प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में ड्रिप-स्प्रिंकलर निर्माता नहीं लेंगे भाग

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प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में ड्रिप-स्प्रिंकलर निर्माता नहीं लेंगे भाग
किसानों को नहीं मिलेगा योजना का लाभ

भोपाल। मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के क्रियान्वयन के लिए म.प्र. राज्य कृषि उद्योग विकास निगम द्वारा जारी रेट कॉन्ट्रेक्ट ऑफर की कुछ नियम एवं शर्तें अप्रासंगिक होने के विरोध स्वरूप ड्रिप-स्प्रिंकलर निर्माता इसमें भाग नहीं लेंगे। यह निर्णय ड्रिप-स्प्रिंकलर निर्माताओं की संस्था इरीगेशन एसोसिएशन ऑफ इंडिया की म.प्र. चैप्टर की साधारण सभा में लिया गया। इस सभा में 50 से अधिक ड्रिप एवं स्प्रिंकलर निर्माता, उनके प्रतिनिधि उपस्थित थे।

उल्लेखनीय होगा कि सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किसानों को अनुदान देने हेतु केन्द्र प्रवर्तित इस योजना को म.प्र. उद्यानिकी विभाग एम.पी. एफ.एस.टी.एस. पोर्टल के माध्यम से संचालित करता था। हाल ही में राज्य शासन ने इस योजना के क्रियान्वयन हेतु म.प्र. राज्य कृषि उद्योग विकास निगम को अधिकृत किया है।

केन्द्र के दिशा निर्देशों का उल्लंघन

केन्द्र प्रवर्तित प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के लिये केन्द्र द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार योजना में प्रशासनिक व्यय हेतु नोडल एजेन्सी योजना के बजटानुसार अधिकतम 5 प्रतिशत तक का व्यय कर सकती है। दिशा निर्देशों के अनुसार किसी भी शासकीय/ अर्धशासकीय संस्था को किसी भी प्रकार का सेवा शुल्क/ कमीशन लेना अथवा देना असंवैधानिक है। जबकि कृषि उद्योग विकास निगम द्वारा जारी आरओसी की शर्तों के अनुसार 5 प्रतिशत कमीशन अधिकृत रूप से मांगा जा रहा है।

धरोहर राशि दो बार

उद्यानिकी विभाग में पूर्व से 5 लाख की बैंक ग्यारंटी के साथ पंजीकृत ड्रिप- स्प्रिंकलर निर्माताओं को एमपी एग्रो में पुन: पंजीयन के साथ 4 लाख रु. की धरोहर राशि जमा करनी होगी।

किसानों पर अतिरिक्त भार

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना वर्ष 2019-20 में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई यंत्र के लिये किसानों को 15 प्रतिशत तक अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। क्योंकि इस वर्ष योजना में राज्य शासन गत वर्षों के अनुसार 10 प्रतिशत टॉपअप का प्रावधान नहीं किया है। साथ ही एमपी एग्रो द्वारा लिये जा रहे 5 प्रतिशत कमीशन का भार भी अंतत: किसानों को ही भुगतना है।

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