सोयाबीन कृषकों को सलाह

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इंदौर। भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर द्वारा कृषकों को निम्नांकित उपयोगी सलाह दी गई है।

सोयाबीन में एन्थ्रेक्नोज, एरियल ब्लाईट एवं चारकोल रॉट बीमारी यदि हो तो टेबुकोनाझोल 625 मिली /हे. अथवा टेबुकोनाझोल+सल्फर 1  किग्रा./हे. अथवा हेक्जाकोनाझोल 500 मिली/हे. अथवा पायरोक्लोस्ट्रोबिन 500 ग्राम/हे.  को 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। जहां सोयाबीन की बोवनी देर से हुई है एवं 20 -25 दिन की फसल पर इल्लियों का प्रकोप शुरू हुआ है तो वहां पर क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 18.5 एससी 150 मिली/हे. की दर से छिड़काव करने पर लम्बी अवधि तक इल्लियों का प्रकोप कम किया जा सकता है।

बाद की अवस्था में पत्ती खाने वाली इल्लियों के प्रबंधन हेतु निम्न में से कोई एक अनुशंसित कीटनाशक   क्विनालफॉस 25 ईसी (1500 मिली /हे.) अथवा इंडोक्साकार्ब 14.5 एससी (300 मिली/हे.) अथवा फ्लूबेन्डियामाइड 39.35 एससी (150 मिली/ हे.)अथवा फ्लूबेन्डियामाइड 20 डब्ल्यूजी (250 से 300  मिली/हे.) अथवा स्पायनोटेरम 11.7 एससी (450 मिली/हे.) का छिड़काव करें। जिन स्थानों पर गर्डल बीटल का प्रकोप शुरू हो गया हो वहां पर थाईक्लोप्रिड 21.7 एससी 650  मिली/हे. अथवा प्रोफेनोफॉस 50 ईसी (125 मिली/हे.) या ट्राइजोफॉस 40 ईसी (800 मिली/हे.) की दर से छिड़काव करें। पत्ती खाने वाली इल्लियों और सफेद मक्खी पर नियंत्रण पाने के लिए पूर्व मिश्रित कीटनाशक बीटासाइफ्लूथ्रिन+इमिडाक्लोप्रिड 350 मिली/हे. अथवा थायोमिथाक्सम+लेम्बडा सायहेलोथ्रिन 125 मिली/हे.  की दर से छिड़काव करने से तना मक्खी भी नियंत्रित होगी। 

पीला मोजाइक बीमारी को फैलाने वाली सफेद मक्खी के प्रबंधन के लिए खेत में यलो स्टीकी का प्रयोग करें, ताकि मक्खी के वयस्क नष्ट किए जा सकें। पीला मोजाइक रोग से ग्रसित पौधों/अवशेषों को खेत से निकालकर नष्ट कर दें। रोग की तीव्रता अधिक होने पर थायोमिथाक्सम 25 डब्ल्यूजी (100 ग्राम/500 लीटर पानी) का छिड़काव करें। सोयाबीन फसल में प्रकाश जाल/फेरोमोन ट्रैप लगाएं,  ताकि कीटों की जानकारी के साथ उनके प्रबंधन में सहायता मिल सके। बीज उत्पादन के लिए उगाई जाने वाली अन्य किस्मों के पौधों का निष्कासन करें, ताकि बीज की शुद्धता बनी रहे। लगातार होने वाली वर्षा के जल भराव की स्थिति होने पर अतिरिक्त पानी के निकास के लिए नालियों की व्यवस्था करें। सोयाबीन की फसल में चूहों से नुकसान की जानकारी मिल रही है। चूहे के प्रबंधन हेतु आटे/ज्वार के बीज को जिंक फास्फाईड पावडर के साथ मिलाकर अथवा बाजार में उपलब्ध एंटी - कोआगुलेंट बिस्कुट का प्रयोग करें।  

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