मक्का के फॉल आर्मी वर्म की पहचान व समन्वित कीट नियंत्रण

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इस कीट की मादा शलभ अपने अंडे एक समूह में 50 से अधिक की संख्या में पत्ती की निचली सतह पर देती है जो कि एक मिट्टी के रंग के पदार्थ से ढंके होते हैं एवं ये अंडे शंकु आकार के होते हैं। प्रौढ़ मादा शलभ सैकड़ों किलोमीटर तक उड़कर अंडे देने की क्षमता रखती है। नई इल्ली प्राय: हलके पीले रंग की होती जिसका सर प्रथम केंचुली उतरने के बाद लाल भूरा हो जाता है व उस पर काले रंग के उलटे वाय (Y) आकार का निशान होता है यही उसकी असली पहचान है जो कि इसे तम्बाकू की इल्ली से अलग कर पहचानने में मदद करती है। वयस्क इल्ली लगभग 30 से 40 मि. मी. लम्बी होती है। पौधे की प्रारंभिक अवस्था में इल्लियां समूह में पत्तियां खुरचकर हरा भाग खाती हैं। जिसके फलस्वरूप सफेद धब्बे दिखाई देने लगते हैं एवं पुष्प अवस्था में ये पूरे पौधे की पत्तियां, नर मंजरी एवं भुट्टों को नुकसान पहुँचाती है जिसके कारण पौधों में केवल डंठल एवं पत्तियों का मध्य शिरा भाग बचता है एवं ये प्राय: पोंगली में छिपी रहती हैं। अनुकूल मौसम होने पर यह कीट 35 से 40 दिन में जीवन चक्र पूरा कर लेता है तथा 1 वर्ष में 6-7 पीढिय़ां पूरी करने की क्षमता रखता है।

निगरानी- फसल अवधि में कीट का प्रकोप पहचानने हेतु 1 एकड़ में 5 फेरोमोन प्रपंच लगाये जाते हैं ।

आर्थिक क्षति स्तर-

  • पौध अवस्था (3-4 सप्ताह तक)- 5' नुकसान
  • पोंगली अवस्था (5-7 सप्ताह तक)- 20' नुकसान  
  • नर मंजरी एवं भुट्टे बनने कि अवस्था (9-10 सप्ताह तक)- 10' नुकसान 

प्रबंधन-

सस्य प्रबंधन :-

  • फसल की बुवाई से पहले खेत की गहरी जुताई करें जिससे की फॉल आर्मी वर्म कीट की शंखी मिट्टी की सतह पर आ जाती है। जिससे परभक्षी उन्हें खाकर नष्ट कर देते हैं।
  • समय पर बुवाई करें। मानसून पूर्व सूखी बोनी ज्यादा प्रभावी है अथवा मानसून वर्षा के साथ ही बुवाई करें।
  • एक क्षेत्र में बोनी एक साथ करें।
  • मक्का के साथ अंतरवर्तीय दलहनी फसलें (अरहर, मूंग अथवा उड़द)  लगायें।
  • पक्षियों के बैठने के बैठने के लिए ञ्ज आकार की खूंटियां 30 दिन की अवस्था तक 100 खूंटी/एकड़ की दर से लगायें।
  • नेपियर घास (ज्वार चरी) या सूरजमुखी ट्रेप फसल के तौर पर मक्के के खेत के चारों और लगायें।
  • खेत की साफ सफाई का ध्यान रखें एवं संतुलित मात्र में उर्वरकों का प्रयोग करें, विशेषकर नत्रजन अधिक न हों।
  • उचित कतार- कतार व पौध- पौध दूरी का प्रयोग करें।
फॉल आर्मी वर्म फसल पर एक फौज (समूह) के रूप में आक्रमण करता है तथा 30-35 डिग्री सेंटीग्रेड तापक्रम व 70' से अधिक आर्द्रता पर यह गंभीर नुकसान करने की क्षमता रखता है। यह कीट बहुभक्षी होता है जो कि मक्का के अतिरिक्त गन्ना, ज्वार, बाजरा, धान को नुकसान पहुंचाता है जिसके काटने चबाने वाले मुखांग होते हैं। इस कीट का वैज्ञानिक नाम स्पोडोप्टेरा फ्रूजीपरडा है एवं यह मूलत: अफ्रीकी कीट है जो कि रात्रिचर होता है। सोयाबीन की उत्पादकता लगातार कम होने के कारण पिछले तीन वर्षों से किसान भाई मक्का फसल का उत्पादन अधिक रकबे में ले रहे हैं अत: इसका प्रबंधन और भी महत्वपूर्ण हो गया है। 

यांत्रिक प्रबंधन :- 

  • हाथ से इल्ली एवं अण्डों के समूह को नष्ट करें।
  • प्रारंभिक अवस्था में लकड़ी का बुरादा, राख अथवा बारीक रेत को पोंगली में डालें।
  • नर वयस्क कीट को नियंत्रण में करने के लिए 15 फेरोमोन प्रपंच/एकड़ की दर से लगायें।

 जैविक प्रबंधन :-

  • प्राकृतिक शत्रुओं की संख्या बढ़ाने के लिए अंतरवर्तीय दलहनी फसलें साथ में लगायें तथा पुष्पीय पौधे (सूरजमुखी) आस-पास लगायें।
  • ट्राईकोग्रामा प्रोटीओसम अथवा टेलीनोमस रीमस को 50,000 प्रति एकड़ की दर से प्रति सप्ताह विमोचित करें।
  • बेसिलस थुरिनजिएंसिस1किग्रा/हे. अथवा बेवेरिया बेसियाना 1.5 ली./हे. का छिड़काव सुबह अथवा शाम के समय करें। 

रसायनिक नियंत्रण :-

  • सायंट्रानिलिप्रोल 19.8' + थायो मेथाक्सम 19.8' से 4 मिली/किग्रा बीज की दर से बीजोपचार करें ।
  • प्रथम अवस्था (पौध अवस्था) - फॉल आर्मी वर्म की इल्ली को नियंत्रण में करने के लिए 5' निबोली सत 5 मिली/ली. पानी के दर से घोल बनाकर छिड़काव करें ।
  • द्वितीय अवस्था (पोंगली अवस्था) - इल्ली के द्वितीय एवं तृतीय अवस्था में एमामेक्टिन बेंजोएट 0.4 ग्रा/ली. पानी अथवा  थायो मेथाक्सम 12.6' + लेम्डासाईहेलोथ्रिन 9.5' प्रति ली. पानी की दर से छिड़काव करें।

जहरीला चारा- इस कीट की अंतिम अवस्था वाली पूर्ण विकसित इल्ली के लिए यह उपयोगी है। इसको बनाने के लिए 10 किग्रा धान छिलका + 2 किग्रा गुड़ + 2- 3 लीटर पानी का मिश्रण बनायें। इस मिश्रण को 24  घंटों के लिए किण्वित होने दें। तत्पश्चात इसमें 100 ग्रा. थायोडाइकार्ब खेत में डालने के आधा घंटे पहले मिलाएं तथा इसे पोंगलियों में डालें।

  • तृतीय अवस्था (नर मंजरी व मादा पुष्प अवस्था) - इस अवस्था में इल्ली को हाथ से नष्ट करें। जन चेतना संचार हेतु विस्तार कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जाये एवं समूह चर्चा के माध्यम से समय पर पौध संरक्षण क्रियाएं करने हेतु प्रेरित किया जाये।

 

  • डॉ पी. सी. मिश्रा
  • डॉ. विकास जैन 
  • डॉ अरुण कुमार चौधरी
  • डॉ. नेहा शर्मा 

कृषि महाविद्यालय पावरखेड़ा, होशंगाबाद
deanpkd@rediffmail.com

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