घरों में सजायें रंग-बिरंगी मछलियां

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एक्वेरियम क्या है ?

मछलीघर याने एक्वेरियम कांच से बना एक छोटा सा जलाशय है जिसमें मछली व अन्य जलीय जीवों को जीवित अवस्था में प्रदर्शित किया जाता है। पूर्व में लोहे या एल्यूमिनियम फ्रेम में सेट किये हुए कांच में एक्वेरियम बनते थे, परन्तु आज-कल सिलिका पेस्ट से कांच के किनारों को जोड़कर एक्वेरियम का निर्माण किया जाता है जिससे दृश्य और भी लुभावना व साफ दिखाई देता है।

एक्वेरियम का आकार एवं नाप

एक्वेरियम रखने की जगह को ध्यान में रखते हुए व सुविधानुसार, इनका आकार एवं नाप निर्धारित किया जाता है, ये आकार में गोलाकार, वर्गाकार अथवा आयताकार होते हैं। सामान्यत: ऐसे आयाताकार एक्वेरियम का चलन अधिक है जिसमें चौड़ाई एवं ऊंचाई लगभग बराबर होती है, ऊपर की सतह खुली होना चाहिए व जालीदार कवर लगाकर रखना चाहिए जिससे श्वसन के लिए हवा पानी के सम्पर्क में रहे। 

रंगबिरंगी, सुंदर, धारियों वाली अथवा शोख रंग की लुभावने आकार की मछलियों को सजावटी मछली कहते हैं। सजावटी मछलियां घर की आंतरिक सजावट का एक प्रमुख अवयव हो गयी है। बड़े-बड़े शहरों के ऑंफिसों, होटलों व घरों के बैठक कमरे आदि में एक्वेरियम में रखी हुई रंग-बिरंगी मछलियों की हलचल विशेष रूप से ध्यान आकर्षित करती है,। एक्वेरियम एक उद्योग का रूप लेता जा रहा है, इसमें मछली को प्राकृतिक एवं सहज वातावरण में रखने का प्रयास किया जाता है। अपनी रचनात्मक्ता व रूचि अनुसार एक अनूठा संसार विकसित किया जाता है जिसमें अनेक दुर्लभ और आकर्षक मीठे पानी व समुद्री मछलियों को जीवित अवस्था में रखा जा सकता है। आज कल स्वास्थ्य की दृष्टि से भी एक्वेरियम घरों में रखे जाते हैं, क्योंकि मछलियों को देखते रहने से तनाव दूर होता है व बच्चो एवं वृद्धों दोनों का मनोरंजन होता हैं।

एक्वेरियम रखने का स्थान

एक्वेरियम ऐसे स्थान पर रखें जहां सूर्य की सीधी रोशनी न पड़े क्योंकि वह नुकसानदायक होती है। एक्वेरियम को हवादार स्थान पर कृत्रिम रोशनी में भी स्टेण्ड पर रखा जा सकता है।

साज-सजावट

एक्वेरियम की तली में धुली हुई साफ रेत या छोटे-छोटे रंग बिरंगे कंकड़ बिछाते हैं अलग अलग आकार के चमकीले एवं रंगबिरंगे पत्थर भी बहुतायत से उपयोग किये जाते हैं। प्राकृतिक रूप देने के लिए जलीय पौधे भी एक्वेरियम में रखते है। जलीय पौधे प्राकृतिक छटा बिखरने के साथ-साथ छोटी-छोटी मछलियों को आश्रय देते हैं व आक्सीजन देने का कार्य भी करते है। 

एक्वेरियम में पानी के गुण

तापक्रम - एक्वेरियम में 21 से 30 डिग्री सेन्टीग्रेड जलीय तापक्रम ठीक रहता है, सर्दियों में जलीय तापक्रम को स्थिर रखने के लिए थर्मोस्टेट या वाटर हीटर का उपयोग आवश्यक होता है।

पी. एच. - पानी न तो अधिक अम्लीय हो और न ही अधिक क्षारीय, सामान्यत: 7.1 से 7.5 के मध्य पीएच में मछली स्वस्थ रहती है।

ऑक्सीजन - नल वाले पानी में रसायन होते है, अत: सीधे उसका उपयोग नहीं करें, कुंआ, हैंडपम्प या ट्यूबवेल के पानी को कुछ समय तक (1-2 घंटे) खुला छोड़कर उपयोग करें क्योंकि ताजे पानी में घुलित ऑक्सीजन कम होती है। 

मछलियों का आहार

एक्वेरियम मछलियों के भोजन की मात्रा एवं देने की दर सावधानीपूर्वक नियंत्रित हो, क्योंकि भोजन की मात्रा कम या अधिक होने से मछली पर विपरीत असर होता है। सामान्य रूप से बाजार में पेलेटड भोजन उपलब्ध है, जिसमें सभी घटक सन्तुलित मात्रा में होते है इसके अतिरिक्त जीवित भोजन में केंचुआ, डेफनिया, साइक्लोप्स, मोएना, ट्योबिफिक्स आदि दिये जा सकते हंै।

एक्वेरियम की मछलियां

भारत में एक्वेरियम के लिए 100 से अधिक देशी एवं विदेशी प्रजाति की रंगीन मछलियां पायी जाती है, बाजार में विभिन्न प्रकार की मछलियां अलग-अलग मूल्य पर उपलब्ध हंै। गोल्ड मछली संसार की सबसे प्रसिद्ध एक्वेरियम मछलियों में से एक है। आकर्षक रंग के कारण यह अत्यन्त लोकप्रिय है। इसमें सामान्य गोल्ड फिश, फेन्टेल, वेल्टेल, कोमेट, गौरामी एवं लायनहेड, सिल्वर शार्क व ब्लैकमुर प्रमुख है। इसके अतिरिक्त कुछ प्रमुख एक्वेरियम मछलियां, ब्लैक विडोटेट्रा, नियॉंन टेट्रा, प्लैटी, मौली मछलियां आती है।

सजावटी मछली क्रय सम्बन्धी सावधानियां

मछलियां क्रय करते समय कुछ विशेेष बातों का ध्यान रखें:-

  • मछलियां चुस्त होना चाहिए, गतिहीन एवं असंतुलित नहीं होना चाहिए।
  • हमेशा छोटी मछलियों का चयन कर पालन करें।
  • उन मछलियों को क्रय न करें जो शरीर को किसी भी वस्तु से रगड़ती हों।
  • ऊपर वाला और पूंछ वाला पक्ष खड़ा और खुला होना चाहिए।
  • मछलियों के सभी पक्ष मुरझायें हुए नहीं होने चाहिए।
  • एक्वेरियम के कोनों में छुपी हुई मछली को कभी क्रय न करें।
  • आपस में संयोजन रखने वाली उपयुक्त मछली की प्रजातियों को ही क्रय करें।

 

एक्वेरियम प्रबंधन संबंधी प्रमुख सावधानियां
  • एक्वेरियम की आन्तरिक सफाई में कभी भी साबुन अथवा डिटरजेंट उपयोग नहीं करें, गंदगी दूर करने के लिए हल्के गर्म पानी में डुबे स्क्रब पैड या सादे नमक का प्रयोग किया जा सकता है। 
  • फिल्टर व एयर पम्प को भली प्रकार लगायें। 
  • नीचे बिछाने वाले पत्थरों को पानी से अच्छी तरह से धोने के बाद, सुखाकर इस्तेमाल करें।
  • एक्वेरियम में पानी का स्तर कम से कम 30 से.मी. तक हो।
  • एक्वेरियम में पानी डालते समय यह सावधानी रखें कि उसमें जमाई गयी सामग्री न हिले।
  • क्लोरीन युक्त जल का प्रयोग करने पर मछलियां मर जाती हैं, अतएव ऐसे जल को 24-48 घंटों तक खुली हवा में रखने के पश्चात ही (ऑक्सीकरण होने पर) प्रयोग करें।
  • नये एक्वेरियम में मछली संग्रह करते समय उनकी 'कन्डीशनिंग' अनिवार्य है। पॉलीथिन बैग जिसमें जल सहित मछलियां हों, को कुछ देर तक एक अलग बाल्टी के पानी में डुबाकर रखें, ताकि तापमान समान हो सके। 
  • किसी भी तरह का प्रदूषित जल एक्वेरियम मेें नहीं जाये। तीन चार दिन का रखा हुआ पानी एक्वेरियम हेतु उपयोग करना अच्छा होता है।
  • एक्वेरियम में ढक्कन लगाना जरूरी है अन्यथा मछलियां बाहर कूद सकती है सामान्यत: लकड़ी, एल्युमिनीयम या प्लास्टिक के ढक्कन, जिनमें बल्ब/ट्यूब लाइट लगी हो उपयोग करते हैं।
  • एक्वेरियम में मछलियों की बीमारी का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि बीमारी की रोकथाम न होने से मछलियां मरने लगती  हैं। किसी भी प्रकार की अप्रत्याशित गतिविधि होने पर मछलियों को ध्यान से देखें, यदि कोई मछली बार-बार सतह पर आये या सामान्य रूप से न तैरे, तो वह रोगग्रस्त रहती है। बीमार मछली को तुरंत बाहर निकालकर एक्वेरियम का पानी बदल दें।
  • सजावटी मछलियों की सभी प्रजातियां एक साथ नहीं रखी जा सकती, शाकाहारी या मांसाहारी मछलियों का अलग-अलग संयोजन होता है, अन्यथा मछलियां एक दूसरे को नुकसान पहुंचा सकती हैं। 
  • बाहर से लाये हुए पॉलीथिन बैग के जल को एक्वेरियम में सीधे न डालकर एक बाल्टी के स्वच्छ जल में मछलियों को रखें। तत्पश्चात धीरे से बाल्टी के जल सहित उन्हे एक्वेरियम में डाल दें। 

 

  • डॉ. संध्या रानी गौर, प्राध्यापक,मात्स्यकी 
  • ई.गां.कृ.वि.,रायपुर 
  • mohitsahuigkv@gmail.com
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