मिट्टी परीक्षण करवाएं फसलोत्पादन बढ़ाएं

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मिट्टी परीक्षण क्या है ? - खेत की मिट्टी में पौधों की समुचित वृद्धि एवं विकास हेतु आवश्यक पोषक तत्वों की उपलब्ध मात्राओं का रसायनिक परीक्षणों द्वारा आकलन करना, साथ ही विभिन्न मृदा विकार जैसे मृदा - लवणीयता, क्षारीयता एवं अम्लीयता की जांच करना मिट्टी परीक्षण कहलाता है।

मिट्टी परीक्षण की आवश्यकता - पौधों की समुचित वृद्धि एवं विकास के लिये सामान्य रूप से सत्रह  पोषक तत्व अनिवार्य होते हैं। कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नत्रजन, फास्फोरस, पोटाश, कैल्शियम, मैग्निशियम एवं सल्फर (मुख्य या अधिक मात्रा में लगने वाले आवश्यक पोषक तत्व)। इन पोषक तत्वों में से प्रथम तीन तत्वों को पौधे प्राय: वायु व पानी से प्राप्त करते हंै तथा शेष 14 पोषक तत्वों के लिये ये भूमि पर निर्भर होते है। सामान्यत: ये सभी पोषक तत्व भूमि में प्राकृतिक रूप से उपलब्ध रहते है, परन्तु खेत में लगातार फसल लेते रहने के कारण मिट्टी से इन सभी आवश्यक तत्वों का हस निरंतर हो रहा है। असंतुलित पौध पोषण की दशा में फसलों की वृद्धि समुचित नहीं हो पाती तथा पौधों के कमजोर होने एवं रोग व्याधि, कीट आदि से ग्रसित होने की सम्भावना अधिक रहती है। परिणामस्वरूप फसल उत्पादन कम होता है इसके अतिरिक्त उर्वरक भी काफी महंगे होते जा रहे है। अत: इन पोषक तत्वों को खेत में आवश्यकतानुरूप ही उपयोग करें जिससे खेती लाभदायक बन सके। खेतों में उर्वरक डालने की सही मात्रा की जानकारी मिट्टी परीक्षण द्वारा ही प्राप्त की जा सकती है। 

मिट्टी परीक्षण के उद्देश्य 

  • मिट्टी में पोषक तत्वों के स्तर की जांच करके फसल एवं किस्म के अनुसार पोषक तत्वों की संतुलित मात्रा का निर्धारण कर खेत में खाद एवं उर्वरक मात्रा की सिफारिश हेतु।
  • मृदा अम्लीयता, लवणीयता एवं क्षारीयता की पहचान एवं सुधार हेतु सुधारकों की मात्रा व प्रकार की सिफारिश कर इन जमीनों को कृषि योग्य बनाने हेतु महत्वपूर्ण सलाह एवं सुझाव देना।
  • फल के बाग लगाने के लिये भूमि की उपयुक्तता का पता लगाना।
  • मृदा उर्वरता मानचित्र तैयार करने के लिये। यह मानचित्र विभिन्न फसल उत्पादन योजना निर्धारण के लिये महत्वपूर्ण होता है तथा क्षेत्र विशेष में उर्वरक उपयोग संबंधी जानकारी देता है।

मिट्टी का नमूना एकत्र करना - मिट्टी परीक्षण के लिये सबसे महत्वपूर्ण, मिट्टी का सही नमूना एकत्र करना होता है। इसके लिये जरूरी होता है कि नमूना इस प्रकार लिया जाये कि वह जिस खेत या क्षेत्र से लिया गया हो उसका पूर्ण प्रतिनिधित्व करता हो। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु मिट्टी के प्रतिनिधि नमूने एकत्र किये जाते हैं। 

प्रतिनिधि नमूना लेने के लिये ध्यान देने योग्य बातें -

  • नमूना लेने से पूर्व खेत में ली गई फसल की बढ़वार एक ही रही हो।
  • उसमें एक समान उर्वरक उपयोग किये गये हों।
  • जमीन समतल व एक ही हो तो ऐसी स्थिति में पूरे खेत से एक ही संयुक्त या प्रतिनिधि नमूना ले सकते है।

प्रतिनिधि नमूना एकत्रीकरण विधि-

  • जिस खेत में नमूना लेना हो उसमें जिग-जैग प्रकार से घूमकर10-15 स्थानों पर निशान बना लें जिससे खेत के सभी हिस्से उसमें शामिल हो सकें।
  • चुने गये स्थानों पर ऊपरी सतह से घास-फूस, कूड़ा करकट आदि हटा दें।
  • इन सभी स्थानों पर 15 सेमी (6-9 इंच) गहरा आकार का गड्ढा खोदें। गड्ढे को साफ कर खुरपी से एक तरफ ऊपर से नीचे तक 2 सेमी मोटी मिट्टी की तह को निकाल लें तथा साफ बाल्टी या ट्रे में डाल लें।
  • एकत्रित की गई मिट्टी को हाथ से अच्छी तरह मिला लें तथा साफ कपड़े पर डालकर गोल ढेर बना लें। अंगुली से ढेर को चार बराबर भागों में बांटकर दो भागों की मिट्टी अलग हटा दें। अब शेष दो भागों की मिट्टी पुन: अच्छी तरह से मिला लें व गोल बनायें। यह प्रक्रिया तब तक दोहरायें जब तक लगभग आधा किलो मिट्टी शेष रह जाये। यही प्रतिनिधि नमूना होगा।
  • सूखे मिट्टी नमूने को साफ प्लास्टिक थैली में रखें तथा इसे एक कपड़े की थैली में डाल दें। नमूने के साथ एक सूचना पत्रक जिस पर समस्त जानकारी लिखी हो एक प्लास्टिक की थैली में अंदर तथा एक कपड़े की थैली के बाहर बांध देंं।
  • अब इन तैयार नमूनों को मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला भेजें।

इसके विपरीत यदि खेत में अलग-अलग फसल ली गई हो, भिन्न-भिन्न भागों में अलग-अलग उर्वरक मात्रा डाली गई हो, फसल बढ़वार कहीं कम, कहीं ज्यादा रही हो, जमीन समतल न होकर ढालू हो, तो इन परिस्थितियों में खेत के समान गुणों वाली संभव इकाईयों में बांटकर हर इकाई से अलग - अलग प्रतिनिधि नमूना लेें। नमूना सामान्यत: फसल बोने के एक माह पहले लेकर परीक्षण हेतु भेजें ताकि समय पर परिणाम प्राप्त हो जायें एवं सिफारिश के अनुसार खाद उर्वरकों का उपयोग किया जा सके।

नमूना एकत्रीकरण हेतु आवश्यक सामग्री - खुरपी, फावड़ा, बाल्टी या ट्रे, कपड़े एवं प्लास्टिक की थैलियां, पेन, धागा, सूचना पत्रक, कार्ड आदि।

 मिट्टी जांच संबंधी सूचना पत्रक - निम्न जानकारी लिखा हुआ सूचना पत्रक नमूनों के साथ रखें एवं इसे मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला भेजें।  

विशिष्ट परिस्थितियों हेतु नमूना एकत्रीकरण - लवण प्रभावित भूमि से मिट्टी नमूना लेने के लिये 90 सेमी गहरा गड्ढा खोदकर एक तरफ से सपाट कर लें। फिर वहा से उपर से नीचे की ओर 0-15 सेमी, 15-30 सेमी, 30-60 सेमी एवं 60 से 90 सेमी की परतों से आधा-आधा किलो मिट्टी खुरच कर अलग-अलग थैलियों में रखकर व परतों की गहराई लिखकर सूचना पत्रक में स्थान का भू-जल स्तर, सिंचाई का स्त्रोत आदि जानकारी भी लिखकर मिट्टी नमूनों को प्रयोगशाला में परीक्षण हेतु भेजें। फलदार पौधे लगाने के लिये 2 मी. तक नमूना लें क्योंकि वृक्ष जमीन की गहराई की परतों से अपना पोषण प्राप्त करते हंै। साथ ही जमीन में कैल्शियम, कार्बोनेट की मात्रा फलदार पौधों की बढ़वार के लिये महत्वपूर्ण होती है। 2 मी. के गड्ढे में एक तरफ सपाट करके 15,30,60,90,120,150 एवं 180 से.मी. की गहराई पर निशान बनाकर अलग-अलग परतों से अलग- अलग मिट्टी नमूना (1/2 किलो) एकत्र करें। सूचना पत्रक में अन्य जानकारियों के साथ परतों की गहराई भी लिखें। इस प्रकार तैयार नमूनों को परीक्षण हेतु प्रयोगशाला भेजें।

नमूना एकत्रीकरण के समय सावधानियां

  • जहां खाद का ढेर रहा हो वहां से नमूना न लें।
  • पेड़ों, मेढ़ों, रास्तों के पास से नमूना न लें।
  • साफ औजारों (जंग रहित) तथा साफ थैलियों का उपयोग करें।
  • नमूनों के साथ सूचना पत्रक रखें।    

मिट्टी नमूना का प्रयोगशाला में विश्लेषण एवं परिणाम - प्रयोगशाला में सामान्यत: मिट्टी परीक्षण कार्बनिक कार्बन, मृदा पीएच मान (अम्लीयता, क्षारीयता, उदासीनता आदि) वैद्युत चालकता, उपलब्ध नत्रजन, फॉस्फोरस, पोटाश एवं सूक्ष्म तत्व आदि का स्तर जानने के लिये किये जाते है तथा प्राप्त परिणामों के आधार पर पोषक तत्वों के निम्न स्तर (कमी) मध्यम स्तर (पर्याप्त) एवं उच्च स्तर (अधिकता) के हिसाब से आगे बोयी जाने वाली फसल के लिये उर्वरक एवं खाद को दी जाने वाली मात्राओं की सिफारिश की जाती है। इस आधार पर कृषक, उर्वरकों का सार्थक उपयोग कर अच्छी फसल उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं तथा उर्वरकों पर खर्च किये गये पैसों का समुचित उपयोग कर सकते है। सूक्ष्म पोषक तत्वों के विश्लेषण हेतु नमूना सावधानीपूर्वक एकत्रित करें तथा विशिष्ट रूप से यह अंकित कर भेजें कि मृदा में सूक्ष्म तत्वों का परीक्षण भी चाहते हैं।

  • रोहित कुमार पाटीदार, सहायक प्रबंधक,
  • कृषि विकास प्रयोगशाला,
  • चम्बल फर्टि. एंड केमि. लि., आगरा

Email: rohitkumar.patidar@chambal.in

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