुरोध पर भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर के वैज्ञानिकों के एक दल ने गत दिनों सोयाबीन फसल में अफलन की शिकायत पर गांवों में प्रभावित फसल का निरीक्षण किया था.इस दल में तीन वैज्ञानिक डॉ. लोकेश कुमार मीणा (कीट विज्ञान ), श्री संजीव कुमार और डॉ .लक्ष्मण सिंह राजपूत (पादप रोग विज्ञान ) के अलावा एसडीएम उज्जैन ,श्री सीएल केवड़ा (उप संचालक कृषि ),डॉ. आर.पी. शर्मा (केवीके), श्री डीएस अर्गल सहा.संचालक कृषि (उज्जैन ) और बीमा प्रतिनिधि श्री अरुण केवलिया उपस्थित थे.सोयाबीन अनुसंधान संस्थान के प्रभारी निदेशक श्री अमरनाथ शर्मा ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि दल ने किसानों से चर्चा कर मौसम, सोयाबीन की प्रजाति,उपयोग किए गए कीटनाशक ,उपयोग का समय आदि की जानकारी ली तो पता चला कि सोयाबीन की एक ही प्रजाति 9560 की खेती की जा रही है. फसल की प्रारम्भिक अवस्था में आई पानी की कमी के बाद लगातार हुई वर्षा के कारण किसान कीटनाशक का प्रयोग नहीं कर पाए या कम पानी के उपयोग से प्रभावी कीट नियंत्रण नहीं हो पाया.लगातार वर्षा के कारण इल्लियां प्रायः पत्तियों को छोड़कर फूलों और प्राम्भिक फलियों को खाकर नुकसान पहुंचाती है.जिससे अफलन की स्थिति बनती है.जहाँ उचित रूप से कीट प्रबंधन हुआ वहां तुलनात्मक रूप से कम प्रकोप देखा गया.

Share On :

Follow us on

Subscribe Here

For More Articles

Releated Articles