UNFAO और स्वामीनाथन फाउंडेशन साथ मिलकर एक स्वस्थ, बेहतर भविष्य के लिए काम करेंगे

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कृषि की हरित क्रांति को दुनिया के लिए पौष्टिक और सुरक्षित आहार टिकाऊ ढंग से उपलब्ध कराते रहने के लिए जलवायु विज्ञान और नवाचार को मजबूत करने पर नए सिरे से ध्यान देते हुए विकसित होते रहना होगा। 

07/08/2019, चेन्नेई- संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन ने आज कहा कि विश्व के सबसे बड़े क्षेत्र एशिया प्रशान्त में खेती की पैदावार का कायाकल्प  करने वाली हरित क्रांति जीवन्त है और सही ढंग से चल रही है, किन्तु उसे जलवायु परिवर्तन संवेदी नवाचार और टैक्नॉिलॉजी को अपनाने के नए साधन तलाशने होंगे ताकि पौष्टिक तत्वों की कमी वाले विश्व की बढ़ती जटिल मांगों को टिकाऊ ढंग से पूरा किया जा सके। 

यह आग्रह एम. एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन की विकास संबंधी उपलब्धियों के 30 वर्ष पूरे होने पर आयोजित विशेष बैठक के दौरान किया गया। यह फाउंडेशन अपने संरक्षक और दूर-दृष्टा युग प्रवर्तक वैज्ञानिक एम. एस. स्वामीनाथन के उत्कृष्ट नेतृत्व में दशकों से भूख, कुपोषण और गरीबी से संघर्ष में वैज्ञानिक अनुसंधान का उपयोग करता रहा है। 

प्रोफेसर स्वामीनाथन न केवल हरित क्रांति के एक प्रणयेता थे बल्कि ऐसे दूर-दृष्टा वैज्ञानिक थे, जिन्होंने दूसरों से बहुत पहले सतत् विकास की महत्व्पूर्ण अवधारणा को अपनाया था। वे 1960 के दशक के उत्तरार्द्ध से ही टिकाऊ खेती के महत्व् पर बल देते रहे। 

खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) की अपर महानिदेशक एवं एशिया प्रशान्त  के लिए क्षेत्रीय प्रतिनिधि कुनधावी कादिरसन ने बैठक में कहा, ''विश्व और वास्त्व में इस एशिया प्रशान्त क्षेत्र ने डॉ. स्वामीनाथन और उनके नाम पर गठित रिसर्च फाउंडेशन के काम से बहुत कुछ सीखा है। हम उनके बहुत आभारी हैं क्योंकि उनके प्रयासों से दशकों से खाद्य उत्पा्दन बढ़ा है तथा भूख और गरीबी में कमी आई है। विश्व की बढ़ती आबादी को पौष्टिक आहार देने के लिए हमें खेती, जैव-विविधता और जलवायु परिवर्तन के बीच परस्पर निर्भर संबंधों पर गौर करना होगा। हमें विज्ञान, टैक्नॉवलॉजी और नवाचार के, समान नीतियों और कार्य कुशलताओं के सामर्थ्यकारी कारकों पर साझेदारी और निवेश के माध्येम से विचार करना होगा, महिलाओं और युवाओं को सशक्त करना होगा जिससे खेती की व्यावहारिकता बढ़ायी जा सके।''

क्रांति से उदभव-जलवायु संवेदी खेती, टैक्नॉिलॉजी और नवाचार के माध्यम से जैव-विविधता का संरक्षण एवं भुखमरी समाप्त करना 

खाद्य उत्पाादन बढ़ाने में हरित क्रांति की प्रमुख भूमिका रही है। किन्तु इसमें एक फसल उपज और बहुत अधिक तथा कई बार आवश्यकता से अधिक रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग के कारण इतने वर्षों में मिट्टी का क्षय हुआ है, जल प्रदूषण हुआ है और जैव-विविधता को क्षति पहुंची है। 

खाद्य प्रणालियों को चुस्त करते हुए टिकाऊ ढंग से खाद्य उत्पादन बढ़ाने के लिए खाद्य एवं कृषि संगठन ने सर्व सुलभ डिजिटल और डाटा सघन टैक्नॉलॉजी का अधिक से अधिक उपयोग करने और दायरा बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया है, ताकि यह टैक्नॉलॉजी छोटे किसानों,मछुआरों और वानिकी करने वालों को आसानी से सुलभ हो। टिकाऊ खेती के अंतर्गत केवल डाटा का सघन उपयोग होना चाहिए, उर्वरक, रसायनों या पानी जैसी सामग्री का उपयोग कम से कम होना चाहिए तथा एक साथ कई फसलें लगाने, फसलों की अदला-बदली, कम जुताई और समन्वित कीट प्रबंधन जैसी जांची-परखी तकनीकों का उपयोग होना चाहिए। 

फसल और मवेशी प्रणालियों के तात्कालिक प्रबंधन के लिए खेतों में सेंसर लगाने से लेकर अधिक लक्षित और कारगर पोषक तत्व प्रबंधन विधियों के लिए मिट्टी में पोषण स्तर मापने जैसे कई उदाहरण हमारे सामने मौजूद हैं। पानी के अधिक कारगार उपयोग के लिए मिट्टी की नमी जैसी पर्यावरणीय परिस्थितियों की निगरानी के लिए वायरलैस सेंसर के उपयोग और मौसम की निगरानी के लिए डिजिटल टैक्नॉलॉजी के उपयोग तथा पहले से चेतावनी देने की सेवाएं प्रदान करने जैसे कई महत्वपूर्ण साधन उपलब्ध हैं जो किसानों की चुनौतियां सहने की क्षमता बढ़ाते हैं। 

सुश्री कादिरेसन ने कहा, ''बढ़ती असमानता, जनसंख्या  की बदलती संरचना, बढ़ते शहरीकरण एवं बदलते जलवायु जैसे वैश्विक रुझानों ने वैश्विक चुनौती खड़ी कर दी है।'' हमें जैव-विविधता को क्षति और जलवायु परिवर्तन से पर्यावरण को बचाते हुए हमें खाद्य उत्पाादन बढ़ाना होगा। हमें स्वामीनाथन फाउंडेशन के साथ जुड़कर अधिक स्वस्थ. अधिक समानता पर आधारित, टिकाऊ और जलवायु परिवर्तन सहने में सक्षम भविष्य की ओर बढ़ने में बहुत प्रसन्नता हो रही है।''

2030 तक विश्व के सतत् विकास लक्ष्य हासिल करने में मदद देने के लिए खाद्य एवं कृषि संगठन ऐसी समावेशी और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए कृतसंकल्प है, जो स्वास्थ खुराक दे सके, जो जलवायु परिवर्तन के झटकों को सह सके और जैव-विविधता के संरक्षण में योगदान कर सके। हाल ही में खाद्य एवं कृषि संगठन ने एक बायो-डाइवर्सिटी मेन स्ट्रीमिंग प्लेयटफॉर्म शुरू किया है और जैव-विविधता को सभी कृषि क्षेत्रों की मुख्यकधारा से जोड़ने की रणनीति तैयार कर रहा है। 
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें : Allan.Dow@fao.org

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