पुदीना की खेती से आई जीवन में खुशहाली

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कामयाब किसान की कहानी

इंदौर।  निर्धनता और बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहे खरगोन जिले के ग्राम नागझिरी के एक किसान श्री राजीव कुशवाह ने दो वर्ष पूर्व नवाचार के तहत जीरो बजट वाली पुदीना की जैविक खेती मात्र 800 वर्गफीट में शुरू की थी। इससे अब उनके जीवन में न केवल आर्थिक बदलाव आया है, बल्कि पुदीना की खेती ने उनके जीवन में भी खुशियों की खुशबू फैला दी है।

इस बारे में किसान श्री राजीव कुशवाह (42) ने कृषक जगत को बताया कि अंग्रेजी विषय में एमए करने के बाद भी जब स्थायी नौकरी नहीं मिली तो कोचिंग करके जीवनयापन करने लगे। लेकिन संघर्ष जारी रहा। फिर दो साल पहले अगस्त 2017 में संयुक्त परिवार की जमीन के छोटे से हिस्से मात्र 800 वर्गफीट में पुदीना की चौपाई की। हालांकि शुरुआती दौर में कठिनाइयां भी आईं, लेकिन लगे रहे। जैविक खेती को अपनाकर कम लागत और सीमित जगह में उत्पादन लेने के उद्देश्य से हरी सब्जियां भी उगाई। जिससे बहुत आर्थिक मदद मिली। श्री कुशवाह के अनुसार पुदीना की चौपाई का सही समय सितंबर से अक्टूबर अंत तक रहता है। पोदीना की खेती का बड़ा लाभ यह है कि इसकी गंध के कारण मवेशी इससे दूर रहते हैं, इसलिए सुरक्षा की चिंता नहीं रहती है। यदि उचित देखभाल की जाए तो एक बार लगाया पोदीना 5 साल तक उत्पादन दे सकता है।

जैविक मिश्रित तरल खाद - जैविक खेती के तहत श्री कुशवाह ने एक क्विंटल केंचुआ खाद के अलावा, धतूरा, नीम  का तेल, बेसन, गौ मूत्र, देसी गुड़, बरगद के पेड़ के नीचे की मिट्टी और अनेक वृक्षों की पत्तियों से निर्मित इस तरल खाद का फसल में 15  दिन के अंतराल से लगातार छिड़काव किया जा रहा है। साथ ही जल संरक्षण के अंतर्गत वर्षा जल को संग्रहित करने के लिए खेत के करीब एक छोटी तलैया भी बनाई है, जहां पोदीना और सब्जियों की सिंचाई के बाद बचे जल को छोटी नाली के जरिए तलैया में एकत्रित किया जा रहा है।

श्री कुशवाह द्वारा पुदीना और बैंगन रोज खरगोन मंडी में बेचा जा रहा है, जबकि अन्य सब्जियां कद्दू , लौकी, हरी चवली और करेले भी आकार लेने लगे हैं। वे अब तक 2 लाख रुपए का पोदीना बेच चुके हैं। पोदीना की मांग को देखते हुए इसका रकबा दुगुना करने का विचार है। फिलहाल बाजार में पोदीना 60-100  रुपए प्रति किलो बिक रहा है। पोदीना की उपज का उचित दाम मिलने से इनके जीवन में खुशहाली आ गई है। इनकी सफलता को देखकर दूरदराज के अन्य किसान भी यहां जानकारी लेने आ रहे हैं और पुदीना के रोपे ले जाकर इसकी खेती करने लगे हैं।

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