लोकसभा में कृषि

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(नई दिल्ली से निमिष गंगराड़े)

नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने गत सप्ताह लोकसभा में बताया कि देश में निवल बुवाई क्षेत्र 140130 हजार हेक्टेयर और निवल सिंचित क्षेत्र 68385 हजार हेक्टेयर है। वहीं ड्रिप सिंचाई का क्षेत्र 4374.53 हजार हेक्टेयर है। आपने सांसद श्री तेजस्वी सूर्या के प्रश्न के उत्तर में जानकारी दी कि कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा 2014 में मेसर्स ग्लोबल एग्री सिस्टम लिमिटेड के माध्यम से सूक्ष्म सिंचाई योजना का प्रभाव मूल्यांकन अध्ययन किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार -

  • सिंचाई की लागत 20' से 50' तक औसतन 32.3' कम हो जाती है। 
  • बिजली की खपत लगभग 31' कम हो जाती है। 
  • उर्वरकों की 7' से 42' की सीमा तक बचत होती है।
  • फलों और सब्जियों की औसत उत्पादकता लगभग 42.3' और 52.8' तक बढ़ती है।
  • किसानों की कुल आय 20' से 68' तक औसतन 48.5' बढ़ जाती है। 

ड्रिप सिंचाई सहित सूक्ष्म सिंचाई की जल उपयोग दक्षता काफी अधिक 80 से 95' तक होती है। जबकि पारंपरिक बाढ़ सिंचाई में यह केवल 30-50' तक होती है। जिसके परिणाम स्वरूप ड्रिप सिंचाई के तहत सिंचाई जल की भारी मात्रा में बचत हुई है और यह भारत के विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्रों में अखिल भारतीय समन्वित सिंचाई जल प्रबंधन अनुसंधान परियोजना केन्द्रों द्वारा विभिन्न फसलों पर आयोजित किए गए अनुसंधान अध्ययनों से भी प्रमाणित है। विभिन्न केन्द्रों पर बाढ़/सतही सिंचाई की तुलना में ड्रिप सिंचाई से होने वाली जल बचत का ब्यौरा चार्ट में देखें।

ड्रिप-स्प्रिंकलर सिंचाई से होती जल की भारी बचत 
फसल सतही सिंचाई की तुलना में जल की बचत (')
केला 29.7
केला 50.1
टमाटर 67.8
ओकरा 49.5
मिर्च 24.1
बैंगन 51.7
बीटी कपास 19.8
करेला 45.4
टमाटर 28.7
कपास 27.8
कपास 40.3
गेहूँ 23
गन्ना 35
आलू 31.3
गना 35
संकर कपास 25.9
बीटी कपास 24.7
कपास - खेत पर 28.1
कपास - खेत पर 48.6
समर स्कैवश 122.4
स्ट्रॉबेरी 63
तरबूज 207.1
गेंदे का फूल 19.2
गन्ना 25
सोयाबीन 25.1
सोयाबीन 16.2
हल्दी 20
तरबूज 20
तरबूज 29.2
मूंगफली 33.3
मूंगफली 39
काजू 19.4
ब्रोकोली 30
ग्लेडियोलस 36.6
गन्ना 17.9
प्याज 32
स्ट्रॉबेरी 58.6
ग्रीष्मकालीन मिर्च 161.2
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