फॉर्मिंग 3.0 किसानों की समृद्धि की आधारशिला

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अशोक शर्मा, एमडी एंड सीईओ, महिंद्रा एग्री साल्यूशंस

प्रौद्योगिकी ने हमारे जीवन को बदल दिया है। इसीलिए कार्यों को करने के तरीकों में भी बदलाव आ गया है। भारतीय कृषि में भी प्रौद्योगिकी का प्रभाव पड़ा है और पुरानी परम्परा भी प्रभावित हुई है। भारत की 60 प्रतिशत आबादी अपनी आजीविका के लिए कृषि और अन्य संबंधित गतिविधियों पर निर्भर है। 80 प्रतिशत किसान लघु और सीमान्त हैं। जिनके पास उत्पादन या प्रौद्योगिकी प्रसंस्करण अपनाने के लिए साधन नहीं है। उच्च किस्म के बीज, उर्वरक उपयोग नहीं करने और उपज के परिवहन, भण्डारण और वितरण की अपर्याप्त बुनियादी ढांचे से उपजी जटिलताओं से कृषि उत्पादन प्रभावित हुआ है। उपज के मूल्य में कमी से किसानों में निराशा है। इस दुष्चक्र को प्रौद्योगिकी को अपनाकर तोड़ा जा सकता है। किसानों में समृद्धि आ सकती है।

किसानों में स्मार्ट फोन के उपयोगी ऐप पर डिजिटल सलाहकार मौजूद हैं। ये ऐप किसानों को मौसम डेटा, पूर्वानुमान,मंडी की कीमतों आदि जैसी कई जरुरी जानकारी देने के अलावा एक दूसरे से चर्चा और विशेषज्ञों से परामर्श की सुविधा भी उपलब्ध कराते हैं। एक अन्य प्रौद्योगिकी केंद्रित पहल के तहत ट्रैक्टर और अन्य कृषि उपकरणों को खरीदने में पूंजी फंसाने के बजाय किराए पर उपलब्ध कराना भी है, जिसे किसानों द्वारा पसंद किया जा रहा है। इस कृषि यंत्रीकरण से अंतत: किसानों के उत्पादन स्तर और किसानों की समग्र आय में वृद्धि होगी। यह तो एक शुरुआत है।

अब तो समय ऐसी दुनिया की कल्पना करने का है, जहां ड्रोन, डेटा एकत्रित करने के लिए खेतों में उड़ान भरे, उपग्रह होने वाली खेती के लिए भूमि का रकबा मापें। स्मार्ट कृषि उपकरण मौसम, मिट्टी की स्थिति और फसल के लिए पानी जरूरत का आकलन करे। इससे दक्षता के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण शुद्धता अहम हो जाएगी। लागत में कमी लाते हुए उत्पादन को अधिकतम करना सम्भव होगा। मोबाईल ऐप  किसानों को नौकरशाही और बिचौलियों के चंगुल से बाहर करेंगे। आपूर्ति श्रृंखला छोटी होगी। इससे किसानों को उनकी उपज का पूर्ण और उचित मूल्य मिलेगा। उपभोक्ताओं के लिए भी कीमतों में गिरावट आएगी। यह बदलाव ही फॉर्मिंग 3.0 है। जिसमें भारत सक्रिय रूप से नवाचारों वाली अभिनव खेती की ओर बाधाओं के बावजूद आगे बढ़ रहा है। जिसमें सरकार के साथ ही निजी क्षेत्र भी किसानों और ग्राहकों की सेवा के लिए इस बदलाव का लाभ उठा रहे हैं। युवा उद्यमी नए स्टार्टअप और बिल्कुल नए विचारों के साथ आगे आकर अपने कार्य संचालन से पारम्परिक तरीकों को चुनौती दे रहे हैं। यह चरण सभी नवाचारों, डिजिटल व्यवस्था और गुणवत्तापूर्ण सटीक कृषि से जुड़ा है। मेरा मानना है कि प्रौद्योगिकी से प्रेरित समाधान किसान की आय को दुगना करने के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण कारक बन रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि स्वतंत्रता के तुरंत बाद शुरू हुई और साठ के दशक के मध्य तक चली फॉर्मिंग 1.0 की पहचान व्यापक भूमि सुधारों की वजह से हुई थी। 

1960 के दशक में शुरू हुए दूसरे चरण यानी फॉर्मिंग 2.0 का उद्देश्य भारत को आत्मनिर्भर और और खाद्य के मामले में सुरक्षित बनाना था। फॉर्मिंग 2.0  ने हमें बड़े ट्रैक्टर, बीज, नई किस्में और बेहतर सिंचाई सुविधाएं दीं, उसी तरह खाद्यान्न उत्पादन में आगे बढऩे वाली अगली छलांग सघन रूप से टिकाऊ खेती से सम्भव होगा। जिससे बड़े पैमाने पर अधिक दक्षता के साथ कम लागत में खेती करना शामिल है। कहने का आशय यह है कि गुणवत्तापूर्ण स्पष्ट तरीके से की गई खेती एक जरूरत बन जाएगी और इस क्रांति को लाने में प्रौद्योगिकी एक महत्वपूर्ण रूपांतरकारी भूमिका निभाने जा रही है।
 

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