भाजीपाला ने पलटी बाजी

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मंदसौर। आठ सदस्यों का बड़ा परिवार कुल 10 बीघा भूमि जिसमें 3 बीघा बंजर, बची 7 बीघा भूमि पर अपना जीवनयापन करता एक परिवार गरीबी के बेहद करीब पहुंच गया। परिवार के मुखिया ने जैसे-तैसे बच्चों की पढ़ाई विवाह करवाया जिसमें यह भूमि गिरवी रखनी पड़ी। परिवार के बड़े पुत्र ने दसवीं तक शिक्षा ग्रहण कर बड़ौदा (गुजरात) के लिए नौकरी हेतु प्रस्थान किया, शेष भाई अन्य रिश्तेदारों की भूमि को संभालते अपना जीवनयापन करने लगे। यह कहानी कृषि से मोहभंग रुद्रवाल परिवार की जो कि जिला मुख्यालय से 140 कि.मी. दूर भानपुरा कस्बे में निवास करता था। परिवार के बड़े पुत्र श्री नंदकिशोर पिता श्री मथुरालाल रुद्रवाल की 1994 में 580/- रु. प्रति माह से की गई शुरुआत 1997 में पूना में खत्म हुई, यहां 22 वर्षों में श्री नंदकिशोर 45 हजार प्रति माह की नौकरी तक पहुंच गये। इनके दो पुत्र इंजीनियरिंग पढ़ाई में अध्ययनरत, पूना में डेढ़ करोड़ मूल्य की अचल सम्पत्ति, जिसका 40 हजार रु. प्रति माह किराया भी आता है, के मालिक श्री नंदकिशोर के मन में खेती ही करना अपना लक्ष्य बनाया था। 2018 में पुन: अपने मूल कस्बे भानपुरा का रुख किया। सर्वप्रथम अपनी पुस्तैनी जमीन हुड़ाई और उसमें खेती की ठानी। उनके इस कदम का गांव वालों ने मजाक बनाया। 45 हजार की नौकरी छोड़कर 10 बीघा भूमि पर कैसे जीवनयापन करेगा। पर श्री नंदकिशोर ने हार नहीं मानी। खेत को सुधारा, सब्जी उत्पादन प्रारंभ किया, सभी आधुनिक संसाधन जिनमें ड्रिप, हाइब्रिड सीड्स आदि का प्रयोग कर कम बजट में अधिक सब्जी उत्पादन ने इस भूमि को लाभकारी बना दिया। एक साल से निरन्तर सब्जी उत्पादन कर रहे हैं। इस वर्ष टमाटर, बैंगन लगाई थी जिसमें कुल लागत 50 हजार रु. एवं आमदनी रु. 2 लाख हुई। जैविक तरीका भी उपयोग करने से इनकी सब्जी स्थानीय मंडी में अच्छी किस्म की होने में हाथों-हाथ विक्रय होती है। सब्जी उत्पादन में सहयोग के लिए 5500/- प्रति माह में सहयोगी एवं 175/- रु. प्रति दिन में 5 महिला मजदूरों को वेतन भी दे रहे हैं। 

कहानी यह दर्शाती है कि कृषि विज्ञान की तरक्की एवं बढ़ती जनसंख्या के कारण 10 बीघा भूमि भी सब्जी उत्पादन करने में व्यवसाय की तरह उपयोग की जा सकती है।  

अधिक जानकारी के लिए कृषक श्री नंदकिशोर मोदी, द्वारकाधीश कृषि आर्गेनिक फार्म, मो. : 9960074956 एवं 7970014450 पर सम्पर्क करें।

खरपतवार नियंत्रण यंत्र

प्रस्तुति: शैलेष ठाकुर, मो.: 9926913999 

यह डोरा 35 साल पुरानी सिडड्रिल के चेसिस पर बनाया है। इससे मंैने आराम से दिन मेें 10 हेक्टेयर में डोरा चलाया। इस डोरे मेें हर पाटले मेें सफाई के लिए तीन तीन दांते दिए हुए हैं इसमें भी नट बोल्ट से दांते खिसका सकते है। इसकी कीमत 26000 है। 
यह डोरा जो बैल से खींचे जाते थे उस पैटर्न पर बना हुआ है, इसमेें खरपतवार अच्छा साफ होता है, हर डोरा एडजस्टेबल है। किफायती व सीडड्रिल के बीज गिराने वाले दांते खोलकर पंजी से यदि सोयाबीन कटे तो पंजी छोटी लगा दें।
यह मोटर सायकिल पर चलाने के लिए बनाया गया है। इसकी लागत 2200 रुपए आती है, जिस किसान के पास साधन नहीं है उसके लिए बहुत अच्छा है। इससे आराम से 3 हेक्टेयर जमीन डोर सकते है। अगर किराए से डोरे चलवाता है तो किसान को इसी 3 हेक्टेयर में 3000 से 6000 रुपए देने होंगे। यह हाथ से चलाने वाला डोरा है इसमें दो लाइन के बीच की जगह जिसे हम मालवी में पाटला बोलते हैं। इसे बनाने में 700 से 800 का खर्च आता है।
 
इस डोरे में एक पाटले में दो दांते हैं और पीछे एक पहिया है जो पाटले में खरपतवार को बिखेरने का कार्य करता है लेकिन नमी अगर होती है तो इसमें मिट्टी जम कर यह रोलर की तरह हो जाता है। इस डोरे को मोटरसाईकल पर थ्री व्हील का जुगाड़ कर बनाया गया है चंूकि तीन पहिए होने से मोटरसाईकल का बैलेंस हो गया, इस पर दांते ज्यादा लगा दिए जोकि पूरी सीडड्रिल कवर करता है। 

 

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