सोयाबीन कृषकों को सलाह

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इंदौर। भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर द्वारा 22 से 28 जुलाई की अवधि के लिए कृषकों को उपयोगी सलाह दी गई है।

प्रारम्भिक अवस्था में प्रकोप करने वाली इल्लियों -लिनसेड, केटरपिलर, हरी अर्ध कुंडलक इल्लियों पर नियंत्रण के लिए क्विनालफॉस 25 ईसी (1500  मिली/हे.) या इंडोक्साकार्ब 14.5 एससी (300  मिली/हे.) अथवा  फ़्लूबेन्डामाइड 39.35 एससी (150 मिली/हे.) अथवा  फ्लूबेन्डामाइड 20 डब्ल्यूजी (250 से 300  मिली/ हे.) अथवा स्पायनोटेरम 11.7 एससी (450 मिली/हे.) में से कोई एक कीटनाशक का छिड़काव करें। वहीं पत्ती खाने वाली इल्लियों और सफेद मक्खी पर नियंत्रण पाने के लिए पूर्व मिश्रित कीटनाशक बीटासाइफ्लूथ्रिन+ इमिडाक्लोप्रिड 350 मिली/हे. अथवा थायोमिथाक्सम+लेम्बडा सायहेलोथ्रिन 125 मिली/हे.  की दर से छिड़काव करने से तना मक्खी भी नियंत्रित होगी।

जिन स्थानों पर गर्डल बीटल का प्रकोप शुरू हो गया हो वहां पर थाईक्लोप्रिड 21.7 एससी 650  मिली/हे. अथवा प्रोफेनोफॉस 50 ईसी (125 मिली/हे.) या ट्राइजोफॉस 40 ईसी (800  मिली/हे.) की दर से छिड़काव करें। पीला मोजाइक बीमारी को फैलाने वाली सफेद मक्खी के प्रबंधन के लिए यलो स्ट्रीकी ट्रेप लगाएं और रोगग्रस्त पौधों को खेत से निकालकर नष्ट कर दें। रोग की तीव्रता ज्यादा होने पर थायोमिथाक्सम 25 डब्ल्यूजी (100  ग्राम /500  लीटर पानी का छिड़काव करें।

राइजोक्टोनिया जड़ गलन रोग के नियंत्रण हेतु निम्न में से किसी एक रसायन को 500 लीटर पानी के साथ फसल पर टेबुकोनाजोल (625 मिली/हे.) अथवा टेबूकोनाजोल+सल्फर (1250 मिली/हे.) अथवा  हेक्जाकोनाजोल 5 प्रतिशत ईसी (500  मिली/हे. अथवा पाय्रोक्लोस्ट्रोबिन 20त्न डब्ल्यूडब्ल्यूजी (375-500 मिली/हे.  का छिड़काव करें। सोयाबीन में अधिक समय तक सूखे की स्थिति होने पर डोरा/कुल्पा चलाएं और पलवार (मल्चिंग )का प्रयोग करें। अधिक समय तक वर्षा न होने पर सुविधानुसार सिंचाई करें और पोटेशियम नाइट्रेट (1 प्रतिशत) या ग्लिसरॉल/मेग्नेशियम कार्बोनेट 5त्न का छिड़काव करें.

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