किसान देश में क्यों घटे ?

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कृषि प्रधान भारत में खेती करने वालों की संख्या घटती जा रही है। सरकार ने गत सप्ताह संसद में देश में कृषकों की गिनती बताते हुए स्वीकार किया कि 2001 में किसानों की संख्या 127.3 मिलियन थी, वहीं 2011 में घटकर 118.8 मिलियन रह गई है। देश के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने संसद में ये भी बताया कि कृषि को आकर्षक और अधिक लाभकारी बनाने के लिए सरकार की सतरंगी योजनाएं हैं। इसमें अन्य योजनाओं के साथ प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, ई-नाम याने राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और कई योजनाएं गिनाई गई। परंतु इन सारी सरकारी कवायदों के बावजूद किसान और उसकी युवा पीढ़ी का खेती से पलायन जारी है जो घटती संख्या के दर्पण में स्पष्ट है। नेशनल सेंपल सर्वे आर्गनाइजेशन के मुताबिक वर्ष 2012-13 में किसान परिवार की आय 77,112 रु. प्रति वर्ष थी। वर्ष 1970 में देश में कृषि जोत का औसत आकार 2.28 हेक्टेयर था जो वर्ष 2016 में घटकर 1.08 हेक्टेयर रह गया। लगभग 45 वर्षों में जोत के औसत रकबे में 50 प्रतिशत की कटौती हो गई। हालांकि इस विखंडन में प्रमुख कारण बढ़ती आबादी ही है। इसी संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक देश में वर्तमान में 13 करोड़ 80 लाख हेक्टेयर खेती के रकबे में से 85 प्रतिशत लघु और सीमांत है, जबकि 1960-61 में यह आंकड़ा केवल 62 प्रतिशत ही था। लघु कृषक 1.42 हेक्टेयर और सीमांत किसान 0.24 हेक्टेयर में सिमट कर रह गया है। गत 50 वर्षों में जमीन के पीढ़ी-दर पीढ़ी हो रहे बंटवारे के बाद छोटे और सीमांत किसानों की संख्या 19 प्रतिशत से बढ़कर 45 प्रतिशत हो गई है। खेती किसानों की युवा पीढ़ी के लिए आकर्षक बनी रहे, इसके लिए सरकार को कुछ अतिरिक्त प्रयास करना होंगे।

छोटे किसानों की आर्थिक क्षमता इतनी नहीं कि वे खेती में प्रयोग के लिए आधुनिक तकनीक कृषि यंत्रों और संसाधन में निवेश कर सकें। जीएम फसलों की अनुमति पर सरकार कोई फैसला नहीं कर पाई है। वहीं किसान अधिक मुनाफा कमाने की प्रत्याशा में जुगाड़ कर जीएम फसल ले रहा है। उर्वरक अनुदान, बीज अनुदान, कर्ज माफी जैसी लोक लुभावन स्कीमों के बावजूद किसान की हालत जस की तस है। अच्छी भंडारण व्यवस्था के अभाव में तथा बेतुकी आयात नीतियों, असंगत व्यापार नीति के चलते बाजार में भावों का उतार-चढ़ाव भी कृषि परिदृश्य को प्रभावित करता है। किसान को खेती से जोड़े रखने के लिए सरकार को अनेक प्रयास करना होंगे, योजनाओं को जमीन पर उतारना होगा तो सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।

सरकार द्वारा भंडारण सुविधाओं में बढ़ौत्री, फसल प्रसंस्करण को प्रोत्साहन, समय पर खरीदी, गांवों में बुनियादी सुविधाओं की मजबूती, किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य समय पर मिले तो ही किसान खेती से पीढ़ी दर पीढ़ी जुड़ा रहेगा, अन्यथा उसका मोह शनै: शनै: भंग हो रहा है।

सुनील गंगराड़े

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