जल संचय ही जल निर्माण

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water-harvesting

वर्षा जल संचयन तकनीकों का उपयोग हमारे देश व राज्य के लिए प्रत्यक्ष रूप से उपयोगी है क्योंकि यह नगरपालिका और सार्वजनिक जल आपूर्ति की मांग को कम करता है साथ ही यह वर्षा जल अपवाह, मृदाक्षरण और सतह जल के सम्मिश्रण को भी कम करता है। यूनाइटेड स्टेट्स एनवायर्नमेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी (यूएर्सईपीए) के अनुसार, कुल घरेलू पानी का 50 से 70 प्रतिशत (सार्वजनिक पेयजल के लिए यूएसईपीए नियमानुसार) सिंचाई और अन्य बाहरी गतिविधियों के लिए उपयोग किया जाता है एवं इस जल को संग्रहित वर्षा जल से बदल कर इसे उपयोगी जल स्त्रोत का निर्माण किया जा सकता है, जो कि व्यक्तिगत पानी की मांग को कम करता है और सार्वजनिक जल आपूर्ति पर समग्र मांग घट जाती है। वर्षा जल संचयन भरी वर्षा जल के अपवाह को कम कर तथा जमीन में प्रवाहित करके जल आपूर्ति भण्डार को बढ़ाते हंै एवं बाढ़ और मृदा क्षरण में भी मदद करता है, यह वर्षा अपवाह में तलछट, उर्वरक और कीटनाशकों के साथ सतही जल के प्रदूषण को कम करने में भी मदद करता है।

स्थानीय पर्यावरणीय परिस्थितियों के आधार पर वर्षा जल संचयन अनुपूरक या वैकल्पिक जल आपूर्ति प्रदान कर सकता है या यह एकमात्र आपूर्ति हो सकता है। जैसा कि शहरी क्षेत्रों में अक्सर होता है। उदाहरण के लिए भारत में कई शहरों नई दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बैंगलोर, हैदराबाद और इंदौर जैसे नगर निगमों के लिए छत पर वर्षा जल संग्रहण को अनिवार्य बना दिया है।

छत जल संचयन का प्रत्यक्ष भंडारण (आरडब्ल्यूएच) - प्राय: छत वाले क्षेत्र में वर्षा का जल पाइप के माध्यम से नीचे लाया जाता है, फिर इस जल को फिल्टर (छन्नी) के माध्यम से प्रवाह करके एक उचित भण्डारण (जैसे सम्प्स या रेन बैरल) में खपत के लिए संग्रहित किया जाता है।

वर्षा जल संचयन एक वैकल्पिक जल आपूर्ति दृष्टिकोण है, जो  वर्षा जल को बाद में उपयोग के लिए अधिग्रहित कर उपयुक्त दिशा देकर संग्रहित करता है। अधिग्रहित वर्षा जल का उपयोग अक्सर पीने योग्य पानी के स्रोत के रूप में किया जाता है। एक अन्य लोकप्रिय उपयोग वन्यजीवों, पालतू जानवरों और पशुओं के लिए पानी को प्रदान करने के लिए है। वर्षा जल का उपयोग भूमिगत जल निर्माण के लिए भी किया जाता है, क्योंकि पानी लवण और अन्य हानिकारक खनिजों से मुक्त होता है। वर्षा जल को उन रसायनों के साथ उपचारित नहीं करना पड़ता है जो अधिकांश गैर-पीने योग्य पानी के उपयोग के लिए अवशिष्ट प्रभाव रखते हैं। 

छत से प्राप्त वर्षा जल संचयन (रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग)- यह वह तकनीक है जिसके जरिए बारिश के पानी को छत जल ग्रहण से एकत्रित करके जलाशयों में संग्रहित किया जाता है। संग्रहित जल को कृत्रिम जल संचयन तकनीकों के माध्यम से उपसतही भूजल भण्डार में संग्रहित कर सकते हंै तथा इसके माध्यम से घरेलू जरूरतों को पूरा किया जा सकता है।

टैंकों में भंडारण के माध्यम से घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए कृत्रिम जल प्रभार तकनीकों को अपनाकर वर्षा आधारित जलकुण्ड को उपसतही भूजल भंडार में संग्रहित किया जाना चाहिए। वर्षाजल का संग्रहण और भंडारण  विशेष रूप से पहाड़ी, शहरी और तटीय क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है।

टैंक में भंडारण- फिल्टर किए गए वर्षा जल को एकत्रित करने और भंडारित करने के  लिए वर्षा जल भंडारण टैंकों का उपयोग किया जाता है। इन टैंकों का निर्माण जमीन के ऊपर एक मंच पर या भूमिगत संप के रूप में किया जा सकता है। बैक्टीरिया को बढऩे से रोकने के लिए एवं पानी को ठंडा रखने के लिए टैंक को अंदर से सफेद रंग से रंगा जाता है। टैंक की  नियमित रूप  से सफाई करें। टैंक को स्थायी रूप से ढंके रहें और शैवाल या जीवाणुओं (बैक्टीरिया) के विकास एवं  और ममोसिटिटो और धूल की घुसपैठ को रोकने के लिए सील करें। टैंक को स्टील या कांक्रीट के ढक्कन से ढंककर रखें, और छोटे-छोटे दरारों को सीमेंट अथवा कांक्रीट से सील करें। लीक के मामले में, तत्काल अभियंता को समस्या को हल करने के लिए लायें।

  • भंडारण टैंक संदूषण के स्रोत के करीब नहीं हो, जैसे कि सेप्टिक टैंक आदि।
  • भंडारण टैंक छत से निचले स्तर पर स्थित हो ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह पूरी तरह से भर जाता है।
  • वर्षा जल प्रणाली में एक अतिप्रवाह पाइप लगायें जो गैर-बाढ़ क्षेत्र में खाली हो। अतिरिक्त पानी का उपयोग खोदे हुए कुएं या सूखे हुए हैंडपंप या ट्यूबवेल आदि के माध्यम से भूजल भण्डार (एक्वीफर) को रिचार्ज करने के लिए भी किया जा सकता है।
  • फिल्टर में इनलेट पाइप के नीचे एक गति अवरोधक प्लेट प्रदान की जानी चाहिए ताकि फिल्टरिंग सामग्री में कोई व्यवधान उत्पन्न न हो।
  • भंडारण टैंक सफाई के लिए सुलभ हो।
  • भण्डारण टैंक में इनलेट पाइप को इस तरह से जांचा जाये कि इन्हें नियमित रूप से साफ किया जा सके।
  • क्लोरीनीकरण या उबालने आदि द्वारा पीने के लिए उपयोग में लाये जाने वाले पानी को नियमित रूप से कीटाणुरहित किया जा सकता है।

टैंक की धारण क्षमता - यह शुष्क अवधि पर आधारित है, अर्थात्, लगातार दो वर्षा ऋतु के बीच की अवधि। उदाहरण के लिए, मानसून के चार महीनों में विस्तार के साथ, शुष्क मौसम 245 दिनों का होता है।

सुरक्षा कारक के रूप में, टैंक को आवश्यकता से 20 प्रतिशत बड़ा होना चाहिए, अर्थात् 14,700 लीटर। यह टैंक शुष्क अवधि के लिए 5 सदस्यीय परिवार की बुनियादी पेयजल आवश्यकता को पूरा कर सकता है। उपसतह (अंडरग्राउंड) में निर्मित एक आयताकार टैंक का विशिष्ट आकार लगभग 4& 4&1 मीटर होगा।

  • योगेश राजवाड़े
  • मलखान सिंह जाटव 
  • नीलेन्द्र सिंह वर्मा
  • सिरिशा अडमाला

    भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान
    नबीबाग, बैरसिया रोड, भोपाल 
    rajwadeyogesh@gmail.com

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