अरहर की उन्नत खेती

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भूमि का चुनाव

अरहर विभिन्न प्रकार की भूमि में लगाया जा सकता है, इसकी खेती के लिए हल्की रेतीली दोमट या मध्यम भूमि जिसमें प्रचुर मात्रा में स्फुर तथा जिसका पी.एच. मान 7-8 के बीच में हो व समुचित जल निकासी वाली हो इसके लिये सर्वोत्तम होती है। जिन खेतों में लगातार अरहर की फसल ली जा रही है उसको न चुने।

खेत की तैयारी

पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करने के बाद 2 या 3 जुताई देशी हल या बखर से करके पाटा चलाकर खेत को समतल करें। जल निकास की समुचित व्यवस्था करें। बुआई के पश्चात खेत में जल निकास के लिये 10-15 मीटर की दूरी पर नालियां बना दें, ऐसे खेत जिनमे पानी भराव की समस्या को उनमे रिज एण्ड फरो बनाकर अरहर की खेती की जा सकती है।

बीज की मात्रा एवं बीजोपचार 

उन्नत किस्मों का बीज 18-20 कि.ग्रा./हे. की दर से बुआई करें। मृदा जनित रोगों से बचाव के लिए बीज को फफूंदनाशक दवा थाइरम $़कार्बेन्डाजिम को 2:1 में मिलाकर 3 ग्राम/कि.ग्रा. बीज की दर से उपचारित करें। तत्पश्चात बीज को राइजोबियम कल्चर 5 ग्राम/कि.ग्रा. की दर से उपचारित करें। 50 ग्राम गुड़ या चीनी को 1-2 ली. पानी में घोलकर उबाल लें। घोल के ठंडा होने पर उसमें 200 ग्रा. राइजोबियम कल्चर मिला दें। इस कल्चर में 10 कि.ग्रा. बीज डाल कर अच्छे से मिला लें ताकि प्रत्येक बीज पर कल्चर का लेप चिपक जाये। बीज को कल्चर से उपचरित करने के बाद छाया में सुखाकर शीघ्र बुवाई करें। उपचारित बीज को कभी भी धूप में न सुखायें। 

खरीफ की दलहनी फसलों में अरहर का विशेष स्थान है। अरहर की दाल में लगभग 20-21 प्रतिशत तक प्रोटीन पाई जाती है, साथ ही इस प्रोटीन का पाच्यमूल्य भी अन्य प्रोटीन से अच्छा होता है। अरहर मृदा में लगभग 200 कि.ग्रा. तक वायुमण्डलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर मृदा उर्वरकता एवं उत्पादकता में वृद्धि करती है। दलहनी फसलें खाद्यान्न फसलों की अपेक्षा अधिक सूखारोधी होती हैं। इसलिये शुष्क क्षेत्रों में अरहर किसानों द्वारा प्राथमिकता से बोई जाती है। असिंचित क्षेत्रों में इसकी खेती लाभकारी सिद्ध हो सकती है क्योंकि गहरी जड़ एवं अधिक तापक्रम की स्थिति में पत्ती मोडऩे के गुण के कारण यह शुष्क क्षेत्रों में सर्व उपयुक्त फसल है। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्यप्रदेश, कर्नाटक एवं आंध्रप्रदेश देश के प्रमुख अरहर उत्पादक राज्य हैं। मध्य प्रदेश में अरहर को लगभग 4.75 लाख हेक्टर क्षेत्र में लिया जाता है जिससे औसतन 842 कि.ग्रा. प्रति हेक्टर उत्पादन होता है। उन्नत तकनीक से खेती कर अरहर का उत्पादन दुगना किया जा सकता है।

बुआई का समय एवं विधि

शीघ्र पकने वाली किस्मों की बुआई सिंचित क्षेत्रों में जून के प्रथम पखवाड़े तथा मध्यम देर से पकने वाली प्रजातियों की बुआई जून के द्वितीय पखवाड़े में करें। बुआई सीडड्रिल या हल के पीछे चोंगा बांधकर पंक्तियों में करें। ऐसे खेत जिनमे जल भराव की समस्या हो उनमे बुवाई के लिए कूड़ एवं पंक्ति विधि उपयुक्त होती है। शीघ्र पकने वाली जातियों के लिये पंक्तियों के बीच की दूरी 30-45 से.मी. तथा पौधे से पौधे के बीच की दूरी 10-15 से.मी., मध्यम तथा देर से पकने वाली जातियों के लिये 60-75 से.मी. कतार से कतार तथा पौधे से पौधे की दूरी 20-25 से.मी. रखते हैं।

उर्वरक

खाद और उर्वरक का प्रयोग हमेशा मिट्टी की जांच के बाद ही करें मृदा परीक्षण के आधार पर समस्त उर्वरक अंतिम जुताई के समय हल के पीछे कूड़ में बीजों से 2 से.मी. की गहराई व 5 से.मी. साइड में देना सर्वोत्तम रहता है। प्रति हेक्टर 20 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 50 कि.ग्रा. फास्फोरस, 20 कि.ग्रा. पोटाश व 20 कि.ग्रा. गंधक की आवश्यकता होती है। जिन क्षेत्रों में जस्ता की कमी हो वहां पर 25 कि.ग्रा. जिंक सल्फेट प्रयोग करें। नाइट्रोजन एवं फस्फोरस की समस्त भूमियों में होती है। किन्तु पोटाश एवं जिंक का प्रयोग मृदा परिक्षण उपरान्त खेत में कमी होने पर ही करें। नत्रजन एवं फासफोरस की संयुक्त रूप से पूर्ति हेतु 100 कि.ग्रा. डाई अमोनियम फास्फेट एवं गंधक की पूर्ति हेतु 100 कि.ग्रा. जिप्सम प्रति हेक्टेयर का प्रयोग करने पर अधिक उपज प्राप्त होती है।

अरहर की उन्नत किस्में
किस्म  पकने की अवधि (दिन) औसत उपज  क्विं./एकड़ गुण
शीघ्र पकने वाली जातियां  
आईसीपीएल-151 120-125 08-Sep
  • फली हरे रंग की एवं बैंगनी धारियां होती हैं।
  • दाने गोल बड़े एवं धूसर सफेद रंग के होते हैं।
पूसा-33 135-140 08-Sep
  • फली मध्यम आकार की एवं फलियों पर महरुन लाल धारियां होती हैं।
  • दाने लाल रंग के होते हैं।
आईसीपीएल-87 125-135 08-Sep
  • फली मध्यम आकार की एवं महरुन एवं लाल रंग की धारियां होती हैं।
  • उक्टा सहनशील।
टीजेटी-501 140-145 09-Oct
  • उकटा के लिये के लिये प्रतिरोधक।
  • दाना मोटा।
मध्यम पकने वाली जातियां
सी-11 160-165 6-7.5
  • उकटा अवरोधी।
आईसीपीएल 87-119 160-165 08-Sep
  • फलियों पर महरुन एवं लाल धारियां होती हैं।
  • दाने लाल रंग के होते हैं।
जवाहर-4 165-175 07-Aug
  • दाने भूरे लाल एवं मध्यम आकार के होते हैं।
  • पौधे मध्यम आकार के एवं घने होते हैं।
जेकेएम-7 180-190 07-Aug
  • दाने गहरे भूरे लाल रंग के मध्यम एवं गोल आकार के होते हैं।
  • पौधे लम्बे आकार के होते हैं।
खरगोन-2 150-160 04-May
  • दाना लाल।
  • असीमित वृद्धि वाला दाना लाल।
देर से पकने वाली जातियां
जेकेएम-7 170-185 08-Sep
  • उकटा एवं बांझपन रोग अवरोधी।
जेकेएम-189 150-160 10-Dec
  • उकटा एवं बांझपन रोग अवरोधी।
  • फली मक्खी के लिये सहनशील है।

सिंचाई एवं जल निकास

जहां सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो वहां पर बारिश न होने पर एक हल्की सिंचाई फूल आने पर व दूसरी फलियां बनने की अवस्था पर करने से पैदावार में बढ़ोतरी होती है। अधिक अरहर उत्पादन के लिए खेत में उचित जल निकास का होना प्रथम शर्त है अत: निचले एवं अधो जल निकास की समस्या वाले क्षेत्रों में मेड़ों पर बुवाई करना उत्तम रहता है।

खरपतवार नियंत्रण

प्रथम 60 दिनों में खेत में खरपतवार की मौजूदगी अत्यन्त नुकसानदायक होती है। हैन्ड हो या खुरपी से दो निंदाई करें। प्रथम बुवाई के 25-30 दिन बाद एवं द्वितीय 45-60 दिन बाद खरपतवारों के प्रभावी नियंत्रण के साथ मृदा वायु-संचार में वृद्धि होने से फसल एवं सह जीवाणुओं की वृद्धि हेतु अनुकूल वातावरण तैयार होता है। नींदानाशक पेन्डीमिथालिन 1.25 कि.ग्रा. सकिय तत्व/हे. की दर से बुवाई के बाद 3 दिनों के अंदर प्रयोग करने से खरपतवार खेत में नहीं उगता है। नींदानाशक प्रयोग के बाद एक निंदाई लगभग 30 से 40 दिन की अवस्था पर करना लाभदायक होता है। 

कटाई एवं मड़ाई

80 प्रतिशत फलियों के पक जाने पर फसल की कटाई हंसिया से 10 से.मी. की ऊंचाई पर करें। तत्पश्चात फसल को सूखने के लिए बण्डल बनाकर फसल को खलिहान में ले आते हैं। फिर चार से पांच दिन सुखाने के पश्चात पुलमैन थ्रेशर द्वारा या लकड़ी के लठ्ठे पर पिटाई करके दानों को भूसे से अलग कर लेते हैं।

उपज

उन्नत विधि से खेती करने पर 15-20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दाना एवं 50-60 क्विंटल लकड़ी प्राप्त होती है।

भण्डारण

भण्डारण हेतु नमी का प्रतिशत 10-11 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। भण्डारण में कीटों से सुरक्षा हेतु एल्यूमीनियम फास्फाइड की 2 गोली प्रति टन प्रयोग करें।    

  • डॉ. देवीदास पटेल, कृषि विज्ञान केंद्र, बनखेड़ी, होशंगाबाद
  • devidaspatelp24@gmail.com
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