कृषकों को सामयिक सलाह

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पन्ना। कृषि विज्ञान केन्द्र पन्ना के वैज्ञानिकों डॉ. आशीष त्रिपाठी, श्री रीतेश बागोरा ने गुनौर, पवई विकासखण्ड के विभिन्न ग्रामों का भ्रमण कर फसलों की स्थिति का जायजा लिया तथा कृषकों को निम्नानुसार सलाह दी।

  • सोयाबीन, उर्द आदि की फसल में सूखे की स्थिति में भूमि की नमी को संरक्षित करने के लिए डोरा/कुलपा चलायें तथा पलवार (मल्चिंग) का प्रयोग करें साथ ही सलाह है कि अधिक समय तक वर्षा न होने पर सुविधानुसार सिंचाई की व्यवस्था करें ।
  • खेतों में जल भराव की स्थिति होने पर तत्काल जल निकासी की व्यवस्था करें तथा फसल की बढ़वार कम होने की अवस्था में एनपीके 19/19/19 घुलनशील की 1 किग्रा मात्रा प्रति एकड़ के मान से 200 ली. पानी के साथ छिड़काव करें।
  • जहां पर सोयाबीन, उर्द की फसल 15-20 दिन की हो वहां खड़ी फसल में इमाझेथापर (1.0 ली./हे. - चौड़ी एवं सकरी पत्ती वाले खरपतवारों के लिए) का छिड़काव करें। जिन किसानों के खेतों में केवल सकरी पत्ती वाले खरपतवार की संख्या अधिक हो वहां तिल, उर्द, सोयाबीन में क्विजालोफाप इथाईल  (1.0 ली./हे.) या फेनाक्सीफॉप-पी-ईथाईल (0.75 ली./हे.) में से किसी एक का 500 ली. पानी के साथ फ्लड जेड या फ्लेट फेन नोझल (कट नोझल) का उपयोग कर समान रूप से खेत में छिड़काव करें।
  • उर्द, सोयाबीन में संकरी व चौड़ी पत्ती दोनों प्रकार के खरपतवार होने की दशा में पूर्व मिश्रित खरपतवारनाशी इमेजाथापर+इमिजामोक्स 40 मिली अथवा इमिजाथापर $ प्रोपाक्विजाफॉप 800 मिली प्रति एकड़ के मान से का छिड़काव करें।
  • उर्द में पीला मोजेक रोग का प्रकोप शुरू हो रहा है। नियंत्रण हेतु रोगग्रस्त पौधों को खेत में निकालकर नष्ट करें तथा सर्वांगी कीटनाशी इमिडाक्लोप्रिड 17.6 एस.एल. 60 मिली अथवा एसिटामिप्रिड 50 ग्राम प्रति एकड़ के मान से छिड़काव करें।
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